Fact Check : कोविड-19 की नहीं यह है डॉग वैक्सीन, भ्रामक पोस्ट वायरल

कोरोना लिखी दवाई की बोतल की पोस्ट वायरल, दावा- 19 साल से कोरोना की दवा, फिर भी इलाज नहीं, सोशल मीडिया पर यूजर्स कर रहे पोस्ट शेयर, सच : यह दवा डॉग के लिए है, जानें इस वायरल पोस्ट की पूरी सच्चाई

By: Gaurav Mayank

Updated: 16 May 2020, 10:27 PM IST

सोशल मीडिया पर किसी फोटो और वीडियो के साथ छेड़छाड़ कर उसे वायरल कर दिया जाता है। वहीं किसी पुरानी फोटो और वीडियो को नया बताकर भी उसे शेयर किया जाता रहता है। कई बार सच्चाई कोसों दूर होती है, लेकिन सोशल मीडिया पर लोग बिना सच जाने उसे वायरल करते रहते हैं।

सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर की गई है, जिसमें केनाइन कोरोना वायरस वैक्सीन (Corona Virus Vaccin) नाम का एक लेबल दिखाया गया है। पोस्ट में लिखा है कि कोरोना वायरस का वैक्सीन 2001 से मौजूद था और 19 साल बाद यह कहा जाता है कि इसका कोई वैक्सीन नहीं है। राजस्थान पत्रिका की फैक्ट चैक टीम ने इस दावे की जांच की तो पता चला कि यह दावा गलत है। पोस्ट की पड़ताल में सच्चाई सामने आई कि पोस्ट में दिखाई गई वैक्सीन सही है, लेकिन यह पशु उपयोग के लिए है और यह हाल ही फैल रही कोरोना वायरस से संबंधित नहीं है।

यह हो रहा वायरल
फेसबुक पर यूजर मिजाइल बेनिटेज की ओर से शेयर की गई पोस्ट में लिखा है कि "यह 2001 में था, अब मुझे यह बताएं कि 19 साल बाद कहा जाता है कि कोई वैक्सीन नहीं है।" इस पोस्ट में केनाइन कोरोना वायरस वैक्सीन नाम का लेबल दिखाया गया है। इस पोस्ट को अब तक करीब 31 हजार लोगों ने शेयर किया है। वहीं करीब 1 हजार से अधिक लोगों ने लाइक किया है।

जांच
राजस्थान पत्रिका की फैक्ट चैक टीम ने सोशल मीडिया पर इस दावे की जांच शुरू की। हमने वायरल पोस्ट में दिखाए गए कोरोना वायरस वैक्सीन को इंटरनेट पर ढूंढा। हमने पाया कि यह नोबिवाक 1-सीवी है, जो मर्क एंड कंपनी की एक सहायक कंपनी की ओर से बिक्री किए जाने वाला वैक्सीन है। यह कुत्तों को केनाइन कोरोना वायरस या सीसीवी से बचाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। पशु चिकित्सा कंपनी वीसीए हॉस्पिटल्स ने बताया कि केनाइन कोरोना वायरस डिजीज, जिसे सीसीओवी भी कहा जाता है, डॉग या विशेष तौर पर पिल्लों में ज्यादा पाया जाता है। केनाइन कोरोना वायरस आमतौर पर कम समय के लिए होता है, लेकिन जिन कुत्तों को यह बीमारी हो जाती है, उन्हें कुछ दिनों के लिए पेट की परेशानी से जूझना पड़ता है। उन्होंने बताया, "केनाइन कोरोना वायरस सार्स-सीओवी-डब्ल्यू जैसा वायरस नहीं है, जो कोरोना वायरस का कारण बनता है। सीसीओवी डॉग में गैस्ट्रो इंटेस्टाइनल की समस्या पैदा करता है।"

कोरोना की अभी दवाई नहीं, चल रहा क्लीनिकल टेस्ट
कोरोना वायरस एक संक्रामक रोग है, जो हाल ही में पाए गए कोरोना वायरस के कारण होता है। इस समय कोविड-19 के लिए कोई स्पेसिफिक वैक्सीन या इलाज नहीं है। हालांकि इसके संभावित उपचारों के लिए क्लीनिकल टेस्ट चल रहा है। दिसंबर 2019 में चीन के वुहान में इस वायरस के शुरू होने से पहले कोविड-19 एक अज्ञात संक्रमण था। सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन के अनुसार वर्ष 1960 के दशक के बीच में मानव कोरोना वायरस की पहचान की गई थी। डॉक्टर ने बताया कि "वायरल पोस्ट में दिखाया गया वैक्सीन वर्तमान कोरोना वायरस से अलग वायरस के इलाज के लिए है। इससे कोविड-19 का इलाज नहीं किया जा सकता है। यह डॉग के इलाज के लिए है। यह दवा मनुष्यों के लिए नहीं है।"

सच
राजस्थान पत्रिका की फैक्ट चैक टीम ने इस दावे की जांच की तो पता चला कि पोस्ट में दिखाया गया केनाइन कोरोना वायरस वैक्सीन असली है, लेकिन यह डॉग के लिए इस्तेमाल होता है और हाल के वर्तमान कोरोना वायरस से संबंधित नहीं है। इसे मनुष्यों के लिए बताते हुए गलत वायरल किया गया है।

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