राजस्थान में पांच और बजरी खानों को मिलेगी खनन मंजूरी, पर्यावरण एनओसी की प्रक्रिया चल रही अंतिम चरण में

प्रदेश में साढ़े तीन साल के इंतजार के बाद बजरी खनन के लिए लीजधारकों को पट्टे देने की प्रक्रिया शुरू हो सकी है। 3 लीजों को राज्य सरकार एक दिन पहले बजरी खनन के लिए पट्टे दे चुकी है।

By: Kamlesh Sharma

Published: 28 May 2021, 03:26 PM IST

जयपुर। प्रदेश में साढ़े तीन साल के इंतजार के बाद बजरी खनन के लिए लीजधारकों को पट्टे देने की प्रक्रिया शुरू हो सकी है। 3 लीजों को राज्य सरकार एक दिन पहले बजरी खनन के लिए पट्टे दे चुकी है। अब 5 और लीजों को पट्टे देने के लिए पर्यावरण अनापत्ति प्रमाण पत्र लाने की प्रक्रिया तेज हो गई है। पांच लीजों को 3 माह में पर्यावरण अनापत्ति प्रमाण पत्र मिल सकता है। उसके बाद इन खानों को भी राज्य सरकार पट्टे जारी करेगी।
खान एवं भू विज्ञान विभाग ने जिन तीन बजरी लीजों को गुरुवार को पट्टे जारी किए हैं। उन्हें अक्टूबर 2020 में ही केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय एनओसी जारी कर चुका था। राज्य सरकार आठ माह तक स्टडी में ही लगी रही।

ये पांच बजरी लीज और कतार में
सूत्रों के मुताबिक पांच लीजों के और पर्यावरण अनापत्ति प्रमाण पत्र अगले दो माह में केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय से मिल सकते हैं। इनमें अजमेर के मसूदा, झालावाड़ के गंगधार, झुंझुनूं, पाली के रायपुर और टोंक के निवाई क्षेत्र की खान है। इन खानों को दो-तीन माह में चालू कर दिया जाता है तो प्रदेश में मांग के मुकाबले 30 फीसदी तक बजरी उपलब्ध हो सकेगी।

इन पांच खानों एनओसी मिले पर मामला कोर्ट में
सूत्रों के मुताबिक इनके अतिरिक्त पांच खानों के पर्यावरण अनापत्ति प्रमाण पत्र मिल चुके हैं। उनमें दो लीज भीलवाड़ा और तीन लीज देवली, नाथद्वारा और राजसमंद की हैं। बताया जा रहा है कि भीलवाड़ा की दो लीज एलओआइ आने से पहले ही खान विभाग निरस्त कर चुका था। वहीं तीन लीजें निर्धारित समय में पर्यावरण एनओसी नहीं लाने पर लैप्स की जा चुकी थी। अब इन पांचों लीजों में से दो का मामला राजस्थान हाइकोर्ट और तीन का सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है।

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