कॉलगर्ल का झांसा देकर सैकड़ों से ठगे 5 से 40 हजार


- करणी विहार पुलिस की कार्रवाई, सात गिरफ्तार, मुख्य सरगना फरार, 50 मोबाइल सिम भी बरामद


- गिरोह में शामिल 100 से अधिक लड़कें

जयपुर. एस्कॉर्ट सर्विस के नाम पर सैकड़ों लोगों से ठगी करने वाले गिरोह को करणी विहार थाना पुलिसने पकड़ा है। वेबसाइट पर विज्ञापन देकर लोगों को झांसे में लेते थे और कॉल गर्ल उपलब्ध करवाने के नाम पर 5 से 40 हजार रुपए वसूलते थे। रुपए मिलने के बाद बुकिंग करने वाले के मोबाइल नंबर ब्लॉक कर देते और कॉल गर्ल भी उपलब्ध नहीं करवाते थे।


मामले में पुलिस ने नावां हाल रावणगेट निवासी महेन्द्र कुमार (19), रामनिवास (20), नावां हाल गोविंदपुरा निवासी सूरजमल नेटवाल (36), कैलाश जाट (24) और बंशीलाल (19), कांगड़ा हिमाचल प्रदेश हाल श्याम नगर निवासी त्रिलोकनाथ (25), अजीतगढ़ हाल श्याम नगर निवासी दीपक कुमार (27) को गिरफ्तार किया है। पुलिस उपायुक्त पश्चिम कावेन्द्र सागर ने बताया कि कुछ दिनों पहले मुखबिर से सूचना मिली थी कि कुछ लोग एस्कॉर्ट सर्विस के नाम पर लोगों से ठगी कर रहे हैं। आरोपियों के मिले मोबाइल नंबरों के आधार पर उन्हें ट्रेक कर पकड़ा गया। यह लोगों को वाट्सऐप पर लड़की की फोटो भेजते और फिर उनसे अग्रिम भुगतान और पूर्ण राशि ऑनलाइन लेते थे। राशि कम होने और बेइज्जती के कारण लोग इनके विरुद्ध मामला दर्ज नहीं करवाते हैं। किसी पीडि़त की सूचना पर ही पुलिस ने गिरोह का पर्दाफाश किया।


मुख्य सरगना फरार


जांच में सामने आया कि जोबनेर निवासी कानाराम जाट गिरोह चलाता है। उसने 100 से अधिक लड़कों को इस काम में लगा रखा है। कई शहरों में उसने नेटवर्क चला रखा है। वह खुद ही युवकों को मोबाइल सिम देता था और उसी से संपर्क करवाता था। पूछताछ में सामने आया कि देश में 2000 से ज्यादा लोगों के साथ ठगी की जा चुकी है। गिरफ्तार आरोपियों के पास से 50 से अधिक विभिन्न कंपनियों की मोबाइल सिम भी बरामद की है।


फर्जी स्टाम्प दिखाकर दिलाते विश्वास


थानाधिकारी पन्नालाल ने बताया कि कानाराम ने सिंगापुर व शंघाई की एस्कॉर्ट सर्विस की दो वेबसाइट पर विज्ञापन देता था। इन वेबसाइट्स पर स्पा, मसाज एवं कॉल गर्ल की ऑनलाइन सर्विस दी जाती है। उसपर लड़की की फोटो लगाकर के अपने साथियों के मोबाइल नंबर लिखता था। राजस्थान सहित देश के 32 शहरों में लड़कियां सप्लाई करने का विज्ञापन देता था। उसे देखकर लोग फोन करते तो वाट्स ऐप पर अलग-अलग फोटो भेजकर झांसा दिया जाता था। ग्राहक को विश्वास में लेकर के एक फर्जी स्टाम्प की फोटो भी भेजता जिसमें लिखा होता था कि भारत सरकार की ओर मान्यता प्राप्त एस्कॉर्ट सर्विस।


10 हजार रुपए और कमिशन मिलता


आरोपी कानाराम इन्हें फर्जी सिम देता था, जिस पर ग्राहकों के फोन आते थे। आरोपियों को वह 10 हजार रुपए महीना एवं ठगी में से कुछ कमिशन दिया करता था। ग्राहकों से 5 से 40 हजार रुपए रकम वसूली जाती थी। खासबात यह थी कि यह अलग-अलग राज्यों के लोगों से ठगी करते थे। ग्राहकों से सौदे की रकम भी ऑनलाइन ही लेते थे। जोकि सीधे कानाराम के पास जाती थी।

Devendra Sharma
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