scriptFree dress for 60 lakh children trapped in government inaction | Gehlot Government: सरकारी अकर्मणता में फंस गई 60 लाख बच्चों की नि:शुल्क ड्रेस | Patrika News

Gehlot Government: सरकारी अकर्मणता में फंस गई 60 लाख बच्चों की नि:शुल्क ड्रेस

प्रदेश के कक्षा एक से आठवीं तक के सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों को नि:शुल्क यूनिफॉर्म देने की घोषणा कर सरकार भूल चुकी है। 60 लाख विद्यार्थियों को घोषणा के डेढ़ साल बाद भी यूनिफॉर्म का इंतजार है।

जयपुर

Published: May 22, 2022 05:27:53 pm

प्रदेश के कक्षा एक से आठवीं तक के सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों को नि:शुल्क यूनिफॉर्म देने की घोषणा कर सरकार भूल चुकी है। 60 लाख विद्यार्थियों को घोषणा के डेढ़ साल बाद भी यूनिफॉर्म का इंतजार है।
Singrauli: 70 percent children without uniform school
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सरकार ने पिछले सत्र में सभी के बैंक खातों की जानकारी जुटाई थी, लेकिन अभी तक न खातों में पैसा आया और न ही बच्चों को गणवेश मिल सका है। अगले महीने से नया शैक्षिक सत्र शुरू होना है। अभी भी शिक्षा विभाग की कोई तैयारी नजर नहीं आ रही है।
विडंबना तो यह है कि लगभग डेढ़ साल बाद भी सरकार यह तय नहीं कर सकी कि बच्चों के खातों में पैसा डाला जाए या खुद सरकार बच्चों को ड्रेस उपलब्ध कराए। देश के जिन राज्यों में नि:शुल्क ड्रेस की व्यवस्था लागू है, वहां का भी सरकार अध्ययन करवा चुकी है।
इधर, शिक्षक संगठनों का कहना है कि प्रदेश में अगले महीने से नामांकन अभियान भी शुरू होना है। ऐसे में वह कैसे नामांकन बढ़ाएंगे। हालांकि सरकार ने नए सत्र से बच्चों के खातों में रुपए डालकर ड्रेस उपलब्ध कराने का दावा किया है।
इधर, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने दो दिन पहले शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में कहा था कि सरकारी स्कूलों में वर्तमान में नामांकन 98 लाख है। इसे एक करोड़ तक ले जाने का आह्मान किया।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ने वर्ष 2021 के बजट भाषण में पहली से आठवीं कक्षा तक के बच्चों को निशुल्क यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने की घोषणा की थी। तत्कालीन शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने बैठक लेकर अधिकारियों को उसी सत्र में यूनिफार्म उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए थे।

सरकार की मंशा स्पष्ट नहीं, नए सत्र में बढ़ेगी चुनौती

अभी तक सरकार की मंशा ही स्पष्ट नहीं है। सरकार खुद खरीदकर ड्रेस देने का निर्णय अब लेती है तो भी तीन से चार महीने में स्कूलों तक ड्रेस पहुंच सकेगी। सरकार विद्यार्थियों को पैसा देती है तो बाजार में अभी माल नहीं है। सरकार को समय रहते निर्णय ले लेना चाहिए।
विमल सर्राफ, यूनिफॉर्म मैन्युफैक्चर एण्ड सप्लाई एसोसिएशन ऑफ राजस्थान

सरकार महंगाई को देखते हुए बढ़ाए बजट

सरकार ने जल्दबाजी में बच्चों को ड्रेस उपलब्ध कराने की घोषणा कर दी। पिछले साल विद्यार्थी रोजाना ड्रेस के बारे में पूछते रहे लेकिन विभाग बच्चों को ड्रेस नहीं दे सका। बढ़ती महंगाई में 600 रुपए में कैसे दो जोड़ी ड्रेस आएगी। सरकार को इस राशि में बढ़ोतरी करनी चाहिए।
सुनील राणा, अभिभावक, सीकर

मनमर्जी से तय नहीं हो रंग, जनता की राय जरूरी

प्रदेश में जो भी सरकार आती है वह अपनी मर्जी से बच्चों पर स्कूल की ड्रेस का रंग थोप देती है। जबकि इसमें शिक्षक संगठनों के साथ प्रदेश की जनता की राय ली जानी चाहिए। ड्रेस के कलर का बच्चों पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ता है।
उपेन्द्र शर्मा, प्रदेश महामंत्री, शिक्षक संघ शेखावत

चाहिए चार करोड़ मीटर कपड़ा

पिछले दिनों यूनिफॉर्म का रंग भी तय कर दिया था, लेकिन यूनिफॉर्म कारोबारी अभी कपड़ा लेकर नहीं आ रहे हैं। वजह यह कि सरकार ने यह तय नहीं किया कि वे बच्चों को पैसे देंगे या ड्रेस। प्रदेश के 60 लाख विद्यार्थियों के लिए लगभग चार करोड़ मीटर कपड़े की आवश्यकता है। कपड़ा बनाने वाले कंपनियों ने भी सरकारी फैसले के इंतजार में कपड़ा तैयार नहीं कराया है। बाजार में कपड़ा आने में भी 40 से 60 दिन का समय लगेगा।
600 रुपए में कैसे मिलेगी दो ड्रेस

राज्य सरकार की ओर से पिछले दिनों यूनिफॉर्म को लेकर जारी निविदा में 600 रुपए में दो यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने की शर्त थी। ज्यादातर कारोबारियों ने इस शर्त की वजह से निविदा से दूरी बना ली थी। इसके बाद शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने कई कंपनियों के प्रतिनिधियों से वार्ता की, लेकिन ज्यादातर कंपनियों का कहना था कि महंगाई के इस दौर में 600 रुपए में कपड़ा ही नहीं आता, सिलाई कहां से कराएंगे।
नई ड्रेस के रंग पर भी विरोध

प्रस्तावित ड्रेस का रंग पिछले साल ही सरकार ने तय कर दिया था। इस दौरान एक समाज के विधायकों व संगठन पदाधिकारियों की मांग पर सीएम ने इसके रंग को लेकर समीक्षा कराने की बात कही थी।
अभिभावकों में गुस्सा, हर सरकार थोपती है

इस फैसले को लेकर अभिभावकों में भी रोष है। उनका कहना है कि भाजपा राज में भी सरकारी स्कूलों की ड्रेस बदली गई। कांग्रेस ने सत्ता में आने के बाद फिर से बदल दिया।
इस सत्र में मिलेगी बच्चों को ड्रेस

नि:शुल्क गणवेश उपलब्ध कराने की योजना प्रक्रियाधीन है। पिछले साल कई कारणों से गणवेश उपलब्ध नहीं करवा सके। इस सत्र में विद्यार्थियों को निश्चित तौर पर गणवेश उपलब्ध करवाई जाएगी। विद्यार्थियों के खाता नंबर की जानकारी विभाग जुटा चुका है।रामचंद पिलानियां, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी, सीकर
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Anand Mani Tripathi

आनंद मणि त्रिपाठी (@aanandmani) राजनीति, अपराध, विदेश, रक्षा एवं सामरिक मामलों के पत्रकार हैं। पत्रकारिता के तीनों माध्यम प्रिंट, टीवी और आनलाइन में गहरा और अपनी तेज तर्रार रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। पश्चिम बंगाल के कलकत्ता में जन्म हुआ। प्रारंभिक शिक्षा उत्तर प्रदेश के कानपुर और बस्ती में हुई। माध्यमिक शिक्षा नवोदय विद्यालय बस्ती, फैजाबाद और पूर्वोत्तर त्रिपुरा के धलाई जिले में हुई। अयोध्या के साकेत महाविद्यालय से स्नातक और 2009 में जेआईआईएमसी,दिल्ली से पत्रकारिता का डिप्लोमा किया। हरियाणा से पत्रकारिता आरंभ की। शिक्षा, विज्ञान, मौसम, रेलवे, प्रशासन, कृषि विभाग और मंत्रालय की रिपोर्टिंग की। इंवेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग से शिक्षा और रेलवे विभाग के कई भ्रष्टाचार का खुलासा किया। रक्षा मंत्रालय के रक्षा संवाददाता पाठयक्रम-2016 पूरा किया। इसके बाद रक्षा मामलों की पत्रकारिता शुरू कर दी। चीन, पाकिस्तान और कश्मीर मामलों पर तीक्ष्ण नजर रहती है। लेफ्टिनेंट उमर फैयाज की हत्या 2017, राइफलमैन औरंगजेब की हत्या 2018, जम्मू—कश्मीर में बदले 2018 में बदले राजनीतिक समीकरण, पुलवामा हमला 2019, कश्मीर से 370 का हटना, गलवान घाटी मुठभेड़ 2020 को बेहद करीब से जम्मू और कश्मीर में रहकर ही कवर किया। कोरोना काल 2020 में भी लददाख से नेपाल तक की यात्रा चीन के बदलते समीकरण को लेकर की। इसके साथ ही लोकसभा चुनाव 2019 में जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और पंजाब की रिपोर्टिंग की। 9 नवंबर 2019 को श्रीराम जन्म भूमि अयोध्या मामले में आए फैसले की अयोध्या से कवर किया। 2022 उत्तरप्रदेश् चुनाव को सहारनपुर से सोनभद्र तक मोटर साइकिल के माध्यम से कवर किया। पत्रकारिता से इतर आनंद मणि त्रिपाठी को संगीत और पर्यटन का जबरदस्त शौक है। इन्हें किसी भी कार्य में असंभव शब्द न प्रयोग करने के लिए जाना जाता है...

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