शिक्षाविद बोले होमवर्क से ज्यादा लाइव स्किल्स का रखें ध्यान

MOHIT SHARMA

Publish: Aug, 16 2019 08:39:23 AM (IST) | Updated: Aug, 16 2019 08:47:53 AM (IST)

Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

जयपुर। होमवर्क से जहां आज प्रदेशभर के स्कूलों में विद्यार्थी परेशान हो रहे हैं, वहीं शिक्षक और अभिभावक भी परेशान हैं। कई विद्यार्थी तो इससे बचने के लिए तरह—तरह के बहाने भी बनाने लगे हैं। ये बहाने उनके लिए खतरनाक भी हो सकते हैं। हाल ही जोधपुर के एक विद्यार्थी ने तो होमवर्क से परेशान होकर अपने ही अपहरण की झूठ कहानी रच दी। हमने इस संबंध में शिक्षाविदों ने बात की तो उन्होंने होमवर्क से बोझ से बचने के रास्ते बताए। उन्होंने बताया कि किस तरह से विद्यार्थी के होमवर्क को रुचिकर बनाया जा सकता है।
शिक्षाविदों का कहना है होमवर्क ऐसा हो जिससे विद्यार्थी परेशान नहीं हो। बच्चे की स्किल डवलप करने पर ध्यान देना चाहिए। कुछेक शिक्षा से जुड़े लोगों का कहना है कि होमवर्क के मामले में डे बोर्डिंग स्कूल भी मददगार साबित हो रहे हैं। शिक्षाविदों का कहना है कि होमवर्क स्किल डवलप करने के लिए दिया जाता है, इससे विद्यार्थी की लिखने और याद करने की क्षमता बढ़ती है। शिक्षाविदों का कहना है कि डे—बोर्डिंग स्कूल भी होमवर्क की समस्या से निजात दिलाने में काफी सहायक हो सकते हैं।

ये कहना है एक्सपर्ट का
एसआरएन स्कूल की डायरेक्टर उषा शर्मा ने बताया कि बच्चे को होमवर्क नहीं करने पर डांटे नहीं, उसकी काउंसलिंग करें। होमवर्क ज्यादा नहीं हो इसका ध्यान रखें। होमवर्क के लिए शिक्षक विद्यार्थियों की काउंसलिंग करें। होमवर्क के साथ ही लाइव स्किल्स का अधिक ध्यान रखें। लाइव स्किलस् से बच्चों का स्कूल आने में इंटरेस्ट बढ़ेगा।
कोई विद्यार्थी होमवर्क नहीं करे तो उसके अभिभावकों से संपर्क करें। जीरो पीरियड में उनका होमवर्क कराया जाए। इससे होमवर्क में सुधार हुआ है।

होमवर्क से राइटिंग स्किल और कलेक्शन की क्षमता बढ़ती है। स्कूल के टाइम टेबल में लाइव स्किल्स के पीरियड हों। होमवर्क कंपलीट कराने के लिए शिक्षकों की व्यवस्था हो। रोजाना का होमवर्क एप्प् के माध्यम से अभिभावकों को भेजा जाए। पैरेन्टस भी शिक्षकों से संपर्क कर सकते हैं। होमवर्क मोट्रेड हो, होमवर्क नहीं करने पर बच्चे को डांटने के बजाय उसकी मदद करें, काउंसलिंग करें।

सेंट जोसफ स्कूल के प्रिंसिपल एस.डी. शर्मा ने बताया कि होमवर्क ज्यादा नहीं हो। कोई भी गलती करने पर उन्हें डांटे नहीं बल्कि समझाएं। बच्चों को समय—समय पर एप्रीसियेट भी करें। बच्चों का ध्यान रखें। होमवर्क ऐसा दिया जाए, जिसे बच्चा आसानी से कर सके और समझ सके।

शिक्षक विपिन शर्मा ने बताया कि होमवर्क को लेकर बच्चे की काउंसलिंग करें। बच्चों की पेन-पेंसिल की ग्रिप का भी ध्यान रखें। होमवर्क कराते समय बच्चों को बीच—बीच में ब्रेक भी दें। होमवर्क का लोड बच्चों का ज्यादा नहीं होना चाहिए। इसके लिए शिक्षक और अभिभावक समय-समय पर एक दूसरे से संपर्क में रहें। हाल ही शिक्षामंत्री ने भी बस्ते का बोझ कम करने की बात कही है। इसमें भी होमवर्क का विशेष ध्यान रखा जाएगा। नई शिक्षा नीति में भी होमवर्क का ध्यान रखा जाएगा। इस पर शिक्षाविद तैयारी कर रहे हैं।

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