रिटायर्ड नौकरशाहों को पावरफुल राजनीतिक नियुक्तियों का तोहफा, कांग्रेस कार्यकर्ताओं से परहेज

-एक दर्जन से ज्यादा रिटायर्ड आईएएस-आईपीएस को राजनीतिक नियुक्तियों का तोहफा दे चुकी है गहलोत सरकार, जिन कार्यकर्ताओं के दम पर सरकार बनी, वो ढाई साल कर रहे राजनीतिक नियुक्तियों का इंतजार, प्रदेश प्रभारी अजय माकन के समक्ष भी उठ चुका है नौकरशाहों को राजनीतिक नियुक्तियां देने का मामला

By: firoz shaifi

Updated: 09 May 2021, 09:34 AM IST

फिरोज सैफी/जयपुर।
प्रदेश में जिन कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं के दम पर राजस्थान में गहलोत सरकार बनी हैं, अब उन्हीं कार्यकर्ताओं और नेताओं की सरकार में पूरी तरह से अनदेखी की जा रही है। इनाम के तौर पर जिन कार्यकर्ताओं- नेताओं को राजनीतिक नियुक्तियों से नवाजना चाहिए था उन कार्यकर्ताओं की बजाए गहलोत सरकार पूरी तरह से रिटायर्ड नौकरशाहों को राजनीतिक नियुक्तियों से नवाज रही है।

बीते ढाई साल में गहलोत सरकार ने एक दर्जन से ज्यादा रिटायर्ड नौकरशाहों को राजनीतिक नियुक्तियों में पावरफुल पद चुकी हैं, इनमें कई नौकरशाह तो ऐसे रहे हैं जिन्हें रिटायरमेंट होते ही राजनीतिक नियुक्तियों से नवाजा गया है। रिटायर्ड नौकरशाहों में 10 आईएएस और 3 आईपीएस अधिकारी रह चुके हैं।

सरकार का साथ देने वाले विधायक भी दरकिनार
वहीं दूसरी ओर सबसे दिलचस्प बात तो यह है कि सियासी संकट के दौरान सरकार का साथ देने वाले विधायकों को भी राजनीतिक नियुक्तियों में दरकिनार करके रिटायर्ड नौकरशाहों को उन पर वरीयता दी जा रही है, जबकि सियासी संकट के दौरान सरकार का साथ देने वाले विधायकों को बाड़ाबंदी के दौरान राजनीतिक नियुक्तियों एडजस्ट करने के आश्वासन दिए गए थे। अब कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ-साथ विधायक भी अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे हैं और कई बार अंदर खाने नाराजगी भी दर्ज करा चुके हैं।

माकन के सामने उठ चुका है मामला
पावरफुल राजनीतिक नियुक्तियों में रिटायर्ड नौकरशाहों को तवज्जो देने का मामला प्रदेश प्रभारी अजय माकन के समक्ष भी उठ चुका है। कांग्रेस के एक धड़े ने माकन के समक्ष नौकरशाह को तवज्जो देने पर जोरदार आपत्ति की थी जिस पर माकन ने मुख्यमंत्री गहलोत से बात करने की बात कही थी।

मुख्यमंत्री की कार्यप्रणाली से नाराज हैं कार्यकर्ता
कांग्रेस के सियासी गलियारों में इन दिनों मुख्यमंत्री गहलोत की कार्य प्रणाली को लेकर खासी चर्चा है। मुख्यमंत्री की कार्यप्रणाली को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ता ओं में अब नाराजगी खुलकर सामने आने लगी। कांग्रेस के सियासी गलियारों में चर्चा इस बात की है कि विपक्ष में रहते 5 साल जी-तोड़ मेहनत कार्यकर्ताओं से कराई जाती है और सत्ता में आने के बाद इनाम उन लोगों को दिया जाता है जो पार्टी के प्राथमिक सदस्य भी नहीं होते।

कांग्रेस में योग्य लोगों की भरमार
वही दूसरी ओर नौकरशाहों को राजनीतिक नियुक्तियों में एडजस्ट करने को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ता कहना है कि कांग्रेस पार्टी में भी योग्य लोगों की भरमार है जो आयोग और बोर्डों में बेहतर तरीके से काम कर सकते हैं लेकिन गहलोत सरकार अपने ही कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर रिटायर्ड नौकरशाहों को राजनीतिक नियुक्तियों को तोहफा देने में लगी है। ऐसे में 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव में भी गहलोत सरकार को कार्यकर्ताओं की बजाए जनता के बीच वोट मांगने के लिए रिटायर्ड नौकरशाहों को भेजना चाहिए।

मौजूदा मुख्य सचिव की पत्नी को भी राजनीतिक नियुक्ति
गहलोत सरकार ने जहां रिटायर्ड नौकरशाह को राजनीतिक नियुक्तियां देने में कोई कसर नहीं छोड़ी है तो वही वर्तमान मुख्य सचिव निरंजन आर्य को भी खुश करने का प्रयास किया गया है। सरकार ने निरंजन आर्य की पत्नी संगीता आर्य को राजस्थान लोक सेवा आयोग में सदस्य बनाया हुआ है। हालांकि संगीता आर्य पीसीसी मेंबर रही हैं।

इन रिटायर्ड आइएएस को राजनीतिक नियुक्तियां
-बीएन शर्मा----- चेयरमैन विद्युत विनियामक आयोग
- डीबी गुप्ता------मुख्य सूचना आय़ुक्त
- एनसी गोयल----- चेयरमैन, रेरा
-प्रेम सिंह मेहरा---- आयुक्त, निर्वाचन आयोग
-गोविंद शर्मा-------- सीएम के सलाहकार
-रामलुभाया----------चेयरमैन जवाबदेही कानून कमेटी
- अरविंद मायाराम------ उपाध्यक्ष, सीएम आर्थिक सलाहकार परिषद
-जी.एस. संधू----------- चेयरमैन, पट्टा वितरण अभियान की आय कमेटी
- जगरूप सिंह--------------- सदस्य़, सिविल सेवा अपील अधिकरण
-मातादीन शर्मा--------------सदस्य़, सिविल सेवा अपील अधिकरण
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इन रिटायर्ड आईपीएस को राजनीतिक नियुक्तियां
-भूपेंद्र सिंह यादव-------- चेयरमैन, राजस्थान लोक सेवा आयोग
-हरिप्रसाद शर्मा----------- चेयरमैन, राज्य कर्मचारी चयन बोर्ड
- आलोक त्रिपाठी----------- वीसी, सरदार पटेल पुलिस विश्वविद्यालय

firoz shaifi Desk
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