निशुल्क दवा योजना में कैंसर की दवाएं बंद करना दुर्भाग्यपूर्ण-सराफ

पूर्व चिकित्सा मंत्री एवं विधायक कालीचरण सराफ ने मुफ्त दवा योजना में कैंसर की दवाएं बंद किए जाने पर नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि आरएमएससीएल द्वारा दवा टेण्डर प्रोसेस को पूरा नहीं करने की हठधर्मिता के चलते मुफ्त दवाएं नहीं मिलने से राज्य के हजारों कैंसर मरीजों की जान खतरे में पड़ गई है।

By: Umesh Sharma

Published: 09 Apr 2021, 08:34 PM IST

जयपुर।

पूर्व चिकित्सा मंत्री एवं विधायक कालीचरण सराफ ने मुफ्त दवा योजना में कैंसर की दवाएं बंद किए जाने पर नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि आरएमएससीएल द्वारा दवा टेण्डर प्रोसेस को पूरा नहीं करने की हठधर्मिता के चलते मुफ्त दवाएं नहीं मिलने से राज्य के हजारों कैंसर मरीजों की जान खतरे में पड़ गई है और इस मामले में सरकार की गहरी उदासीनता आश्चर्यजनक तथा दुर्भाग्यपूर्ण है।

सराफ ने कहा कि भामाशाह योजना के तहत कैंसर मरीजों को सभी तरह की महंगी दवाएं मुफ्त मिल रही थी, लेकिन 31 जनवरी 2021 से इन दवाओं को बंद कर दिया गया है, जिससे ब्लड और बोन कैंसर आदि के इलाज में काम आने वाली महंगी दवाएं मरीजों को बाजार से खरीदनी पड़ रही हैं। इन दवाओं हर महीने 8 हजार से 78 हजार तक का खर्च आता है। कैंसर के इलाज में काम आने वाली मुख्य दवाओं नीलोटीबीन पर 8 से 10, डेसाटीनिब पर 10 से 12, एबिराटेरोन पर 9 से 10, सेराफेनिब पर 8 से 10 तथा अल्ट्रोम्बोपेग पर 35 से 40 हजार का औसतन खर्च आता है। प्रतिमाह इतनी महंगी दवाओं का खर्च वहन नहीं कर सकने वाले कैंसर मरीज लाचारी में जीने को मजबूर हैं।

सराफ ने कहा कि सरकार आमजन के साथ होने का दावा तो करती है लेकिन महंगे इलाज का खर्च उठाने में लाचार कैंसर मरीजों को मुफ्त दवा उपलब्ध करवाने के प्रति कतई गंभीर नहीं है। अपने कुप्रबंधन व अनियमितताओं के लिए चर्चाओं में रहने वाले आरएमएससीएल ने सात महीने पहले टेण्डर तो किया परन्तु उसके बाद प्रक्रिया को रोक दिया गया, जिससे जयपुर, जोधपुर, कोटा, अजमेर व उदयपुर जैसे बड़े सेंटर्स पर भी कैंसर मरीजों को निशुल्क दवा उपलब्ध नहीं हो पा रही है।

Umesh Sharma Reporting
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