ब्याज मुक्त फसली ऋण से वंचित किसान, सरकार कर रही छोटी राशि का ऋण देने का विचार

सहकारी बैंकों को सता रहा डिफॉल्टर होने का डर
किसानों को नहीं मिल रहा ऋण
साहूकार से अधिक ब्याज पर ऋण लेने को मजबूर किसान

By: Rakhi Hajela

Updated: 30 Dec 2020, 05:55 PM IST

Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

राज्य सरकार ने भले ही प्रदेश के किसानों का कर्ज माफ कर दिया हो लेकिन इन किसानों को फिर से ऋण देने में अब प्रदेश के सहकारी बैंक भी कतरा रहे हैं। ऐसे में सरकार अब इन किसानों को छोटी राशि से ऋण देने की शुरुआत करने का मानस बना रही है। यह छोटी राशि पांच हजार रुपए तक हो सकती है।

बैंकों की कोई देनदारी बकाया नहीं
गौरतलब है कि कांग्रेस सरकार ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में किसानों का ऋण माफ किए जाने की घोषणा की थी। सत्ता में आने के बाद सरकार ने अवधि पार हो चुके किसानों का ऋण माफ कर दिया और अब इन किसानों की बैंकों पर कोई देनदारी बकाया नहीं है। इन डिफॉल्टर किसानों के कुछ मामले ऐसे भी हैं कि कर्जमाफी के दौरान सहकारी समितियों के व्यवस्थापकों ने उनके अवधि पार खातों में मूलधन के साथ ब्याज भी जोड़ दिया था। इन किसानों की कर्जमाफी तो हो गई लेकिन मूलधन के साथ ब्याज भी जुडऩे से किसानों के खातों को अवधि पार मान लिया गया लेकिन अब इन किसानों को सहकारी बैंक किसानों को नया ऋण नहीं देना चाहते। ऐसे में प्रदेश के लाखों किसान सहकारी बैंकों के माध्यम से मिलने वाले ब्याज मुक्त फसली ऋण से वंचित हैं।

छह माह पहले की थी सरकार ने घोषणा
गौरतलब है कि करीब 6 महीने पहले राज्य सरकार ने इन किसानों को फिर से ऋण देने की शुरुआत करने की घोषणा भी की थी लेकिन अभी तक भी वह व्यवस्था शुरू नहीं हो पाई है। गौरतलब है कि किसानों को सहकारी बैंकों से फसली ऋण बिना किसी ब्याज के दिया जाता है। इनके ब्याज की राशि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर वहन करते हैं। आपको बता दें कि पिछले दो साल से किसान सरकार ने इस संबंध में मांग कर रहे हैं लेकिन उनकी समस्या का समाधान अब तक नहीं हो पाया था।

यह है किसानों की ऋणमाफी का गणित -
: वर्ष 2018 से पहले किसानों को मिलता था सहकारी बैंक से ऋण
: जून 2018 तक किसानों को अपने ऋण चुकाना था
: समय पर ऋण जमा नहीं करवाने पर किसान वाले बन गए डिफॉल्टर
: इसके बाद सरकार ने किसानों की ऋणमाफी कर दी
: ऋणमाफी में इन डिफॉल्टर किसानों का ऋण भी माफी के दायरे में आ गया
: ऐसे में सरकार ने सहकारी बैंकों को बकाया ऋणों की राशि का भुगतान कर दिया
: इस तरह ये डिफॉल्टर किसान अब कर्ज से मुक्त हो चुके हैं
: लेकिन इसके बाद किसानों सहकारी बैंकों द्वारा ऋण नहीं दिया जा रहा
: बैंकों का मानना है कि किसान फिर से ऋण चुकाने में आनाकानी करेंगे जिसका नुकसान बैंकों को होगा

मंत्री बोले, पांच हजार रुपए का भी दे सकते हैं ऋण
पूर्व में डिफॉल्टर होने के चलते सहकारी बैंक इन किसानों को ऋण देने में कतरा रहे हैं। बैंकों को डर है कि ये किसान फिर से ऋण चुकाने में आनाकानी करेंगे, लेकिन अब सरकार इस पर गंभीरता से विचार कर रही है और छोटी राशि से इन किसानों को फिर से ऋण देने की शुरुआत करने पर विचार किया जा रहा है। मैंने भी बैंकों से कहा है कि जरूरी नहीं कि उन्हें पचास हजार या लाख रुपए ऋण दिया जाएगा यह राशि पांच हजार भी हो सकती है।
उदयलाल आंजना, सहकारिता विभाग

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