कल जीत के अवसर बनेंगे

कोरोना में हताश और निराश हुए लोगों में जोश और जज्बा भरने वाली एक रचना

By: Chand Sheikh

Published: 22 May 2020, 03:18 PM IST

गीत

राम चरण राग

आज हारे हैं मगर कल जीत के अवसर बनेंगे
विश्व हित विषपान कर हम, फिर नए शंकर बनेंगे

हम व्यवस्था के छलों से हार मानेंगे कभी क्या?
पर्वतों - नदियों से डरकर पार जाएंगे नहीं क्या ?
हम युगों - कल्पान्तरों से सभ्यता को श्वांस देते
हम सुमंगलमय हठों को जीत का विश्वास देते
इन हठों से देखना फिर प्रगति - पथ सुन्दर बनेंगे
आज हारे हैं मगर कल जीत के अवसर बनेंगे

हैं मनुज कुछ देवता जिनके भरोसे चल दिए हैं
वोट के आराधकों ने तो सतत् बस छल किए हैं
मील के इन पत्थरों को देखकर हम कब चले हैं
क्या बिगाड़ेगा कोरोना, काल के घर हम पले हैं
पांव के छाले हमारी प्रेरणा सत्वर बनेंगे
आज हारे हैं मगर कल जीत के अवसर बनेंगे

और माथे का पसीना झिालमिलाएगा किसी दिन
धान खेतों में खुशी का लहलहाएगा किसी दिन
भूख क्या रस्ता हमारा रोक पाएगी डगर में
हम नहीं जो बैठ जाएं मौत से डरकर सफर में
अनगिनत दुख के सवालों के हमीं उत्तर बनेंगे
आज हारे हैं मगर कल जीत अवसर के अवसर बनेंगे

प्रश्न है - 'इतिहास भी क्या दुख हमारा लिख सकेगा?'
'जो सहा है आज तक , क्या और कोई सह सकेगा?'
इस सकल संसार में सुख का सृजन हमने किया है
किन्तु सुख के साधनों का भोग कब हमने किया है
सब शिकायत छोड़ , हम ही रोज रत्नाकर बनेंगे
आज हारे हैं मगर कल जीत के अवसर बनेंगे

है हमें विश्वास इक दिन फिर नया सूरज उगेगा
पर्वतों की चोटियों पर ज्योति का कलसा सजेगा
पुण्यसलिला हो नदी, पावन - पवन, उन्मुक्त नभचर
मनुजता के सूत्र में संसार होगा प्रीत सहचर
रंग हर त्योहार के उत्साह के सागर बनेंगे
आज हारे हैं मगर कल जीत के अवसर बनेंगे
राम चरण राग, अलवर

कवि हिंदी के व्याख्याता हैं

Chand Sheikh Desk
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