नदी, तालाब या नाले में फंसेे तो जपें राम-राम...नौसिखिए जीवनरक्षकों से भरी हुई सिविल डिफेंस की टीम

सिविल डिफेंस की टीम को हर साल नए जीवनरक्षक तैयार करने पड़ते हैं।

By: dharmendra singh

Published: 07 Jun 2018, 01:36 PM IST

मामूली अनुभव, बड़ी जिम्मेदारी
राजेश मीणा/जयपुर
अगले माह मानसून दस्तक देने की तैयारी में है। नदी, तालाब या नाले में अगर आप मुसीबत में फंसते हैं तो ईश्वर ही आपकी मदद कर सकता है, क्योंकि शहरवासियों की जान बचाने का जिम्मा उठाने वाली सिविल डिफेंस की टीम नौसिखिए जीवनरक्षकों से भरी है। ट्रेनिंग लेने के बाद जीवनरक्षक कुछ समय तक टीम के साथ काम करते हैं और फिर नया रास्ता अपना लेते हैं। इसके चलते सिविल डिफेंस की टीम को हर साल नए जीवनरक्षक तैयार करने पड़ते हैं। इनके कंधों पर मामूली अनुभव के साथ शहरवासियों की जान बचाने की बड़ी जिम्मेदारी है।

पांच साल में जलस्रोतों में गिरने से 110 से अधिक लोगों की मौत

जीवनरक्षकों को बहुत मामूली राशि दी जाती है, वह भी जिस दिन बुलाया जाता है, उसी दिन मिलती है, इसलिए ये लोग दूसरा काम करने लगते हैं। सिविल डिफेंस की टीम में कुल चार सदस्य हैं। जिसमें एक डिप्टी कंट्रोलर व तीन लिपिक है। गौरतलब है कि पिछले पांच साल में जलस्रोतों में गिरने से 110 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इस साल चार माह की बात की जाए तो जलस्रोतों में गिरने से एक दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।

इस साल तैयार होंगे पचास से अधिक जीवनरक्षक
पिछले साल करीब सौ जीवनरक्षकों को ट्रेनिंग दी गई थी। इस साल भी पचास से अधिक जीवनरक्षकों को तैरने सहित अन्य प्रकार की ट्रेनिंग दी जाएगी। ट्रेनिंग के लिए सिविल डिफेंस की टीम गलता धाम, जलमहल सहित अन्य स्थानों को काम में लेती है।

सबसे ज्यादा मौत खुले पड़े कुओं में गिरने से
अगर हादसों की बात की जाए तो सबसे ज्यादा मौत शहर में खुले पड़े कुओं में गिरने से हुई हैं। इसके बाद दूसरा नंबर तालाबों का आता है। पिछले साल करतारपुरा नाले में बहे आयुष की यादें सभी की जेहन में अभी भी ताजा हैं। इसके अलावा ब्रह्मपुरी में भी एक बच्चे की नाले में बहने से मौत हो गई थी। इस साल भी नालों में बहने से तीन जनों की मौत हो चुकी है।

जयपुर जिले में बड़ी संख्या में सूखे कुएं
जयपुर जिले में बड़ी संख्या में सूखे कुएं हैं। इन्हें ढंकने सहित अन्य सुरक्षा के इंतजामों को लेकर प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है। पिछले पांच साल में जयपुर में कुओं में गिरने से 63 लोगों की मौत हो चुकी है। 2013 में 6, 2014 में 12, 2015 में 16, 2016 में 13 और 2017 में 16 की मौत हो चुकी है। जयपुर में तालाब में गिरने से इतने ही समय में 24 हादसों में 20 लोगों की मौत हो चुकी है, चार लोगों को ही सिविल डिफेंस की टीम बचा पाई है।

गलता में ही पांच साल में 11 की जान गई
गलताकुंड ही पांच साल में ग्यारह लोगों की जान लील चुका है। सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने इंतजामात भी किए, लेकिन वे नाकाफी साबित हुए। गलताकुंड में जाल लगाने से लेकर गोताखोर तैनात करने तक के सभी प्रयास किए गए, लेकिन फिर भी मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। अगर जलमहल की बात कि जाएं तो इतने ही समय में यहां पर तीन हादसों में तीन जनों की जान जा चुकी है। इसके अलावा मावठे में दो और कदम्ब कुंड में गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है।

 

सिविल डिफेंस की टीम लम्बे समय से संसाधनों व स्टाफ की कमी से जूझ रही है। जीवनरक्षकों के सहारे सिविल डिफेंस की टीम बचाव व राहत कार्य करती है। हर साल जीवनरक्षक तैयार किए जाते हैं।
-जगदीश प्रसाद , डिप्टी कंट्रोलर , नागरिक सुरक्षा विभाग

dharmendra singh Desk
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