हमारे किए की कीमत चुका रहीं मछलियां

हमारे किए की कीमत  चुका रहीं मछलियां

Kiran Kaur | Publish: Sep, 07 2018 04:04:22 PM (IST) Jaipur, Rajasthan, India

पर्यावरण प्रदूषण अपने चरम पर है और जल, वायु व भूमि सभी इससे प्रभावित हो रहे हैं।

धरती की खूबसूरती को छीनने में मानवीय गतिविधियां सबसे ज्यादा जिम्मेदार हैं और विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इन पर रोक नहीं लगाई गई तो पृथ्वी के विनाश का दिन अनुमानों से कहीं अधिक निकट होगा। हाल में किए गए एक सर्वेक्षण में पाया गया है कि दुनिया में सबसे कम प्रदूषित माने जाने वाले लाल सागर पर भी अब प्रदूषण का खतरा मंडराने लगा है और इसी का ही परिणाम है कि यहां की छह में से एक मछली की आंतों में माइक्रोप्लास्टिक पाई गई है। इसका मतलब है कि लाल सागर में भी मछलियां उतनी ही प्लास्टिक निगल रही हैं, जितनी कि दुनिया भर के अन्य समुद्रों की मछलियां। विश्व के तमाम सागरों की सतह और भीतर मौजूद प्लास्टिक लगातार जलीय जीवों की विनाश की कहानियां लिखती जा रही है।
वै ज्ञानिकों का कहना है कि यह केवल मछलियों के लिए ही नहीं, बल्कि उन लोगों की सेहत के लिए भी खतरनाक है, जो अपनी डाइट में सी फूड को शामिल करते हैं। महासागरों में पहुंचने वाले प्लास्टिक के बड़े टुकड़े छोटे-छोटे हिस्सों में टूटकर मछली की आंतों में पहुंचकर खाद्य शृंखला को प्रभावित करते हैं और अंगों की क्षति का कारण बनते हैं। सऊदी अरब में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के किंग अब्दुल्ला विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने चार लाल सागर निवासों से 26 प्रजातियों से संबंधित 178 मछलियों को एकत्रित कर यह पता लगाया है कि यह सागर भी अब मछलियों के लिए सुकून भरा आशियाना नहीं रह गया है। अभी तक यह माना जाता था कि दुनिया के अन्य सागरों की तुलना में लाल सागर मछलियों के लिए एक प्रदूषण रहित परिवेश है।
लाल सागर में प्लास्टिक का पता लगाने के लिए विशेषज्ञों ने मानवरहित एरियल व्हीकल (यूएवी) और मशीन का प्रयोग किया। ऐसा इसलिए किया गया ताकि लाल सागर के बड़े क्षेत्र में फैले प्लास्टिक का गहराई से पता चल सके।
शोध में शामिल विशेषज्ञों के अनुसार हर साल टनों कचरा समुद्र में जाकर मिलता है लेकिन हमें यह मालूम नहीं कि उसका अंत कहां पर होता है। इसलिए यूएवी तकनीक महासागरों में प्लास्टिक को स्कैन करने के लिए पुरानी तकनीकों से 40 गुना ज्यादा तेज है। तकनीक की मदद से 10 मीटर की ऊंचाई से लिए गए चित्र लगभग 62 फीसदी तक सटीक होते हैं। कम्प्यूटर से जुड़ी यह मशीन प्लास्टिक के कणों को ऑटोमेटिकली डिटेक्ट करने के अलावा अलग-अलग प्रकार के प्लास्टिक का भी पता लगाने में सक्षम है।

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