Durgashtami 2021 कोरोना काल में कैसे करें कन्या भोज और पूजन, जानें क्या कहते हैं शास्त्र

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By: deepak deewan

Published: 18 Apr 2021, 05:43 PM IST

जयपुर. चैत्र नवरात्रि का समापन काल समीप है। अब नवरात्रि के अंतिम तीन दिन ही शेष रह गए हैं। चैत्र नवरात्रि में अष्टमी और नवमी विशेष दिन होते हैं। इनमें भी चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि सबसे अहम होती है जिस दिन दुर्गाष्टमी मनायी जाती है। नवरात्रि का यह आठवां दिन देवी महागौरी का है जिसमें मां दुर्गा की विशेष पूजा का विधान है। इस बार दुर्गाष्टमी 20 अप्रैल यानि मंगलवार को है। मंगलवार को अष्टमी तिथि का होना शुभ माना जाता है।

ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि धर्म और ज्योतिष ग्रंथों में अष्टमी तिथि का बहुत महत्व बताया गया है। इसे विजया या जया तिथि कहा गया है अर्थात इस तिथि में प्रारंभ किए गए प्रयास पूर्ण होते हैं, इनमें विजय प्राप्त होती है। इस तिथि पर शुरू किए गए काम सफल जरूर होते हैं। शिवजी के स्वामित्व वाली यह तिथि पवित्र, परम कल्याणकारी, सुखदायक और धर्म की वृद्धि करने वाली है। यही कारण है कि अष्टमी पर दुर्गा पूजा का महत्व और बढ़ जाता है।

अष्टमी पर पूरे विधि-विधान से दुर्गा पूजा करनी चाहिए। इस दिन दुर्गा सप्तशती का पाठ करें या दुर्गाजी के अन्य पाठ व मंत्रो का जाप करें। इस दिन विशेष तौर पर देवी के शस्त्रों की पूजा करनी चाहिए। देवी की प्रसन्नता के लिए हवन करवाना चाहिए। पूजन के बाद मां दुर्गा से सुख-समृद्धि, विजय एवं आरोग्यता की कामना करनी चाहिए। दुर्गाष्टमी पर दुर्गा पूजा से हर तरह के कष्ट और दुःख मिट जाते हैं, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है या वर्चस्व स्थापित होता है।

मार्कंडेय पुराण में अष्टमी पर देवी पूजा का महत्व बताते हुए कहा गया है कि इस दिन देवी पूजा से हर तरह की परेशानी दूर हो जाती है। इस दिन कन्या पूजन और भोजन का सबसे ज्यादा महत्व है। इस बार कोरोना महामारी के कारण अष्टमी पर कन्या पूजा और भोज करवाना संभव नहीं है। ज्योतिषाचार्य और धर्माचार्य बताते हैं कि ऐसे आपदा काल में इस बार यदि दुर्गाष्टमी के दिन कन्या पूजन या कन्या भोजन नही करा पाएं तो भी इसका दोष नहीं लगेगा।

ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र नागर के अनुसार अष्टमी के दिन देवी दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए विधिपूर्वक पूजा करें और संभव हो तो हवन भी करवाएं। इसके बाद दुर्गाष्टमी पर कन्या पूजन का संकल्प लेकर आगामी किसी भी माह की शुक्लपक्ष अष्टमी तिथि पर कन्या पूजन कर भोजन करवाया जा सकता है। शास्त्रों में कहा गया है कि आपात स्थिति में दुर्गाष्टमी पर मां दुर्गा को ही प्रसाद चढ़ा दें। देवी स्वरूप नौ कन्याओं को बाद में भोजन करवा दें।

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