बाकी सब फर्स्ट क्लास तो नहीं पर स्टोरी 'कलंक' है

बाकी सब फर्स्ट क्लास तो नहीं पर स्टोरी 'कलंक' है

Aryan Sharma | Publish: Apr, 17 2019 06:25:58 PM (IST) Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

अभिषेक वर्मन की फिल्म 'कलंक' में कलाकारों की भीड़ है, लेकिन कमजोर कथा-पटकथा और अन्य आस्पैक्ट्स भव्यता के साथ रचे गए इस पीरियड ड्रामा को मनोरंजक पेशकश बनाने में बाधा बन गए हैं।

स्क्रीनप्ले-डायरेक्शन : अभिषेक वर्मन
स्टोरी : शिबानी भटिजा
डायलॉग्स : हुसैन दलाल
म्यूजिक : प्रीतम
लिरिक्स : अमिताभ भट्टाचार्य
सिनेमैटोग्राफी : बिनोद प्रधान
एडिटिंग : श्वेता वेंकट मैथ्यू
रनिंग टाइम : 168 मिनट
स्टार कास्ट : संजय दत्त, माधुरी दीक्षित, वरुण धवन, आलिया भट्ट, सोनाक्षी सिन्हा, आदित्य रॉय कपूर, कुणाल खेमू, हितेन तेजवानी
स्पेशल अपीयरेंस : कृति सैनन, कियारा आडवाणी

आर्यन शर्मा/जयपुर. फिल्म '2 स्टेट्स' के डायरेक्टर अभिषेक वर्मन की नई पेशकश है पीरियड लव ड्रामा 'कलंक'। फिल्म में भव्य सेट, शानदार स्टारकास्ट और अट्रैक्टिव सिनेमैटोग्राफी इसे विजुअल ट्रीट बनाते हैं, लेकिन लचर स्क्रीनप्ले और फिल्म की लेंथ से इस दावत का जायका बिगड़ जाता है। कहानी प्री इंडिपेंडेंस एरा में सेट है, जहां कैंसर से जूझ रही सत्या चौधरी (सोनाक्षी सिन्हा) अपनी मौत को नजदीक देखकर रूप (आलिया भट्ट) को अपने पति देव चौधरी (आदित्य रॉय कपूर) से शादी के लिए राजी करती है ताकि उसके जाने के बाद देव अकेला न रहे। रूप और देव की शादी हो जाती है, लेकिन यह एक समझौते से ज्यादा नहीं है। इस शादी में प्यार की कोई गुंजाइश नहीं है। इसी दौरान हुस्नाबाद स्थित घर में रहने के दौरान रूप कोे संगीत की स्वरलहरियां सुनाई देती है। वह उससे मोहित हो जाती है और घर में काम करने वाली से पूछती है तो पता चलता है कि यह गाना हीरामंडी मोहल्ले में रहने वाली तवायफ बहार बेगम(माधुरी दीक्षित) गा रही है। रूप उससे संगीत सीखने के लिए घरवालों से परमिशन मांगती है। शुरुआती ना-नुकुर के बाद अनुमति मिल जाती है। बहार बेगम के पास संगीत सीखने जब वह वहां जाती है तो उसकी मुलाकात जफर(वरुण धवन) से होती है, जो लोहे के औजार बनाने का काम करता है। धीरे-धीरे दोनों का मेलजोल बढ़ जाता है, जो प्यार में बदल जाता है। इसके बाद कहानी में कई उतार-चढ़ाव आते हैं।

कुछ भी स्पष्ट नजर नहीं आता
कहानी की बुनियाद कमजोर है, वहीं स्क्रीनप्ले क्रिस्प नहीं है। कहानी में इश्क, इंतकाम और बंटवारे के मंसूबे साथ-साथ चलते हैं, पर रफ्तार इतनी धीमी है कि उबासी आने लगती है। कई दृश्य खिंचे हुए लगते हैं। डायलॉग्स इम्प्रेसिव हैं। अभिषेक वर्मन की निर्देशन पर पकड़ नहीं दिखती। वरुण की परफॉर्मेंस फर्स्ट क्लास है। उनके कैरेक्टर में लेयर्स हैं, जिन्हें उन्होंने बखूबी जीया है। काजल लगी उनकी आंखें बोलती नजर आती हैं। स्टनिंग आलिया एक बार फिर एक्टिंग से दिल में उतर जाती हैं। दोनों की कैमिस्ट्री जबरदस्त है। आदित्य ने टैलेंट के बूते रोल को अच्छे से निभाने की कोशिश की है। माधुरी की पर्दे पर अपीयरेंस वाइब्रेंट है। छोटी भूमिका में सोनाक्षी लवली लगी हैं। संजय दत्त का रोल छोटा है, लेकिन ठीक हैं। ग्रे शेड भूमिका में कुणाल खेमू जमे हैं। 'घर मोरे परदेसिया', 'फर्स्ट क्लास' जैसे गानों के साथ म्यूजिक ओके है। सेट डिजाइनिंग अच्छी है, पर हैरान इसमें कई बातें हैरान करती हैं। कॉस्ट्यूम्स, कोरियोग्राफी, लोकेशंस व कैमरा वर्क मनोरम हैं। यदि एडिटिंग टेबल पर मुस्तैदी दिखाई होती तो फिल्म बेहतर हो सकती थी।

क्यों देखें : भव्य कैनवास पर प्रस्तुत की गई इश्क की इस कहानी में स्क्रिप्ट व स्क्रीनप्ले 'कलंक' हैं। इस तमाशे से आत्मा गायब है। अगर आप आलिया और वरुण के फैन हैं तो ही इस फिल्म को देखने जाएं, वर्ना बोर हो सकते हैं।

रेटिंग : 2 स्टार

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