Good News: बारिश की फुहारों से सुधरने लगी शहर की आबोहवा,देखें वीडियो

शहर में औसतन वायु प्रदूषण का स्तर पहुंचा 50 एक्यूआई के आस—पास

By: SAVITA VYAS

Published: 24 Aug 2020, 03:13 PM IST

Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

जयपुर। शहर सहित प्रदेशभर में बीते भाद्रपद मास में झमाझम मानसून की अच्छी बारिश का दौर लगातार जारी है। इससे न सिर्फ शहर में आमजन को गर्मी से राहत मिली है। साथ ही ठंडी हवाओं से वायु प्रदूषण का स्तर भी कम हुआ है। तापमान में गिरावट के साथ शहर की आबोहवा में विषैले तत्व पूरी तरह से खत्म हो चुके हैं। सोमवार सुबह वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) औसतन 52 माइक्रोग्राम घनमीटर दर्ज किया गया। उक्त दिनों के मुकाबले इस पखवाड़े में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 280 से 300 के मुकाबले यह 70 प्रतिशत तक कम रिकॉर्ड हुआ, जो कि अच्छी श्रेणी में माना जा रहा है। प्रदूषण मंडल के आंकड़ों के मुताबिक बीते साल के मुकाबले औसतन राजधानी सहित भिवाड़ी में 50 प्रतिशत तक इस बार अगस्त माह में प्रदूषण का स्तर कम हुआ है।

अच्छी बारिश से नतीजे बेहतर

राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के आंकड़ों के मुताबिक शहर में सिविल लाइन, सेठी कॉलोनी, परकोटा, शास्त्री नगर में जुलाई के मध्य तक प्रदूषण खतरनाक प्लस की स्थिति में था। यहां रोजाना औसत प्रदूषण का स्तर औसतन 200 के ऊपर दर्ज हुआ था। दूसरी ओर पीएम (पर्टिकुलर मैटर) का स्तर 2ण्5 ठंडी हवाओं के कारण थोड़ा अच्छा माना जा रहा है। आने वाले समय में मौसम विभाग ने प्रदेशभर में अच्छी बारिश का अनुमान जताया है। जिससे प्रदूषण का स्तर तो कम होगा ही, इसके साथ ही श्वास संबंधी बीमारियों के रोगियों को भी फायदा मिलेगा।

ठंडी हवाओं से आती है सूचकांक में कमी

अस्थमा भवन के डायरेक्टर डॉ.वीरेन्द्र सिंह ने बताया कि बारिश होने के बाद हवा शुद्ध हो जाती है। वातावरण में जहरीले तत्व होते हैं, वह बारिश में धुल जाते हैं। इसके साथ ही वायु गुणवत्ता सूचकांक में भी कमी आती है। बढ़ते प्रदूषण से सांस संबंधी बीमारियों के मरीजों को ज्यादा खतरा रहता है। हालांकि इस बदलते मौसम में हवा सभी के लिए अच्छी रहती है, लेकिन अस्थमा रोगियों को आद्रर्ता के बढऩे से थोड़ी दिक्कत होती है। ऐसे समय मेे वह बाहर जाने से बचें। 301 और 400 के बीच वायु की गुणवत्ता को बेहद खराब श्रेणी में रखा जाता है। डब्लयूएचओ के आंकड़ों की बात की जाए तो 10 माइक्रोग्राम घनमीटर को प्रदूषण के लिहाज से बेहतर माना गया है।

इस साल रैंकिंग में बड़े सुधार का मौका

औद्योगिक क्षेत्र भीलवाड़ा, कोटा, अलवर, पाली व भिवाड़ी सहित अन्य जगहों पर भी आबोहवा में सुधार आया है। भीलवाड़ा में जहां बीते 20 दिन में औसत स्तर 55 एक्यूआई के आसपास दर्ज किया गया है। देशभर में प्रदूषण के मामले में अग्रणी माने जाने वाले भिवाड़ी शहर की हवा में भी पीएम 2.5 का स्तर औसत स्तर 40 से 50 बीच बना हुआ है। बीते साल यह 300 के आसपास दर्ज किया गया था। मानसून की बारिश के चलते हरियाली छा गई है और धूल-मिट्टी के कण भी कम उड़ रहे हैं। दो साल से भिवाड़ी विश्व के सबसे अधिक प्रदूषित शहरों में शुमार है। वर्ष 2018 में भिवाड़ी पांचवे स्थान पर प्रदूषित था, वहीं पिछले वर्ष रैंकिंग 20 वें पायदान पर रही थी। अब आबोहवा साफ रही और अब मानसून में प्रदूषण न्यूनतम स्तर पर है। प्रदेश में उदयपुर में सबसे कम वायु प्रदूषण का स्तर बीते कई दिनों से देखने को मिल रहा है। यहां महज 38 एक्यूआई के आसपास प्रदूषण का स्तर आंका गया है। पाली का स्तर 55 रहा है। जोधपुर का प्रदूषण का स्तर फिलहाल 100 एक्यूआई के पार देखने को मिल रहा है।

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