राजस्थान: टोल मुक्त करवाने के लिए टोल नाकों पर एकजुट हो रहे किसान, जानें कहां-कहां नज़र आएगा असर

किसान आंदोलन के दौरान टोल प्लाज़ा मुक्त करने का मामला, संयुक्त किसान मोर्चा ने किया है आज ‘टोल फ्री’ करने का ऐलान, राजस्थान के सभी टोल नाकों को टोल फ्री करने का ऐलान, फिलहाल पांच जिलों में कई टोल नाकों को टोल मुक्त करने का दावा, सीकर, झुंझुनूं, हनुमानगढ़, गंगानगर और नागौर में दिखेगा ज़्यादा असर, शेष जिलों में जारी रहेगा समझाइश का दौर, कुछ दिनों में करवाएंगे टोल मुक्त, किसान बहुल इलाकों पर दोपहर बाद नज़र आने लगेगा असर, कृषि कानूनों को वापस लेने की किसान कर रहे हैं मांग

 

By: nakul

Published: 12 Feb 2021, 10:26 AM IST

जयपुर।

संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से सम्पूर्ण राजस्थान को आज से टोल मुक्त किए जाने के ऐलान के पहले दिन आंशिक असर देखा जा रहा है। किसान आंदोलन में शामिल किसान आज टोल नाकों पर एकजुट होकर उन्हें टोल मुक्त करवाने की कवायद में जुटे हुए हैं। टोल नाकों को टोल मुक्त किए जाने का असर खासतौर से प्रदेश के किसान बहुल जिलों में देखा जा रहा है। किसान नेताओं का कहना है कि अभी शुरूआती चरण में कुछ जिलों में ही असर दिखेगा, लेकिन अगले कुछ दिनों में आंदोलन का पैमाना अन्य जिलों में भी बढ़ता नज़र आएगा।

 

इन जिलों में दिखेगा असर

संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े किसान नेता हिम्मत सिंह ने दावा किया कि प्रदेश के पांच जिलों के टोल नाकों को टोल मुक्त किया जा रहा है। इनमें सीकर, झुंझुनूं, हनुमानगढ़, गंगानगर और नागौर जिले शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सम्पूर्ण राजस्थान को टोल मुक्त किये जाने के ऐलान को अभी दो दिन ही बीते हैं, ऐसे में अन्य जिलों को भी टोल मुक्त किये जाने में कुछ वक्त लग सकता है। हिम्मत सिंह ने कहा कि किसान आंदोलन जल्द ही पूर्वी राजस्थान में भी गति पकड़ेगा और उसका खासा असर देखा जाएगा।

 

शांतिपूर्ण रहेगा ‘टोल मुक्त’ अभियान

किसान नेताओं का कहना है कि प्रदेश में टोल नाकों को टोल मुक्त करवाने की कवायद पूरी तरह से शांतिपूर्ण रहेगी। किसान नेताओं और प्रतिनिधियों को भी हिदायत दी गई है कि किसी भी टोल नाके को खोलने के लिए जोर-ज़बरदस्ती नहीं की जाए। ऐसी स्थिति में किसान टोल नाकों पर ही धरना-प्रदर्शन कर केंद्र सरकार का विरोध जताएंगे।

 

किसान महापंचायत ने बनाई दूरी

संयुक्त मोर्चा ने भले ही राजस्थान के टोल नाकों को टोल मुक्त किये जाने का एलान कर दिया, लेकिन किसान आंदोलन में शामिल किसान संगठनों में ही एकराय बनती नहीं दिखाई दे रही है। संयुक्त मोर्चा के इस ऐलान से किसान महापंचायत ने किनारा कर लिया है। जबकि बताया गया है कि कुछ अन्य किसान संगठन और किसान नेता संयुक्त मोर्चा के टोल मुक्त ऐलान से सहमत नहीं हैं।

 

 

लगातार बना हुआ है गतिरोध

केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में किसानों का आंदोलन लगभग तीन महीने से जारी है। दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर किसान पड़ाव डाले बैठे हुए हैं। ऐसे में दिल्ली से सटे पांच बॉर्डर्स पर आवाजाही बंद है।

 

वहीं तीनों कृषि कानून वापसी और एमएसपी पर कानून बनाने की मांग पर किसान आंदोलन जारी है, तो वहीं केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री मोदी एमएसपी जारी रखने और एपीएमसी खत्म नहीं होने का आश्वासन दे रहे हैं, लेकिन फिर भी आंदोलन खत्म नहीं हो रहा है। वहीं विपक्षी दल भी इस मुद्दे पर किसानों का समर्थन करते हुए सरकार को घेरने में लगे हुए हैं।

 

 

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