scriptfirst time in Rajasthan, Electricity demand crosses 15700 MW | Rajasthan में पहली बार : बिजली डिमांड 15700 मेगावाट क्रॉस, 93 प्रतिशत क्षमता से बिजलीघरों में बिजली उत्पादन | Patrika News

Rajasthan में पहली बार : बिजली डिमांड 15700 मेगावाट क्रॉस, 93 प्रतिशत क्षमता से बिजलीघरों में बिजली उत्पादन

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जयपुर

Published: December 24, 2021 11:13:13 pm

भवनेश गुप्ता
जयपुर। राजस्थान में पहली बार बिजली की अधिकतम डिमांड 15700 मेगावाट को क्रॉस कर गई है। बिजली की लगातार बढ़ती मांग के बीच प्रदेश के सरकारी बिजलीघरों में 7080 मेगावाट क्षमता की इकाईयों से बिजली उत्पादन शुरू कर दिया गया है। इनकी बिजली उत्पादन की कुल क्षमता 7580 मेगावाट है और इक्कीस साल पहली बार है जब कुल उत्पादन क्षमता के मुकाबले 93.40 प्रतिशत पर बिजलीघर संचालित किए जा रहे हैं। उत्पादन निगम का गठन जुलाई 2000 से अब तक की बेहतर स्थिति है। ऊर्जा मंत्री ने राज्ध्य विद्युत उत्पादन निगम के प्रबन्धन को इसके लिए बधाई दी है। राज्य मे शुक्रवार को बिजली की अधिकतम डिमांड 15752 मेगावाट रही।
Rajasthan में पहली बार : बिजली डिमांड 15700 मेगावाट क्रॉस, 93 प्रतिशत क्षमता से बिजलीघरों में बिजली उत्पादन
Rajasthan में पहली बार : बिजली डिमांड 15700 मेगावाट क्रॉस, 93 प्रतिशत क्षमता से बिजलीघरों में बिजली उत्पादन
अभी 500 मेगावाट की यह दो यूनिट है बंद
पांच सौ मेगावाट क्षमता की दो यूनिट तकनीकी कारण से बंद है। इनमें सूरतगढ़ और छबड़ा प्लांट की 250—250 मेगावाट क्षमता की दो यूनिट शामिल है। छबड़ा प्लांट में दो माह पहले हुए हादसे के कारण यह यूनिट शुरू नहीं की जा सकी है।
16 हजार मेगावाट पहुंचेेगी मांग
रबी बुवाई सीजन होने के कारण बिजली की मांग बढ़ती जा रही है। पिछले तीन दिन में यही डिमांड 15622 से लेकर 15683 मेगावाट तक रही थी। उर्जा विकास निगम ने आगामी दिनों में यही डिमांड 16 हजार मेगावाट को क्रॉस करने की संभावना जताई है। इसी आधार पर बिजली खरीद प्रबंधन किया जा रहा है।
इधर, कोयला स्टॉक की चिंता
राज्य विद्युत उत्पादन निगम ने पहले ही बिजली उत्पादन बढ़ा दिया हो,लेकिन कोयला स्टॉक की चिंता अब भी बनी हुई है। बिजलीघरों में 2 से 9 दिन के बीच का ही कोयला अब भी है। कोल इंडिया की सहायक कंपनियों से कोयला सप्लाई के लिए प्रतिदिन 11.5 रैक का अनुबंध है, लेकिन 8 से 9 ही रैक मिल रही है। उधर, छत्तीसगढ़ में कोयले की आवंटित अतिरिक्त खदान से खनन प्रक्रिया की अनुमति नहीं मिलने भी टेंशन बढ़ती जा रही है। मौजूदा खदान में केवल एक माह का ही कोयला बचा है।

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