पीएम को भेजी गलत रिपोर्ट, राज्य सरकार से मांगा जवाब

पीएम को भेजी गलत रिपोर्ट, राज्य सरकार से मांगा जवाब

Jaya Gupta | Publish: Feb, 15 2018 12:38:16 PM (IST) Jaipur, Rajasthan, India

दसवीं तक बच्चों को कलाशिक्षा में फर्जी ग्रेड देने केंद्र सरकार ने शिक्षा विभाग को किया तलब- शिक्षा विभाग ने भेजी गलत सूचना

जयपुर। छात्र-छात्राओं को दसवीं कक्षा तक कलाशिक्षा में फर्जी ग्रेड देने व केंद्र सरकार को झूठी रिपोर्ट देने के मामले में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने शिक्षा विभाग को तलब किया है। सरकारी स्कूलों में कलाशिक्षा अनिवार्य तौर पर पढ़ाने के मामले में मंत्रालय ने अगस्त २०१७ व स्कूलों में विद्यार्थियों को फर्जी ग्रेड देने के मामले में अक्टूबर २०१७ में पत्र भेजकर जवाब मांगा है। साथ ही शिक्षा सचिव को जरुरी कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए हैं।

 

यह है मामला
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से सूचना का अधिकार के तहत प्राप्त सूचना के अनुसार प्रदेश में वर्ष १९९५ से अब तक कला शिक्षा विषय (संगीत व चित्रकला) अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाया जा रहा है। जबकि कक्षा ११ व १२ में यह वैकल्पिक है। वहीं एनसीआरटी ने भी एक आरटीआई (सूचना का अधिकार) के जवाब में कहा है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में कला शिक्षा अनिवार्य विषय है। इसमें चित्रकला व संगीत विषय पढ़ाए जाते हैं। जबकि शिक्षा विभाग ने केंद्र सरकार की ओर से मांगी गई रिपोर्ट पर शिक्षा उपशासन सचिव ने यह जवाब दिया कि माध्यमिक स्तर तक कलाशिक्षा अनिवार्य विषय नहीं हैं। इस नोटशीट पर शिक्षा राज्यमंत्री वासुदेव देवनानी के हस्ताक्षर भी हैं। इसके बाद ही यह रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी गई।

 

बोर्ड मार्कशीट में भी मनमुताबिक दिए जा रहे ग्रेड
पांचवीं, आठवीं व दसवीं की बोर्ड परीक्षा में शिक्षाकला, पर्यावरण अध्ययन आदि विषयों के ग्रेड दिए जाते हैं। स्कूलों में कलाशिक्षा के शिक्षक नहीं हैं और न ही स्कूलों में ये विषय पढ़ाए जा रहे हैं। स्कूल मनमर्जी से विद्यार्थियों को ग्रेड दे रहे हैं।

 

दो दशक से नहीं हुई कला शिक्षकों की भर्ती

जानकारी के अनुसार पिछले दो दशकों से कलाशिक्षकों को भर्ती नहीं की गई है। इसका बड़ा कारण हैं, सरकार इन विषयों को छात्रों के हित का नहीं मान रही है।

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