फैक्ट चैक : कर्नाटक का रामनवमी का पुराना वीडियो, सीएए के पक्ष की रैली का दावा

सीएए के समर्थन में भीलवाड़ा में रैली का दावा, सोशल मीडिया पर लोग वीडियो कर रहे शेयर, एनआरसी और सीएए के समर्थन के नाम पर वायरल, सोशल मीडिया पर यूजर्स कर रहे पोस्ट शेयर, सच - रामनवमी पर 2 साल पहले कर्नाटक की रैली का है वीडियो, जानें इस वायरल पोस्ट की पूरी सच्चाई

By: Gaurav Mayank

Published: 06 Jan 2020, 07:25 PM IST

जयपुर। सोशल मीडिया पर किसी फोटो और वीडियो के साथ छेड़छाड़ कर उसे वायरल किया जाता रहता है। वहीं किसी पुरानी फोटो और वीडियो को नया बताकर भी उसे शेयर किया जाता है। कई बार सच्चाई कोसों दूर होती है, लेकिन सोशल मीडिया पर लोग बिना सच जाने उसे वायरल करते रहते हैं। देश में नागरिकता संशोधन कानून यानी सीएए और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर यानी एनआरसी के विरोध और समर्थन में देशभर में आंदोलन हो रहे हैं। इसी क्रम में एक पुराने वीडियो को सोशल मीडिया पर खूब शेयर किया जा रहा है। यूजर्स इस वीडियो को यह कहकरवायरल कर रहे हैं कि राजस्थान के भीलवाड़ा में सीएए और एनआरसी के समर्थन में रैली निकाली गई। इस वीडियो में खूब सारे भगवा झंडों के साथ लोगों के सैलाब को देखा जा सकता है। राजस्थान पत्रिका की फैक्ट चैक टीम ने इस वायरल मैसेज के पीछे का सच जाना। जांच में वायरल पोस्ट झूठी साबित हुई। कर्नाटक के गुलबर्गा में वर्ष 2018 में रामनवमी पर निकाली गई रैली के वीडियो को कुछ लोग राजस्थान के भीलवाड़ा के नाम पर फैला रहे हैं। जांच में पता चला कि इस वीडियो का सीएए के समर्थन में निकाली गई रैली से कोई संबंध नहीं है।
यह है वायरल पोस्ट में
फेसबुक पेज गुर्जर क्लब ने एक वीडियो को अपलोड करते हुए दावा किया कि "सीएए और एनआरसी के समर्थन में आज भीलवाड़ा में फुल माहौल... जय जय श्री राम.... मोदी जी आप पीछे मत हटना, हर हिंदू आपके साथ है, कुछ जयचन्दों के अलावा"

जांच

राजस्थान पत्रिका की फैक्ट चैक टीम ने भीलवाड़ा के नाम पर वायरल हो रहे वीडियो को देखा तो वीडियो की क्वालिटी काफी खराब थी। इसके लिए हमने ओरिजनल वीडियो को सर्च करना शुरू किया। वायरल वीडियो में से कुछ ग्रैब निकालकर हमने गूगल रिवर्स इमेज में सर्च करना शुरू किया। हमें यह वीडियो कई जगह मिला। सबसे पुराना वीडियो हमें पवन सारासम्बी नाम के एक यूट्यूब चैनल पर मिला। इसे 6 अप्रैल 2018 को अपलोड किया गया था। इसमें बताया गया कि यह वीडियो वर्ष 2018 में कर्नाटक के गुलबर्गा (कलबुर्गी) में निकाली गई रामनवमी यात्रा का है। गुलबर्गा (कुलबर्गी) के वीडियो और भीलवाड़ा के नाम पर वायरल हो रहे वीडियो में हमें कई समानता मिली। दोनों वीडियो में हमें दाएं तरफ पानी की एक पीली टंकी दिखी। इस टंकी के पीछे के बोर्ड भी नजर आया। इनके अलावा वीडियो के बाएं तरफ हमें बिल्डिंग के ऊपर पीले बैकग्राउंड में काले अक्षरों में लिखा हुआ नजर आया। वीडियो में हमें सड़क के किनारे सवेरा होटल लिखा हुआ दिखा। इसके अलावा हमें एक धार्मिक स्थल की इमारत (दरगाह) भी दिखी। गूगल मैप में जब हमनें सवेरा होटल सर्च किया हुआ तो हमें कर्नाटक के गुलबर्गा में यह होटल मिला। उसके पास हमें दरगाह भी दिखी। इससे यह तो तय हो गया कि वीडियो कर्नाटक का ही है। इसके बाद यूट्यूब पर राम नवमी-2018 गुलबर्ग कीवर्ड टाइप करके सर्च किया तो हमें 25 और 26 मार्च 2018 को अपलोड कई वीडियो मिले। जो गुलबर्गा की ही रामनवमी की यात्रा के अलग एंगल के वीडियो थे। वीडियो में उस दरगाह को भी देखा जा सकता है, जिसका बुर्ज वायरल वीडियो में दिख रहा था। अंत में हमने गुर्जर-क्लब नाम के फेसबुक पेज की सोशल स्कैनिंग की। इसी पेज से कर्नाटक के वीडियो को भीलवाड़ा के नाम पर वायरल किया गया। इस पेज को 16 जून 2019 को बनाया गया।

सच

राजस्थान पत्रिका की फैक्ट चैक टीम ने इस वायरल मैसेज के पीछे का सच जाना तो जांच में पता चला कि जिस वीडियो को भीलवाड़ा का बताया जा रहा है, वह फर्जी है। दरअसल मार्च 2018 में कर्नाटक के गुलबर्गा शहर में रामनवमी पर एक शोभायात्रा निकाली गई थी। वीडियो उसी दौरान का है, लेकिन कुछ लोग इस वीडियो को सीएए के समर्थन में निकाली गई रैली के नाम पर जोड़कर वायरल कर रहे हैं।

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