ड्रेगन लाइट और टार्च की रोशनी के बाद ड्रोन ने खंगाला चप्पा चप्पा

दीवारें टूटी, चट्टानें बिखर गईं और कई फीट नीचे तक जा पहुंची बिजली

By: Lalit Tiwari

Published: 12 Jul 2021, 09:21 PM IST

आमेर मावठा के पास बने वॉच टावर से जयपुर का खूबसूरत नजारा देखने गए जयपुर और अन्य जिलों के पर्यटकों की आकाशीय बिजली गिरने से हुई मौत के बाद अभी भी मौके पर निशान बाकी हैं। घायलों को अस्पताल पहुंचाने के बाद एसडीआरएफ और सिविल डिफेंस की टीमों ने रात ढाई बचे तक सर्च अभियान जारी रखा, ताकि अगर कोई व्यक्ति जीवित हो तो समय रहते उसकी जान बचाई जा सके। काली अंधेरी रात में ड्रेगन लाइटों और टार्च की रोशनी के बीच आस-पास की झाड़ियों में जिदंगी की तलाश चलती रही। आधी रात तक चले सर्च अभियान के बाद सुबह वापस सोमवार सुबह 7 बजे सर्च ऑपरेशन फिर शुरु किया गया। इसके लिए ड्रोन कैमरे की मदद ली गई। ड्रोन के जरिए झाड़ियों के आस-पास को देखा गया ताकि कोई व्यक्ति बचने के लिए कूदा हो तो उसे निकाला जा सके। 11 लोगों की मौत के बाद अब घायल हुए लोगों को बचाने का प्रयास लगातार जारी हैं। एसडीआरएफ के कमांडेन्ट पंकज चौधरी ने बताया कि सर्च अभियान शाम 5.30 बजे तक रहा। किसी घायल या मृत व्यक्ति के पहाड़ी पर फंसे होनी की पुष्टि नहीं होने के बाद इसे बंद कर दिया।

ड्रोन से खंगाला चप्पा चप्पा
वॉच टॉवर में गिरी बिजली से हुई मौत के बाद एसडीआरएफ और सिविल डिफेंस की टीम ने मिलकर सर्च अभियान चलाया। टीम के लोगों का मानना था कि हो सकता है बचने के लिए किसी ने उपर से छलांग लगा दी हो और वह नीचे झाड़ियों में जाकर फंस गया हो। ऐसे में ड्रोन की मदद ली गई। ड्रोन के जरिए आस-पास पूरे क्षेत्र का चप्पा चप्पा खंगाला गया ताकि कोई भी व्यक्ति अगर नीचे गिर गया हो तो उसे बाहर निकाला जा सके।

शवों को नीचे लाने में आई परेशानी
मावठा के सामने बने वॉच टावर तक पहुंचने के लिए सीधी चढ़ाई हैं। सीढ़ियां कई जगह छोटी होने की वजह से लोगों को चढ़ने में परेशानी आती है। यह समस्या तब और बढ़ जाती है जब बरसात की वजह से सीढ़ियों पर फिसलन शुरु हो जाती हैं। ऐसे में नीचे उतरते समय काफी सावधानी की जरूरत होती हैं। ऊंचाई अधिक होने की वजह से कई जगह ऐसी स्थिति आती है कि एक व्यक्ति ही किसी तरह नीचे उतर सकता हैं। ऐसे में उपर हुई 11 मौतों के बाद एसडीआरएफ और सिविल डिफेंस के कर्मचारियों को उन्हें नीचे लाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। पहले स्ट्रेचर के जरिए नीचे लाने का प्रयास हुआ, लेकिन गिरने के डर की वजह से शवों को बैडशीट में रखकर नीचे उतारना पड़ा। घायलों को तो टीम के कई सदस्य कंधे पर लेकर नीचे उतरे।

Lalit Tiwari Desk
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