'ईद की रात है बहुत अहम रात'

फिजू़ल बातों में वक्त बिताना अच्छा नहीं है

By: Rajkumar Sharma

Published: 23 May 2020, 11:39 AM IST

जयपुर. ईद की रात बहुत अहम रात है इसको इनाम की रात भी कहा जाता है। हदीस में है कि जो कोई दोनों ईद की रातों में इबादत के लिए खड़ा हो अज्र व सवाब की उम्मीद पर, इसका दिल उस दिन मुर्दा ना होगा जिस दिन लोगों के दिल (मैदाने मेहशर के खौफ से) मुर्दा हो जाएंगे। (सुनन इब्ने माजा-1782) यानी सारी रात इबादत करे या कम से कम आखिरी हिस्से में तहाज्जुद वगैरह में वक्त गुजारे। याद रहे कि दोनों ईद की रातों में गपशप करते रहना, फिजू़ल बातों या कामों में वक्त बिताना और केवल जागे रहना अच्छा नहीं है। बल्कि जिस कद्र मुमकिन हो इबादत करें या फिर सो जाएं।
-मो. जाकिर नोमानी, मुफ्ती ए शहर
रोजा इफ्तार और सहरी का वक्त
मुताबिक इफ्तार सहरी
शनिवार रविवार
मुफ्ती-ए-शहर 7.13 4.07 बजे
जामा मस्जिद 7.15 3.57 बजे
दारुल उलूम रजविया 7.15 4.00 बजे
शिया इस्ना अशरी 7.27 3.56 बजे
पूरे माह रखे रोजे
जयपुर. पठानों का चौक, ब्रह्मपुरी निवासी सात वर्षीय अदनान खान ने पूरे रमजान माह के दौरान रोजे रखे गए। उन्होंने अमन-चैन के साथ ही कोरोना से मुक्ति की दुआ मांगी।

Rajkumar Sharma Desk
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