Fact Check: पंजाब में कोविड-19 से बचने की 'मॉक ड्रिल', सच्ची घटना के रूप में वायरल

पंजाब पुलिस द्वारा कोरोना के मरीज को उठाने का दावा, दावा- पंजाब पुलिस ने जबरदस्ती घर से उठाया मरीज, सोशल मीडिया पर यूजर्स कर रहे पोस्ट शेयर, सच : मॉक ड्रिल का वीडियो किया जा वायरल, जानें इस वायरल पोस्ट की पूरी सच्चाई

सोशल मीडिया पर किसी फोटो और वीडियो के साथ छेड़छाड़ कर उसे वायरल किया जाता रहता है। वहीं किसी पुरानी फोटो और वीडियो को नया बताकर भी उसे शेयर किया जाता है। कई बार सच्चाई कोसों दूर होती है, लेकिन सोशल मीडिया पर लोग बिना सच जाने उसे वायरल करते रहते हैं।
पंजाब में कोविड-19 से बचने की पंजाब पुलिस की मॉक ड्रिल का एक वीडियो वास्तविक तौर पर शेयर किया जा रहा है, जिसमें दिखाया गया है कि कैसे पुलिस ने सहयोग न देने वाले कोरोना वायरस पीडि़तों को संभालने का बंदोबस्त किया है। वीडियो में दिखाया गया है कि कई पुलिसकर्मी फेस मास्क लगा कर एक शख्स को पकड़ते हैं, जो डॉक्टर से इलाज कराने के लिए तैयार नहीं है। वीडियो के साथ दावा गुरमुखि लिपि में वायरल है, जिसका हिंदी अनुवाद है कि "पंजाब पुलिस और डॉक्टरों की टीम ने कोरोना वायरस मरीज को गिरफ्तार किया। पंजाब पुलिस और डॉक्टर दुनिया में सबसे बेहतरीन हैं।" राजस्थान पत्रिका की फैक्ट चैक टीम ने इस दावे की जांच की तो पता चला कि यह दावा गलत है। इस पोस्ट की पड़ताल की तो सच्चाई कुछ और ही सामने आई।


यह हो रहा वायरल
फेसबुक, ट्विटर और व्हाट्सएप पर वायरल वीडियो में यूजर्स की ओर से कहा जा रहा है कि 'जब पंजाब गवर्नमेंट को पता चला कि एक व्यक्ति विदेश से लौटा है और उसमें कोरोना वायरस के लक्षण दिख रहे हैं तो उसको बहाने से घर के बाहर बुला कर हॉस्पिटल ले जाया गया। हॉस्पिटल कैसे ले जाया गया देखें। फेसबुक पर एक लाइव न्यूज नाम के यूजर के वीडियो को अब तक 81 हजार से ज्यादा लोग देख चुके हैं। वहीं इसे शेयर भी कर रहे हैं। ऐसे ही ट्विटर पर भी किरण सिन्हा नाम की यूजर के वीडियो को करीब 6 हजार लोग देख चुके हैं। साथ ही शेयर भी कर रहे हैं। वहीं यह वीडियो क्लिप व्हाट्सएप पर भी वायरल है, जहां इसके साथ कैप्शन है कि जैसा कि हम सब जानते हैं कि स्पेन से आने वाले यात्रियों को एक अनिवार्य क्वारेंटीन पीरियड बिताना है। यह गजब की बात है कि मोदी सरकार क्वारेंटीन हुए यात्रियों को क्या दे रही है।"


जांच
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो नब्बे सैकंड का वीडियो काफी बनावटी दिखता है। एक शख्स अपने फोन में देखते हुए बाजार की ओर से आता है, जबकि कई लोग उसके आसपास रहते हैं। जैसे ही वह बेरिकेड्स के पास आता है तो पुलिस उसे पकड़ती है और डॉक्टर उसके मुंह पर मास्क लगते हैं। बाद में उसे जबरदस्ती एम्बुलेंस में ले जाया जाता है। वीडियो को गौर से देखने पर वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर दिखता है, जो पीबी31एच9195 है, यह मानसा पंजाब का है। जैसा कि वीडियो बनावटी दिख रहा है। हमने 'कोरोना वायरस मॉक ड्रिल मानसा पंजाब' कीवर्ड इंटरनेट पर सर्च किया तो एक न्यूज में इस वीडियो के साथ पता चला कि यह मानसा जिले के बच्छोआना गांव बुढ़लाडा तहसील का है। वहीं बुढ़लाडा के सब-डिविशनल मजिस्ट्रेट ने बताया कि "हमने 13 मार्च 2020 को एक मॉक ड्रिल की थी, ताकि कोरोना वायरस के लिए तैयारी पुख्ता हो।"

सच
राजस्थान पत्रिका की फैक्ट चैक टीम ने पंजाब पुलिस की ओर से कोरोना वायरस के एक मरीज को जबरदस्ती ले जाने के सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की जांच की तो पता चला कि यह वीडियो दरअसल मानसा (पंजाब) में हुई एक मॉक ड्रिल के दौरान फिल्माया गया था। यह मॉक ड्रिल जिला प्रशासन, डॉक्टरों और पुलिस के समूह की ओर से आयोजित की गई थी, ताकि जिले में महामारी से लडऩे की तैयारी जांची जा सके।

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Gaurav Mayank
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