गौरेया को बचाने की कवायद


विश्व गौरेया दिवस
हर साल 20 मार्च को मनाया जाता है विश्व गौरेया दिवस

By: Rakhi Hajela

Published: 19 Mar 2021, 10:06 PM IST


चीं.चीं, चिरैया, चिडिय़ा जैसे कई नामों ने जानी जाने वाली गौरेया अब कम ही नजर आती है। बदलती लाइफस्टाइल, बढ़ता शहरीकरण, खेतों में पेस्टीसाइड के बढ़ते प्रयोग ने गौरेया की संख्या में कमी की है। गौरैया के प्रति लोगों को जागरुक करने के लिए पूरे विश्व में हर वर्ष 20 मार्च को गौरैया दिवस मनाया है। इस दिवस को पहली बार वर्ष 2010 में मनाया गया था। लगातार घट रही गौरैया की संख्या को अगर गंभीरता से नहीं लिया गया तो वह दिन दूर नहीं, जब गौरैया हमेशा के लिए दूर चली जाएगी।
इसलिए कम हो रही गौरेया
शहरीकरण के कारण वृक्षों की अंधाधुंध कटाई,अत्याधुनिक मकानों के साथ खेतों में पेस्टीसाइड के प्रयोग से गौरेया की संख्या कम हो रही है। घौंसला बनाने के लिए कोई स्थान न होने के कारण इनका बसेरा उजड़ सा गया है और इस कारण इनकी संख्या में तेजी से गिरावट आ रही है, जिसके चलते गौरेया की कई प्रजातियां लुप्त प्राय: हो चुकी हैं। विश्व भर में गौरैया की 26 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से 5 भारत में देखने को मिलती हैं। गौरैया ज्यादातर छोटे.छोटे झाड़ीनुमा पेड़ों में रहती हैं लेकिन अब वो बचे ही नहीं हैं।
गौरेया को बचाने की कवायद
राजस्थान एनिमल वेलफेयर बोर्ड (ANimal Welfare Board) और World संगठन के निदेशक मनीष सक्सेना (Mainsh saxena) गौरेया को बचाने की कवायद में लगे हैं। उनकी संस्था कृत्रिम घौंसले और परिंडे लगाकर इनके सरंक्षण के लिए पिछले कई सालों से प्रयासरत हैं। मनीष सक्सेना का कहना है कि जैव विविधता संतुलन में पक्षियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। शहरी क्षेत्रों में गौरैया की गिरती संख्या से संतुलन तेजी से बिगड़ रहा है, इसे ध्यान में रखते हुए World संगठन गौरैया के लिए पक्षी संरक्षण अभियान (Bird conservation campaign) चला रहा है, जिसके तहत स्काउट गाइड, नेशनल कैडट कोर तथा विद्यार्थियों के सहयोग से गौरैया के लिए कृत्रिम घौंसले एवं परिंडे लगाए जा रहे हैं। उनका कहना है कि कृत्रिम घौंसले लगाकर इनके रहने तथा खाने के लिए दाना व पानी की व्यवस्था कर पुन: शहरी क्षेत्रों में बसाने की कवायद की जा रही है। अगर आपके घर में कनेर, शहतूत जैसे झाड़ीनुमा पेड़ हैं तो उन्हें न काटे और गर्मियों में पानी को रखें।
अभियान किया आरंभ
संस्थान ने विश्व गौरैया दिवस के अवसर पर पक्षियों के संरक्षण के लिए उपवन संरक्षक वीर सिंह ओला और वल्र्ड के निदेशक मनीष सक्सेना ने वन विभाग की ग्रास फार्म नर्सरी में परिंडे बांध कर पक्षी संरक्षण अभियान का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उपवन संरक्षक वीर सिंह ओला ने कहा कि गौरैया सहित अन्य पक्षियों के संरक्षण में विद्यार्थियों की अहम भूमिका है। विद्यार्थियों को अधिक से अधिक संख्या में इस अभियान में सक्रिय रूप से जोडुना चाहिए। कार्यक्रम में सहायक वन संरक्षक मनफूल विश्नोई, वल्र्ड संगठन की उपनिदेशक एवं जिला पशु क्रूरता निवारण समिति की सदस्य नम्रता सहित वन विभाग के अधिकारी एंव कर्मचारी उपस्थित रहे। अभियान के तहत राज्य भर मे दस हजार परिंडे लगाने का लक्ष्य रखा गया है।
सहायक वन संरक्षक मनफूल विश्नोई ने कहा कि गर्मियों में जैसे.जैसे पारा चढ़ेगा बेजुबान पक्षियों के लिए दाना.पानी की समस्या बढ़ती जाएगी। प्रतिवर्ष गर्मियों मे दाने पानी के अभाव में सैकड़ों पक्षियों की अकाल मौत हो जाती है इसलिए सभी नाागरिकों से अपील है कि इस गर्मियों में अपने घरों एवं आस पास के पेड़ों पर पक्षियों के लिए परिंडे बांधकर उसमें प्रतिदिन स्वच्छ जल भरें साथ ही पक्षियों के लिए दाने की व्यवस्था भी करें।

Rakhi Hajela Desk
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