Pitri Paksha : आज इन पूर्वजों को जरूर करें याद, प्रसन्न हुए तो बदल जाएगी जिंदगी

पितृ पक्ष के सभी दिन श्राद्ध किए जाते हैं पर आश्विन कृष्ण पंचमी, आश्विन कृष्ण नवमी, आश्विन कृष्ण एकादशी, आश्विन कृष्ण त्रयोदशी, आश्विन कृष्ण चतुर्दशी और अंतिम दिन सर्वपितृमोक्ष अमावस्या तिथि का अधिक महत्व है। इन तिथियों पर विशेष श्राद्ध कर्म किए जाते हैं जिनका पुण्य फल भी अधिक मिलता है।

By: deepak deewan

Published: 07 Sep 2020, 08:01 AM IST

जयपुर. इन दिनों श्राद्ध अर्थात पितृ पक्ष चल रहा है। पितृ पक्ष में पूर्वजों का तिथि के अनुसार श्राद्ध कर्म किया जाता है। आश्विन माह के कृष्ण पक्ष में हर साल यह परंपरा निभाई जाती है। ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई के अनुसार हमारे जिन पूर्वजों की मृत्यु जिस तिथि पर होती है, उसी तिथि पर उनका श्राद्ध किया जाता है।

कई बार पूर्वजों की मृत्यु तिथि मालूम नहीं रहती है, ऐसी स्थिति में भी ग्रंथों में श्राद्ध का विधान बताया गया है। पितृ पक्ष के सभी दिन श्राद्ध किए जाते हैं पर आश्विन कृष्ण पंचमी, आश्विन कृष्ण नवमी, आश्विन कृष्ण एकादशी, आश्विन कृष्ण त्रयोदशी, आश्विन कृष्ण चतुर्दशी और अंतिम दिन सर्वपितृमोक्ष अमावस्या तिथि का अधिक महत्व है। इन तिथियों पर विशेष श्राद्ध कर्म किए जाते हैं जिनका पुण्य फल भी अधिक मिलता है।

आज अश्विन कृष्ण पक्ष की उदया तिथि पंचमी है जोकि रात 9 बजकर 39 मिनट तक रहेगी। ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र नागर बताते हैं कि आज खासतौर पर उन लोगों का श्राद्ध कर्म किया जाता है, जिनका शादी से पहले ही स्वर्गवास हो गया हो। पंचमी के दिन अपने अविवाहित पूर्वजों को पूर्ण श्रद्धता के साथ याद करना चाहिए। ऐसे पूर्वजों का विधि विधान से श्राद्ध करने का अत्यधिक फल मिलता है। उनकी प्रसन्नता से जीवन में सर्वसुख प्राप्त होते हैं।

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