राजस्थान: शाहजहांपुर-खेड़ा बॉर्डर के किसान आंदोलन में ‘रार’! जानें क्यों हो रहा रामपाल जाट का बॉयकॉट

कृषि कानूनों के विरोध में जारी है किसान आंदोलन, शाहजहांपुर-खेड़ा बॉर्डर पर आपस में उलझे किसान नेता, संयुक्त किसान मोर्चा ने रामपाल गुट का जताया विरोध, कमेटी में बदलाव की पैरवी में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है ‘रामपाल गुट’, रामपाल जाट पर किसान आंदोलन में ‘गद्दारी’ करने का बड़ा आरोप

 

By: nakul

Published: 17 Jan 2021, 12:46 PM IST

जयपुर।

कृषि कानूनों के विरोध में अलवर के शाहजहांपुर-खेड़ा बोर्डर पर जारी किसान आंदोलन में अब गुटबाजी होने की बात सामने आई है। विवाद सुप्रीम कोर्ट की ओर से किसान आंदोलन को ख़त्म करने को लेकर बनाई गई कमेटी को लेकर हो रहा है। किसानों का एक तबका कमेटी में शामिल सदयों का पुरजोर विरोध जता रहे हैं, तो वहीं एक वर्ग कमेटी के समक्ष अपनी बात रखने का पक्षधर बताया गया है।

किसान नेता रामपाल जाट भी निशाने पर
आंदोलन में शामिल किसानों के बीच बढ़ते विवाद में राजस्थान के किसान नेता व किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट भी निशाने पर हैं। दरअसल, रामपाल जाट ने सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित कमेटी में बदलाव करने की अपील करते हुए एक अर्जी दाखिल की है। जबकि उनका विरोध जता रहे किसान कमेटी गठन के ‘सुप्रीम’ आदेश से ही खफा हैं। वे कृषि कानून रद्द करने की एकमात्र मांग कर रहे हैं।

किसान नेता रामपाल जाट को लेकर किसानों का एक वर्ग इतना नाराज़ है कि उन्होंने उनका बायकाट करने का ऐलान कर दिया है। यहाँ तक कि उन्हें आंदोलन स्थल से हटने के लिए दो दिन की मौहलत तक दी गई है।

किसान नेता हिम्मत सिंह गुर्जर ने कहा है कि भाजपा व आरएसएस विचारधारा के कुछ किसान नेता आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश कर रहें हैं। रामपाल जाट एवं भानु प्रताप गुट गुप-चुप तरीके से सुप्रीम कोर्ट में अपना वकील खड़ा करके कमेटी के सामने पक्ष रखने की कवायद कर रहे हैं।

‘गद्दारी माफ़ी योग्य नहीं’, दो दिन का अल्टीमेटम
शाहजहांपुर-खेड़ा बोर्डर पर आंदोलन में शामिल किसान नेता हिम्मत सिंह ने कहा कि किसान आंदोलन के संयुक्त किसान मोर्चा ने किसान नेता रामपाल जाट को दो टूक शब्दों में कहा है कि ये कारस्तानी व किसान आंदोलन के साथ ग़द्दारी माफ़ी योग्य नहीं है। उन्होंने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा ने पहले दिन से ही सुप्रीम कोर्ट की कमेटी का बहिष्कार किया हुआ है।

हिम्मत सिंह ने कहा कि आंदोलन के नाम पर दोहरे मापदंड वाले लोगों की पहचान हो गई है, लिहाजा रामपाल जाट यहाँ से विदाई लें, उन्हें दो दिन का समय दिया गया है।

‘कमेटी पूर्वाग्रही, हो बदलाव’
किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित कमेटी पर आपत्ति जताते हुए उसमें बदलाव की पैरवी की है। शीर्ष अदालत में एक याचिका लगाते हुए जाट ने कमेटी के सदस्यों पर आपत्ति जताई है। साथ ही कमेटी सदस्यों पर कृषि कानूनों को लेकर अत्यधिक पक्षपाती और पूर्वाग्रही होने की आशंका जताई है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने सरकार और किसानों का पक्ष सुनकर गतिरोध ख़त्म करने की दिशा में चार सदस्यीय कमेटी का गठन किया है।

इन बदलावों की है अपील
रामपाल जाट ने अपनी याचिका में कमेटी में संतुलन बनाने के लिए समान संख्या में उन सदस्यों को भी शामिल करने की अपील की है जो कृषि कानूनों के विरुद्ध विचार रखते हों। साथ ही भारत के किसी सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश या उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को निर्णायक के तौर पर नियुक्त करने की भी अपील की गई है।

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