Purnima व्यापार वृद्धि के लिए जरूर करें गणेशजी की यह सरल पूजा, बुधदेव की प्रसन्नता से जल्द मिलेगा फल, जानें यह खास वजह

माह के शुक्ल पक्ष की अन्तिम तिथि को पूर्णिमा कहा जाता है। इस दिन चन्द्रमा पूरी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है। इसलिए इसे पौर्णमासी भी कहा जाता है। पूर्णिमा तिथि को चन्द्रमा पूर्ण प्रकाशमान होता है और इस दिन चंद्रदेव की उपासना पूर्ण फल प्रदान करती है।

By: deepak deewan

Published: 30 Dec 2020, 10:06 AM IST

जयपुर. माह के शुक्ल पक्ष की अन्तिम तिथि को पूर्णिमा कहा जाता है। इस दिन चन्द्रमा पूरी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है। इसलिए इसे पौर्णमासी भी कहा जाता है। पूर्णिमा तिथि को चन्द्रमा पूर्ण प्रकाशमान होता है और इस दिन चंद्रदेव की उपासना पूर्ण फल प्रदान करती है। ज्योतिषाचार्य पंडित एमकुमार शर्मा के अनुसार पूर्णिमा को सूर्य और चन्द्रमा ठीक सामने होते हैं। दोनों की एक-दूसरे पर पूर्ण दृष्टि होती है जिससे शुभ फल मिलते हैं।

30 दिसंबर को उदया तिथि पूर्णिमा है अर्थात सूर्यादय के समय पूर्णिमा तिथि है. आज मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा सुबह 8 बजकर 58 मिनट तक ही रहेगी उसके बाद प्रतिपदा तिथि लग जाएगी लेकिन उदया तिथि होने से स्नानदान पूर्णिमा मनाई जा रही है। मार्गशीर्ष माह अथवा अगहन माह की यह पूर्णिमा बहुत फलदायी मानी जाती है पर आज एक अनूठा संयोग भी बना है जिससे इसका महत्व बढ़ गया है. आज बुधवार है जोकि बुधदेव का दिन है। खासबात यह है कि बुध देव का जन्म पूर्णिमा के ही दिन हुआ था।

धार्मिक और ज्योतिष ग्रंथों के अनुसार चन्द्रमा को पूर्णिमा तिथि पर ही तारा के गर्भ से पुत्र की प्राप्ति हुई थी जिसे बाद में बुध के रूप में जाना गया। यही कारण है कि पूर्णिमा उन्हें बहुत प्रिय है। बुधवार के दिन पूर्णिमा का यह संयोग सबसे ज्यादा व्यापारियों के लिए लाभदायक साबित हो सकता है। व्यापार के कारक देव बुध देव हैं और गणेशजी की पूजा से प्रसन्न होते हैं जबकि चंद्रमा आर्थिक उन्नति, संपन्नता आदि के कारक हैं। ऐसे में व्यापार वृद्धि के लिए आज गणेशजी और चंद्रमा की पूजा जरूर करना चाहिए.

ज्योतिषाचार्य पंडित जीके मिश्र बताते हैं कि पूर्णिमा को प्रातः स्नानादि से निवृत्त होकर सूर्यदेव को जल अर्पित कर शिवजी का ध्यान करते हुए पूजा का संकल्प ले। गणेशजी की विधिपूर्वक पूजा करें और उनके सरल मंत्र ओम गं ओम का अधिक से अधिक जाप करें. गणेश अर्थवशीर्ष का पाठ करें. चन्द्रोदय होने पर चन्द्रमा को अर्घ्य प्रदान करें और फिर अक्षत, श्वेत पुष्प, आदि से चंद्रदेव की विधिवत् पूजा करे। गणेशजी, बुध देव और चंद्रदेव के समक्ष व्यापार वृद्धि की प्रार्थना करें।

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