देश के करोड़ों बेरोजगारों को रोजगार देंगे ड्रोन

जयपुर. देश में ड्रोन विनिर्माण और ड्रोन ऑपरेटरों की माँग में जबरदस्त इजाफा होने की उम्मीद है क्योंकि केन्द्र सरकार ने गाँवों में आबादी वाले क्षेत्र की ड्रोन से मेपिंग कर भूमि का मालिकाना हक तय करने की स्वामित्व योजना को अमली जामा पहनाना शुरू कर दिया है।

By: Subhash Raj

Published: 26 Jun 2020, 09:01 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस साल अप्रैल में पंचायती राज दिवस पर स्वामित्व योजना की शुरुआत की थी। इसके क्रियान्वयन की जिम्मेदार भारतीय सर्वेक्षण विभाग को सौंपी गई है जो भूमि की मेपिंग कर राज्य सरकारों को डाटा सौंप देगा। इसी डाटा के आधार पर स्थानीय सरकारें भूमि का स्वामित्व तय करेंगी। भारत के महासर्वेक्षक और लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गिरीश कुमार ने उद्योग महासंघ फिक्की द्वारा आयोजित एक वेबिनार में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस योजना में देश के छह लाख से अधिक गाँवों के आबादी वाले क्षेत्रों की पूरी मेपिंग की जानी है। इसके लिए बड़ी संख्या में ड्रोनों की आवश्यकता होगी। भारतीय ड्रोन विनिर्माण उद्योग अभी शुरुआती चरण में है। कोई भी स्टार्टअप कंपनी इतनी बड़ी संख्या में आपूर्ति करने में सक्षम नहीं होगी इसलिए एक बड़े ऑर्डर की निविदा जारी करने की बजाय छोटे-छोटे ऑर्डरों की निविदायें जारी की जायेंगी ताकि स्टार्टअप को मौका मिल सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसमें गुणवत्ता और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जायेगा। उन्होंने बताया कि योजना के तहत मेपिंग का काम तकरीबन पाँच साल तक चलने का अनुमान है। इस दौरान बड़ी संख्या में ड्रोन पायलटों की भी जरूरत होगी। न सिर्फ ऑपरेटरों को ड्रोन चलाने की जानकारी होनी चाहिए बल्कि योजना की जरूरत के हिसाब से उन्हें भूमि के मेपिंग की भी बुनियादी जानकारी होनी चाहिये। देश में ऐसा कोई संस्थान नहीं है जहाँ इस तरह का प्रशिक्षण दिया जा रहा हो। इसे देखते हुये भारतीय सर्वेक्षण विभाग ने स्वयं प्रशिक्षण पाठ्यक्रम तैयार करने और प्रशिक्षण देने का फैसला किया है।
लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) कुमार ने बताया कि महाराष्ट्र में प्रयोग के आधार पर इस योजना की शुरुआत की गई थी। इसके बाद कुछ अन्य राज्यों में भी प्रयोग हो चुका है। इसमें त्रुटि की संभावना 10 सेंटीमीटर से भी कम होगी। साथ ही किसी भूखंड का अक्षांश और देशांतर अंकित करने के लिए ड्रोन पर जीपीएस भी लगा होगा और जहाँ दो लोगों की जमीन के बीच पक्की दीवार है वहाँ सिर्फ वीडियोग्राफी से ही स्वामित्व तय हो जायेगा। जहाँ दो या अधिक परिवारों की खुली जमीन आपस में मिलती है वहाँ चूने से जमीन पर लकीर खींचने के बाद ड्रोन से मेपिंग की जायेगी।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय में संयुक्त सचिव अंबर दुबे ने कहा कि देश में ड्रोन के इस्तेमाल की अपार संभावनाएं हैं। मौजूदा सरकार हर प्रस्ताव पर खुले मन से विचार कर जल्दी फैसला लेने में विश्वास रखती है। उन्होंने कहा कि राजस्थान में टिड्डी दलों से निपटने के लिए राज्य सरकार ने ड्रोन से रसायन के छिड़काव की अनुमति माँगी थी। इस पर एक दिन से भी कम समय में नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने स्वीकृति दी थी। श्री दुबे ने कहा कि मेपिंग के अलावा कृषि, स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन, कानून व्यवस्था बनाये रखने और बुनियादी ढाँचा जैसे क्षेत्रों में ड्रोन का उपयोग किया जा सकता है। सरकार आने वाले समय में पायलट की दृश्य सीमा से बाहर ड्रोन उड़ाने और रात में ड्रोन उड़ाने की अनुमति देने पर भी विचार कर रही है।

Subhash Raj
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