फिल्म मेकिंग और राइटिंग दोनों ही काफी अलग- सौरभ रतनु


'फिल्मी बातें ' सेशन में फिल्म 'गुडग़ांव ' पर चर्चा
आईएएस एसोसिएशन राजस्थान ने किया आयोजन
ऑनलाइन सेशन में फिल्म स्क्रिप्ट राइटर एंड स्टोरी टैलर सौरभ रतनु ने अपनी जर्नी और अनुभव साझा किए

By: Rakhi Hajela

Published: 27 Jun 2021, 09:14 PM IST



जयपुर, 27 जून
फिल्म स्क्रिट राइटर एंड स्टोरी टैलर स्टोरी सौरभ रतनु का कहना है कि फिल्म मेकिंग और राइटिंग दोनों ही काफी अलग हैं। आईएएस एसोसिएशन राजस्थान की ओर से रविवार को 'फिल्मी बातें' सीरीज के तहत सेशन अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि जब लिखना शुरू किया कि तब समझ आया कि कहानी आइडिया नहीं है, न ही कहानी कोई सीन या कैरेक्टर है। राइटिंग के दाव-पेच और भाषा को समझने के लिए 5 साल लगे। आईएएस एसोसिएशन राजस्थान की लिटरेरी सेक्रेटरी मुग्धा सिन्हा से चर्चा करते हुए उनका कहना था कि मेरा मानना है कि एक डायरेक्टर को 16 विद्याएं आनी चाहिए जिसमें राइटिंग भी एक है। उन्होंने सलाह देते हुए कहा कि अच्छी राइटिंग स्किल्स के लिए एबिलिटी टू ऑब्जर्व सबसे महत्वपूर्ण है। इसके लिए ऑब्जर्वेशन क्षमता विकसित करने की आवश्यकता है। कहानियां, किरदार हमारे आसपास ही होते हैं। राइटर और फिल्म मेकर बनने के लिए दूसरों में रुचि लेना आवश्यक है। आप लिखने से ही लेखक बनते हैं।
अपने बचपन और स्कूलिंग के दिनों को याद करते हुए रतनु ने बताया कि वे राजस्थान की चारण जाति से तालुक रखते हैं और उनका गांव जयपुर में सांगानेर के पास स्थित है। उन्होंने बताया कि बचपन से ही उन्हें फिल्में देखने का शौक था और उनका मनाना था कि काम ऐसा करना चाहिए जिसका उत्साह जिंदगीभर के लिए बना रहे। फिल्म इंडस्ट्री में शुरुआत की बात करते हुए उन्होंने बताया कि एक अखबार में कार्य करने के दौरान उनकी मुलाकात फिल्म मेकर मीरा नायर के साथ हुई। जिसके बाद वे मुंबई गए। जहां उन्होंने 5 साल संघर्ष के बाद मेन स्ट्रीम इंडस्ट्री में कदम रखा। जहां उन्होंने सुभाष घई,भरत बाला जैसे इंडस्ट्री के जाने-माने लोगों के साथ काम करते हुए डायरेक्शन का काम सीखा।
फिल्म 'गुडग़ांव Ó की कहानी के बारे में उनका कहना था कि यह वहां रहने वाले लोगों पर आधारित है। गुडग़ांव के जमींदार वहां की जमीन पर सूखा देखकर पछताते थे। गुडग़ांव में औद्योगीकरण के कारण तेजी से हो रहे बदलाव के बावजूद यह योजनाबद्ध तरीके से नहीं किया गया था। फिल्म में जमीन जोतने वाले भी अपनी विकट परिस्थितियों के कारण किडनेपर बन जाते हैं। जबकि पाप करने वाले बड़े बिल्डर बन जाते हैं। फिल्म में ऐसे लोगों की दुविधाओं को कई एंगल से दिखाया गया है। उन्होंने इस दौरान इंडस्ट्री में करियर बनाने वाले राइटर्स को टिप्स भी दिए।

Rakhi Hajela Desk
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