इस राज्य के इस बड़े शहर में पैट्रोल भराने के लिए अब जेल भी जा सकते हैं आप...

चुनौती यह नहीं कि जेल परिसर में कोई कॉर्मिशियल एक्ट हो रहा है, उल्टे चुनौती है कि इस एक्ट का हिस्सा जेल के बंदी होंगे। अफसरों का कहना है कि उन्हीं बंदियों को पंप पर काम करने का मौका मिलेगा जिनका व्यवहार जेल की सलाखों के पीछे भी पूरी तरह से अनुशासित है। जो पढ़े लिखें हैं और हिसाब कर सकते हैं।

By: JAYANT SHARMA

Published: 17 Oct 2020, 10:21 AM IST

जयपुर
गाड़ी में पैट्रोल भराना है तो अब आप जेल भी जा सकते हैं... जेल में सलाखों के पीछे नहीं बल्कि जेल परिसर में बन रहे पैट्रोल पंप पर। दरअसल राजस्थान में पहली बार किसी भी जेल में इस तरह का पहला प्रोजेक्ट शुरु किया जा रहा है। यह प्रोजेक्ट यहां सफल होता है तो इसे प्रदेश की अन्य बड़ी जेलों में भी शुरु किया जाएगा। जेल अफसरों का यह ड्रीम प्रोजेक्ट जयपुर शहर में नवरात्रि में शुरु करने की तैयारी की जा रही है। अपने तरह के नए एवं अनोखे प्रोजेक्ट को लेकर जेल अफसर उत्साहित भी हैं। अफसरों का कहना है कि सुरक्षा हमेशा की तरह पहली प्राथमिकता है। बताया जा रहा है कि जेलों में पैट्रोल पंप खोलने का यह फार्मूला देश में ही नया है। फिलहाल तेलांगाना समेत कुछेक राज्य ही इसे फॉलो कर रहे हैं।

जयपुर जेल में बन रहा पैट्रोल पंप, बंदी भरेंगे पैट्रोल
दरअसल जयपुर के घाटगेट क्षेत्र के पास स्थित जयपुर सेंट्रल जेल परिसर में यह पैट्रोल पंप खोला जा रहा है। इसे लेकर आईओसीएल से कुछ एमओयू साइन हुए हैं। इसी के तहत करीब एक हजार गज से ज्यादा भूमिक को पैट्रोल पंप के रुप में तैयार किया जा रहा है। फिलहाल वहां पर एक मशीन लगाई गई है और जल्द ही दूसरी लगाने की तैयारी की जा रही है। जेल की इस जमीन का हर साल का किराया करीब साठ लाख रुपए बनता है जो पैट्रोल कंपनी देने को तैयार है। साथ ही सवेरे से रात तक रोटेशन वाइज पंप पर काम करने वाले बंदियों की पगार भी कंपनी की ओर से देने की बात चल रही है। कंपनी के नियमानुसार पगार जोड़ी जाती है है तो पंद्रह से भी ज्यादा स्टाफ की साल भर की यह पगार करीब चालीस लाख रुपए होती है। इस हिसाब से जेल विभाग हर साल एक करोड़ रुपए इस खाली जमीन से कमाने की तैयारी कर रहा है। जयपुर मे इस प्रोजेक्ट की सफलता के बाद इसे जोधपुर, उदयपुर और अन्य बड़ी सेंट्रल जेलों के परिसर मे भी खोला जाना है।

भाग नहीं जाएं बंदी, इसे लेकर तैयारी कर रहा जेल विभाग
जेल अफसरों का कहना है कि चुनौती यह नहीं कि जेल परिसर में कोई कॉर्मिशियल एक्ट हो रहा है, उल्टे चुनौती है कि इस एक्ट का हिस्सा जेल के बंदी होंगे। अफसरों का कहना है कि उन्हीं बंदियों को पंप पर काम करने का मौका मिलेगा जिनका व्यवहार जेल की सलाखों के पीछे भी पूरी तरह से अनुशासित है। जो पढ़े लिखें हैं और हिसाब कर सकते हैं। बंदियों की सुरक्षा के लिए जेल के कुछ गार्डों की ड्यूटी भी पैट्रोल पंप पर लगाई जानी है। ताकि बंदियों पर नजर रखी जा सके। गौतरलब है कि कई सालों से जयपुर सेंट्रल जेल को अन्य जगहों पर शिफ्ट कर इस जमीन का व्यावसायिक लाभ लेने की सरकार योजना बना रही थी। लेकिन जेल के लिए शहर में इतनी बड़ी जगह नहीं मिल सकी, उसके बाद जेल को दूसरी जगह पर शिफ्ट करने का विचार त्याग दिया गया। अब जेल के खाली हिस्सों को लगातार व्यवसायिक यूज में लिया जा रहा है। शहर के बीचों बीच खाली जगह होने के कारण जेल अफसरों और सरकार के पास लगातार क्वायरीज भी आ रहीं है।

JAYANT SHARMA Desk
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