CM अशोक गहलोत ने मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत को लिखा पत्र, राजस्थान के इस प्रोजेक्ट के लिए की ऐसी मांग

मुख्यमंत्री पेयजल के जिस महत्त्वपूर्ण ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट ( Eastern Rajasthan Canal Project ) को राष्ट्रीय दर्जा दिलाने में जुटे हैं, उस पर मध्यप्रदेश सरकार ने फिर आपत्ति जताकर राजस्थान सरकार की नींद उड़ा दी है...

जयपुर। मुख्यमंत्री पेयजल के जिस महत्त्वपूर्ण ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट ( Eastern Rajasthan Canal Project ) को राष्ट्रीय दर्जा दिलाने में जुटे हैं, उस पर मध्यप्रदेश सरकार ने फिर आपत्ति जताकर राजस्थान सरकार की नींद उड़ा दी है। राज्य सरकार मध्यप्रदेश से आने वाली कुन्नू, पार्वती, कालीसिंध नदी से 50 प्रतिशत डाइवर्जन पर पानी लेना चाहती है, जबकि मध्यप्रदेश सरकार ने इसे अनुबंध के विपरीत बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई है। केन्द्रीय जल आयोग की मध्यस्थता के बावजूद पानी बंटवारे का विवाद खत्म नहीं हुआ। सरकार ने अब जलशक्ति मंत्रालय से सीधे हस्तक्षेप के लिए कहा है। जयपुर समेत राज्य के 13 जिलों तक पेयजल के लिए यह महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ( Ashok Gehlot ) ने पिछले दिनों जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ( Gajendra Singh Shekhawat ) को पत्र लिखकर प्रोजेक्ट को जल्द राष्ट्रीय दर्जा देने की मांग की है।


पुनर्जीवित होंगे बांध
मानसून के दौरान मध्यप्रदेश से आने वाली कुन्नू, कुल, पार्वती, कालीसिंध, मेज नदी बेसिन में आने वाले अतिरिक्त पानी को बनास, मोरेल, बाणगंगा, पार्वती, कालीसिंध और गंभीर नदी बेसिन में पहुंचाया जाना है। इसके जरिए जयपुर के अलावा झालावाड़, बांरा, कोटा, बूंदी, सवाईमाधोपुर, अजमेर, टोंक, दौसा, करौली, अलवर, भरतपुर, धौलपुर तक अतिरिक्त पेयजल पहुंचेगा। जयपुर के रामगढ़ सहित अन्य बांधों को पुनर्जीवित करने का प्लान है।

सिंचाई से लेकर इंडस्ट्रीयल कॉरिडोर तक
26 बड़ी और मध्यम सिंचाई परियोजनाओं तक पानी पहुंचेगा। 0.8 लाख हैक्टेयर मौजूदा सिंचित क्षेत्र को होगा फायदा।
5 जिलों में 2 लाख हैक्टेयर नए सिंचित क्षेत्र में सिंचाई की जा सकेगी।
उद्योगों और दिल्ली-मुंबई इण्डस्ट्रीयल कॉरिडोर के लिए 286.4 मिलियन घन मीटर पानी का प्रावधान।
1268 किलोमीटर लम्बाई में बनेगी कैनाल।

राजस्थान का पक्ष
विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) केन्द्रीय जल आयोग की गाइडलाइन और अन्तरराज्यीय अनुबंध के तहत ही तैयार की गई।
राजस्थान के कैचमेंट का पानी ही डायवर्ट करने का प्लान है।
केवल बारिश में ओवरफ्लो होकर बहने वाले पानी को डायवर्ट करेंगे।
अभी बारिश में आने वाला पानी नदी के जरिए समुद्र में बह जाता है।


- अन्तराज्यीय करार के तहत ही चिन्हित नदियों से अतिरिक्त बहने वाले पानी को राजस्थान लाना चाह रहे हैं। केन्द्रीय जल आयोग को इसका हवाला दे दिया है। जलशक्ति मंत्रालय को भी जानकारी दी दई है। मामले में जल्द सकारात्मक परिणाम की उम्मीद है।
नवीन महाजन, सचिव, जल संसाधन विभाग

dinesh Desk
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