गंदे काम की कमजोर धाराएं, इधर गिरफ्तार उधर जमानत, आरोपी फिर शुरू कर देता है धंधा

Rajathan Crime: मुकदमा इतना कमजोर, जेल से छूटते ही बेच रहे नशा, गिरफ्तारी के बाद लगातार नजर रख दोबारा पकड़ रही पुलिस

जयपुर. मादक पदार्थ के कारोबार में कुछ लोग इस कदर लिप्त हो चुके हैं कि उन्हें अब पुलिस और कानून का भी खौफ नहीं है। पुलिस पकड़ती है, कुछ दिन जेल में बिताने के बाद जमानत पर रिहा होकर फिर से उसी धंधे में आ जाते हैं।
अपराधी इतने शातिर हो चुके हैं कि जेल से छूटते ही ठिकाना बदल लेते हैं, लेकिन धंधा नहीं छोड़ते। उन्हें मोटी कमाई इसी में दिखती है। ऐसे में अब पुलिस दूसरे तरीके से काम कर रही है। पुलिस की ओर से एनडीपीएस एक्ट के तहत पकड़े गए बदमाशों पर लगातार नजर रखी जा रही है।


न्यायालय में मात खानी पड़ी

एनडीपीएस एक्ट के मामलों में पुलिस भी कई बार कोताही बरतती है। एक्ट के प्रावधानों के अनुरूप काम न करने से उन्हें न्यायालय में मात खानी पड़ती है, जिससे अपराधी आसानी से छूट जाता है। पुलिस सिर्फ यह सोचती है कि मादक पदार्थ की मात्रा पर ही अभियुक्त का केस मजबूत होता है।
मामले बता रहे, बेखौफ हैं अपराधी

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12 दिन बाद फिर शुरू
टीपी नगर घाट की गुणी निवासी सूरज सिंह उर्फ पप्पू लम्बे समय से अवैध मादक पदार्थ आपूर्ति में लिप्त रहा है। पुलिस ने उसे कानोता में 8 नवंबर को 2.800 किलो गांजा के साथ पकड़ा था। 12 दिन बाद जमानत पर रिहा होकर उसने फिर से धंधा शुरू कर दिया।

पति-पत्नी दोनों तस्कर

आमागढ़ निवासी सुरमा देवी को 450 ग्राम गांजा के साथ पकड़ा गया था। कुछ दिनों बाद फिर से वह उसी धंधे में लिप्त हो गई। पुलिस ने 22 नवंबर को गिरफ्तार कर उसकी निशानदेही पर 15 किलो गांजा पकड़ा था। सुरमा का पति विक्की बड़ा तस्कर है।

पहले दो बार, फिर पकड़ा

मूलत: टोंक निवासी रामप्रकाश बैरवा को 4 नवंबर को 200 ग्राम गांजे के साथ पकड़ा था। फिर उसे 11 नवंबर को 3 किलो गांजा के साथ दबोचा था। दो बार गिरफ्तारी के बाद भी उसका कारोबार रुका नहीं तो पुलिस ने 4 दिसंबर को फिर पकड़ा है।

केस में पुलिस कई खामियां छोड़ देती है। तलाशी, जब्ती के अतिरिक्त नमूने लेने में भी लापरवाही बरती जाती है, जिसका अभियुक्त को फायदा मिल जाता है। दीपक चौहान, वरिष्ठ अधिवक्ता
मादक पदार्थ के आदतन आपूर्तिकर्ताओं की सूची बनाकर उन पर नजर रखी जाएगी। जब भी वह जेल से छूटता है और इसी धंधे में लगता है तो फिर पकड़ेगे। आनंद श्रीवास्तव, पुलिस आयुक्त जयपुर

Deepshikha Vashista Desk
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