आठ हजार प्रधानाचार्य भी करेंगे विधानसभा का घेराव

प्रिंसिपल पद पदोन्नति में अनुपात बदलाव का मामला
22 गोदाम पर चल रहा है स्कूल व्याख्याताओं का धरना
स्कूल व्याख्याताओं को मिला प्रधानाचार्यों का समर्थन
रेसला को राजस्थान शिक्षा सेवा परिषद (प्रधानाचार्य) रेसा पी ने दिया समर्थन

By: Rakhi Hajela

Updated: 03 Mar 2021, 04:03 PM IST

प्रिंसिपल पद पदोन्नति (Principal post promotion) में स्कूल व्याख्याताओं (School lecturers) के अनुपात को बढ़ाए जाने का मांग को लेकर प्रदेश के 54000 स्कूल व्याख्याता 5 मार्च को विधानसभा (Assembly) का घेराव करेंगे। इन व्याख्याताओं को अब आठ हजार प्रधानाचार्य के संगठन राजस्थान शिक्षा सेवा परिषद (प्रधानाचार्य) रेसा पी ने भी समर्थन दिया है। संगठन के प्रांतीय महामंत्री डॉ. राजूराम चौधरी ने बताया कि राजस्थान शिक्षा सेवा प्राध्यापक संघ रेसला के बैनर तले इस आंदोलन का आगाज किया गया है। जिसे प्रदेश के समस्त प्रधानाचार्य जो लेक्चरर से प्रधानाचार्य बने हैं पूर्ण रूप से समर्थन करते हैं और आंदोलन में रेसला के साथ कंधे से कंधे मिलाकर संघर्ष करेंगे। दरअसल रेसला ने इस अनुपात को बढ़ाए जाने की मांग की थी। जिस पर उच्च स्तर पर पत्राचार हुआ और 80:20 का अनुपात तय भी कर लिया गया। 9 फरवरी को कैबिनेट की बैठक में इस पर निर्णय होना था लेकिन बैठक से ठीक पहले इसे डेफर कर दिया गया। जिससे स्कूल व्याख्याता नाराज हैं। एेसे में रेसा पी के प्रदेशाध्यक्ष डायालाल पाटीदार, सभाध्यक्ष डॉ. राजेंद्र बंसल, सरंक्षक प्रमोद मिश्रा, नाहर सिंह, महिला प्रदेशाध्यक्ष शीला आसोपा , बीके गुप्ता सहित प्रदेश पदाधिकारियों ने प्रधानाचार्यों से अधिक से अधिक संख्या में 5 मार्च को विधानसभा घेराव में भाग लेने का आह्नान किया है।
यह है मामला
दरअसल प्रदेश में स्कूल व्याख्याताओं की संख्या 54000 है वहीं दूसरी ओर प्रधानाध्यापकों की संख्या लगभग 3500 है। दोनों एक ही ग्रुप से संबंधित हैं, दोनों ही समकक्ष पद हैं और दोनों ही राजपत्रित हैं। दोनों ही पदों पर 50 फीसदी पद सीधी भर्ती और 50 फीसदी पद द्वितीय श्रेणी अध्यापकों से भरे जाते हैं। दोनों पदों की अगली पदोन्नति प्रधानाचार्य पद पर होती है और जिस समय 67:33 लागू किया गया उस समय व्याख्याता 21861 और प्रधानाध्यापक 8762 थे। ऐसे में उस सयम की स्थिति में यह अनुपात सही था लेकिन वर्तमान में व्याख्याताओं की संख्या 54000 हो जाने और प्रधानाध्यापक के पद कम होकर 3500 रह जाने से यह अनुपात अव्यवहारिक हो गया है। डॉ. राजूराम चौधरी का कहना है कि व्याख्याताओं की संख्या अधिक होने के कारण उन्हें पदोन्नति का पूरा लाभ नहीं मिल पाता, जबकि प्रधानाध्यापक को पदोन्नति में उनके कुल 3500 पद होते हुए भी उनके लिए 4000 पद सुरक्षित हैं जो नियम के अनुसार उचित नहीं है।
धरने पर बैठे हैं स्कूल व्याख्याता
आपको बता दें कि अनुपात बढ़ाए जाने की मांग को लेकर रेसला के पदाधिकारी २२ गोदाम स्थित धरना स्थल पर सांकेतिक धरने पर बैठे हैं। रेसला के मुख्य प्रदेश महामंत्री सुमेर खटाणा का कहना है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर सुनवाई नहीं की तो ५ मार्च को विधानसभा का घेराव किया जाएगा।

Rakhi Hajela Desk
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