लोग नई जगहें कर रहे एक्सप्लोर, वैलनेस और रूरल टूरिज्म पर करें फोकस

पर्यटन - एक्सपर्ट जीत सिंह आर्य बता रहे हैं पर्यटन में कामयाबी के राज

By: Neeru Yadav

Published: 06 Jan 2021, 02:56 AM IST


कोविड १९ के चलते पर्यटन उद्योग के स्वरूप में काफी बदलाव अपेक्षित है। लोगों को काफी कुछ अहसास हुआ है। प्रकृति, अच्छे भोजन, परिवार व दोस्तों के साथ समय व्यतीत करने आदि की वजह से समूह में या परिवार के साथ यात्राएं हो रही हैं। विदेश यात्रा का विकल्प बंद हो जाने की वजह से लोग आंतरिक या अपने ही राज्य के जगहों पर घूम रहे हैं। एक बड़ा खंड पर्यटन का इको टूरिज्म की तरफ आकर्षित हुआ है। कई लोगों का क्रेज वैलनेस पर्यटन की तरफ भी बढ़ा है। चूंकि वैलनेस टूरिज्म महंगा है और उसकी हर जगह उपलब्धता नहीं है। आने वाले समय में यह क्षेत्र काफी बढ़ेगा। वहीं एडवेंचर में ट्रैकिंग, कैम्पिंग, साइकिलिंग, बाइक राइडिंग, स्टार ब्रेजिंग की वजह से इसमें काफी संभावनाएं बढ़ गई हैं। आने वाले वक्त में रूरल टूरिज्म के बढऩे के अवसर इसलिए हैं क्योंकि कोविड १९ के बाद लोगों की सोच में भी काफी बदलाव आए हैं। वे अब अपनी जड़ों की तरफ लौटना चाहते हैं। इको टूरिज्म, एथनिक टूरिज्म, एडवेंचर, वैलनेस और रूरल टूरिज्म पर यदि नई शुरुआत में ही फोकस कर लेना चाहिए।
नए स्थानों पर ज्यादा जाएंगे लोग :
नए स्थानों पर पर्यटक ज्यादा पहुंचने की कोशिश करेंगे । स्मार्टफोन और वहन करने योग्य इंटरनेट कनेक्शन की वजह से गूगल मैप्स का और यूट्यूब में स्थान ख़ोज करने का काम काफी ज्यादा किया जा रहा है , जिसकी वजह से लोग नए-नए लोकेशन ढूंढ कर सोशल मीडिया और वीडियो ब्लॉगिंग के जरिए लोकप्रिय कर रहे हैं जिससे नए पर्यटन स्थल बन रहे हैं।
अभी सोशल मीडिया का प्रभाव पर्यटन में सबसे ज्यादा पड़ रहा है । सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को नए जगहों की जानकारी मिलने लगी है। आजकल लोग तुरंत स्टेट्स अपडेट करते हैं जिसकी वजह से उनके दोस्त और फॉलोअर्स प्रभावित होते हैं। डेस्टिनेशन प्रमोशन के लिए सोशल मीडिया का भरपूर उपयोग करना चाहिए।
स्थानीय लोगों को मिले पर्यटन का लाभ :
पर्यटन का विकास अभी तक ज्यादातर जरूरतों के सृजन के आधार पर किया गया है जिसमें काफी समय तक स्थानीय जनसंख्या के उम्मीद और सहभागिता को महत्व नहीं दिया गया है । उसकी वजह से काफी अच्छी वैचारिक परियोजना पहुंच नहीं पाई है। अब समय है कि स्थानीय लोग को पर्यटन के क्षेत्र का लाभ मिले जिनसे चीजें चिरस्थाई हो। उनकी आजीविका जैसे होमस्टे, ट्रैकिंग, कैम्पिंग, स्थानीय खानपान और कला व संस्कृति को बढ़ावा मिले।
ओवर टूरिज्म से बचने के हों उपाय
ओवरटूरिज्म की वजह से प्लास्टिक की भरमार, स्थानीय संस्कृति में तत्काल बदलाव, अनियोजित विकास जैसी बातें सामने आती हैं। इस दौर में लोग भीड़- भाड़ वाले जगहों पर जाने से बच रहे हैं। ओवरटूरिज्म से बचने के लिए कि पर्यटन स्थलों की सीमांकित और दीर्घकालीन योजना तैयार करनी चाहिए। उसके लिए अनुभवी लोग ,आर्किटेक्ट ,पर्यटन विभाग व मंत्रालय और टूरिज्म इंडस्ट्री के लोगों का सहयोग होना चाहिए।
(जैसा कि छत्तीसगढ़ के जीत सिंह आर्य ने पत्रिका संवाददाता ताबीर हुसैन को बताया)

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