राजस्थान में अब इस काम के लिए PAN CARD अनिवार्यता ख़त्म, गहलोत सरकार ने उठाया कदम, पढ़ें बड़ी खबर

राजस्थान में अब इस काम के लिए PAN CARD अनिवार्यता ख़त्म, गहलोत सरकार ने उठाया कदम, पढ़ें बड़ी खबर

Nakul Devarshi | Publish: May, 19 2019 01:37:18 PM (IST) Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

राजस्थान में अब इस काम के लिए PAN CARD अनिवार्यता ख़त्म, गहलोत सरकार ने उठाया कदम, पढ़ें बड़ी खबर

जयपुर।

निर्भया फंड के 15.45 करोड़ रुपए जारी करने और पीडि़तों को 50 हजार से अधिक भुगतान के लिए पैनकार्ड की अनिवार्यता समाप्त करवाने के लिए राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (रालसा) का दबाव सफल हो गया है। वित्त विभाग ने उदारता दिखाते हुए दोनों बिन्दुओं पर प्राधिकरण की मांग मान ली है। इससे पीडि़त प्रतिकर योजना के तहत पीडि़तों को तत्काल सहायता देने में मदद मिल सकेगी।

 

राजस्थान पीडि़त प्रतिकर योजना से जुड़े बिन्दुओं पर हाल ही वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव निरंजन आर्य की अध्यक्षता में बैठक हुई थी। निर्भया फंड के 15.45 करोड़ रुपए को लेकर वित्त विभाग और रालसा में टकराव चल रहा था, जिस पर प्रमुख विधि सचिव महावीर शर्मा की मौजूदगी में अतिरिक्त मुख्य सचिव आर्य व रालसा सदस्य सचिव अशोक कुमार जैन की बैठक हुई थी। जैन ने इस दौरान पीडि़त प्रतिकर योजना के तहत चयनित पीडि़त को राशि भुगतान के लिए पैनकार्ड की अनिवार्यता खत्म करने की मांग उठाई। इस बैठक में दोनों बिन्दुओं के समाधान पर सहमति हो गई।

 

रालसा पीडि़तों के पक्ष में अड़ा रहा
बैठक में रालसा सदस्य सचिव जैन का कहना था कि अधिकांश पीडि़तों की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उनके पास पैनकार्ड नहीं होता है। इस कारण पीडि़तों को 50 हजार रुपए से अधिक का भुगतान ट्रेजरी से समय पर नहीं मिल पाता है। इस कारण पैन कार्ड की अनिवार्यता समाप्त की जाए। इसके अलावा यह भी मांग की कि केन्द्र सरकार द्वारा निर्भया फंड के तहत दिए गए 15.45 करोड़ रुपए विधिक सेवा प्राधिकरण के खाते में दिलाए जाएं, जिससे पुराना सिस्टम बदलकर प्राधिकरण तत्काल चेक से बैंक खाते के जरिए पीडि़तों को भुगतान कर सके।

 

वित्त विभाग ने यह सहमति दी
बैठक में यह सहमति हुई कि पीडि़तों को भुगतान के लिए पेनकार्ड की अनिवार्यता समाप्त की जाएगी। निर्भया फंड के तहत 2016-17 में केन्द्र सरकार से आए 15.45 करोड़ रुपए रालसा के निजी निक्षेप खाते में जमा कराने के लिए निजी निक्षेप खाते खुलवाने के प्रस्ताव वित्त विभाग को शीघ्र भिजवाए जाएंगे। निजी निक्षेप खाते से राशि केन्द्रीयकृत पूल बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी। इस राशि से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के जरिए पीडि़तों को प्रतिकर राशि दी जाएगी।

 

जैसै-जैसे राशि खर्च होगी, उसका उपयोगिता प्रमाण पत्र देकर केन्द्र सरकार से पुनर्भरण कराया जाएगा। रालसा की ओर से बैलेंसशीट व अन्य लेखों की ऑडिट तय मापदण्ड के अनुसार प्रधान महालेखाकार को पेश की जाएगी और राज्य सरकार को रिपोर्ट दी जाएगी।

 

पत्रिका ने उठाया था मुद्दा
पत्रिका ने इसी सप्ताह पीडि़त प्रतिकर स्कीम के लिए पैसे की कमी को लेकर खबर प्रकाशित की थी, जिसमें कहा था कि स्कीम ही आंसू बहा रही है पीडि़तों के आंसू कैसे पौंछे?

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