दिवंगत विधायकों के निधन पर उपचुनावः पहली बार टूटा परिवारवाद के हार का क्रम

-जनता ने तीनों ही सीटों पर परिवारवाद को जिताया, 1965 से लेकर साल 2005 तक 8 उपचुनाव में नहीं मिल पाई थी जनता की सहानुभूति, कांग्रेस ने सहाड़ा-सुजानगढ़ तो भाजपा ने राजसमंद पर लगाया था परिवारवाद पर दांव

By: firoz shaifi

Updated: 03 May 2021, 11:18 AM IST

जयपुर। प्रदेश की 3 सीटों सहाड़ा, राजसमंद और सुजानगढ़ में दिवंगत विधायकों के निधन के चलते हुए उपचुनाव में पहली बार परिवारवाद ने लगातार हो रही हार के क्रम को तोड़ने में सफलता हासिल की है। जनता ने भी तीनों ही सीटों पर परिवारवाद पर ही विश्वास जिताया है। हालांकि कांग्रेस की तरफ से सहाड़ाऔर सुजानगढ़ में परिवारवाद पर दांव खेला गया था तो वहीं भाजपा ने राजसमंद पर परिवारवाद पर दांव खेला था।

दोनों ही प्रमुख दलों की रणनीति सफल हो पाई है। दरअसल दोनों ही प्रमुख दलों के लिए परिवारवाद की जीत इसलिए भी अहम है, चूंकि दिवंगत विधायकों के निधन के चलते अब तक जितने भी उपचुनाव हुए हैं उन सभी चुनावों में जनता ने परिवारवाद को सिरे से खारिज करते हुए दूसरे प्रत्याशियों को चुनाव में जीत दिलवाई थी। ऐसे में इस बार जनता ने भी अपने पूर्व के फैसले को पलटते हुए परिवारवाद पर मोहर मोहर लगाई है।

लगातार आठ चुनावों में जनता ने नकारा
वहीं दूसरी ओर प्रदेश में दिवंगत विधायकों के निधन के चलते 1965 से लेकर साल 2005 तक 8 ऐसे उपचुनाव हुए हैं जहां पर सहानुभूति वोट बटोरने के लिए दिवंगत विधायकों के परिजनों को टिकट दिए गए थे लेकिन हैरानी की बात यह कि सभी उपचुनावों में जनता ने परिवारवाद को पूरी तरीके से नकार दिया थाय़ 1965 से लेकर साल 2005 तक 8 उपचुनाव में दिवंगत विधायकों के परिजन और चुनावों में जीत नहीं दर्ज कर पाए लेकिन 16 साल बाद अप्रैल 2021 में हुए 3 सीटों पर हुए उपचुनाव में जनता ने पहली बार परिवारवाद पर अपनी मुहर लगाई है।

पूर्व के परिणामों से भयभीत थे भाजपा-कांग्रेस प्रत्याशी
हालांकि पूर्व में लगातार हार के रिकॉर्ड को देखते हुए भाजपा-कांग्रेस के प्रत्याशी अंदरखाने अपनी जीत को लेकर भयभीत थे। दोनों दलों के नेताओं के बीच पिछले रिकॉर्ड को लेकर चर्चाओं का दौर था, लेकिन इस बार परिवारवाद हार के क्रम को तोड़ने में सफल साबित हुआ।


इन उपचुनाव में परिवारवाद की लगातार हार

साल-------- चुनाव क्षेत्र-------दिवंगत विधायक--------- परिवारवाद------ परिणाम
-1965------ राजाखेड़ा------- प्रताप सिंह----------- (पुत्र)- एम सिंह----------- हार
-1978-------- रूपवास----- ताराचंद----- --------- (पुत्र)- विराम---------------हार
-1988-------- खेतड़ी----- मालाराम--------------(पुत्र)- एच लाल---------------हार
-1995------ बांसवाड़ा---- हरिदेव जोशी----------(पुत्र)- दिनेश जोशी------------हार
-1995------ बयाना----- बृजराज सिंह------------(पुत्र)- विजेंद्र सिंह सुपा--------हार
- 2000--- लूणकरणसर----भीमसेन-------------(पुत्र)-वीरेंद्र आलियास----------हार
-2002-- सागवाड़ा------ भीखाभाई-------------(पुत्र)-सुरेंद्र कुमार-------------हार
-2005---- लूणी---------रामसिंह विश्नोई--------(पुत्र)-मलखान सिंह------------हार
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16 साल बाद परिवारवाद पर मुहर
साल-------- चुनाव क्षेत्र-------दिवंगत विधायक--------- परिवारवाद------ परिणाम
2021------ सहाड़ा------------कैलाश त्रिवेदी----------- गायत्री देवी-------जीत
2021------सुजानगढ़----------- मा.भंवरलाल-------------मनोज मेघवाल---जीत
2021----- राजसमंद------------ किरण माहेश्वरी-----------दीप्ति माहेश्वरी----जीत

firoz shaifi Desk
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