गहलोत सरकार की दूसरी वर्षगांठः आधे से ज्यादा वादे दो साल में पूरे करने का दावा

17 दिसंबर को पूरे हो रहे हैं सरकार के दो साल, जनघोषणा पत्र के आधा से ज्यादा वादे दो साल में पूरे करने का दावा, कोरोना के बीच सियासी संकट से भी जूझ कर सुरक्षित बची सरकार

By: firoz shaifi

Published: 16 Dec 2020, 11:51 AM IST

फिरोज सैफी/जयपुर।

17 दिसंबर को राज्य की अशोक गहलोत सरकार के दो साल का सफर पूरा होने जा रहा है। 17 दिसंबर 2018 को सरकार का गठन हुआ था। इन दो सालों में सरकार में कई उतार चढ़ाव भी आए, कोरोना में कुशल प्रबंधन कर अपने अनुभव और सूझबूझ का लोहा मनवाया तो वहीं कोरोना काल में ही सियासी संकट का भी सामना भी किया। दो साल में ही अपने जनघोषणा पत्र में किए गए वादों में से आधे से ज्य़ादा वादे पूरे करने का दावा भी सरकार कर रही है।

पहली कैबिनेट बैठक में बदले कई फैसले
साल 2018 के आखिरी माह में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जहां 17 दिसंबर को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी तो सरकार के मंत्रिमंडल का गठन 24 दिसंबर को हुआ था। और इसी दिन गहलोत कैबिनेट की पहली बैठक में पूर्ववर्ती वसुंधरा सरकार के कई फैसलों को पलटने का प्रस्ताव पास हुआ, साथ ही पूर्ववर्ती सरकार के कामकाज आखिरी 6 माह के कामकाज की समीक्षा के लिए कैबिनेट सब कमेटी का गठन भी हुआ।

गहलोत सरकार ने दीनदयाल उपाध्याय की फोटो सरकारी दस्तावेजों से हटाने, अटल सेवा केंद्रों का का नाम राजीव गांधी सेवा केंद्र करने, अन्नपूर्णा रसोई का नाम इंदिरा रसोई करने और भामाशाह कार्ड को बंद जनआधार कार्ड कर वसुंधरा सरकार के फैसले पलटे।


501 में से 252 वादे पूरा करने का दावा
कांग्रेस ने अपने चुनावी घोषणा पत्र को सरकार बनते ही उसे सरकारी दस्तावेज बनाकर उसे जनघोषणा पत्र का नाम दिया। गहलोत सरकार का दावा है कि 2 अक्टूबर तक उसने 501 वादों में से 252 पूरे कर दिए हैं जबकि 173 घोषणाओं को लेकर काम जारी है। सरकार के इस दो साल के कार्यकाल के दौरान ग्राम पंचायतों, नगर निगम, पंचाय़त और स्थानीय निकाय चुनावों की आचार संहिता और कोरोना संकट के कारण प्रभावित रहा।

सत्ता में आते ही किया किसानों का कर्ज माफ
गहलोत सरकार ने सत्ता संभालते ही सबसे पहले किसानों का कर्ज माफ करने का दावा किया। किसान कर्ज माफी चुनावी घोषणा पत्र के साथ ही कांग्रेस के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी का वादा भी था। साथ ही किसानों के कल्याण के लिए किसान कोष भी बनाया।

पंचायती चुनाव में न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता की शर्त हटाई
गहलोत सरकार ने पंचायक चुनाव में न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता की शर्त भी हटाई, पू्र्ववर्ती सरकार ने न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 10वीं पास होना अनिवार्य किया था। हालांकि गहलोत सरकार ने खुद के भी एक फैसले पर यू टर्न लिया था। कांग्रेस ने सत्ता में आते ही निकाय प्रमुखों और महापौर के चुनाव सीधे करने का फैसला लिया था, जिसे बाद में इसी फैसले पर सरकार को यू टर्न लेना पड़ा।

कोरोना काल में 34 दिन बाड़ाबंदी में रही सरकार
वहीं कोरोना काल के बीच ही सरकार पर आए सियासी संकट के दौरान सरकार बचाने को लेकर गहलोत सरकार को 34 दिन बाड़ाबंदी में रहना पड़ा, पहले जयपुर और उसके बाद जैसलमेर में विधायकों और मंत्रियों की बाड़ाबंदी हुई, सरकार के कामकाज भी बाड़ांबदी में निपटते रहे।

राजभवन से भी हुआ सरकार का टकराव
वहीं बाड़ाबंदी के बीच बहुमत साबित करने के लिए विधानसभा सत्र को लेकर गहलोत सरकार और राजभवन के बीच टकराव देखने को मिला, सत्र बुलाए जाने को लेकर कैबिनेट के तीन बार भेजे गए प्रस्ताव को राजभवन की ओर से लौटा देने के बाद मंत्री-विधायकों ने राजभवन में धरना देकर राजभवन पर केंद्र के इशारे पर काम करने का आरोप भी लगाया।


ये है सरकार के प्रमुख वादे जो पूरे हुए

-सरकार बनने के 10 दिनों के भीतर किसानों का ऋण माफ किया।

-20.50 लाख किसानों के 7692 करोड़ रुपए के अल्पकालीन फसली ऋण माफ किए।

28016 सीमांत एवं लघु किसानों के 290 करोड रुपए के मध्यकालीन व दीर्घकालीन कृषि ऋण माफ किए।

-वृद्ध किसानों को पेंशन उपलब्ध कराई गई

किसानों को कृषि कार्य के लिए बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करते हुए आसान दर पर गुणवत्ता युक्त बिजली उपलब्ध कराई।

-राज्य की सभी 144 मंडियों को इनाम पोर्टल से जोड़ा गया

-हस्तशिल्प और हथकरघा निदेशालय का गठन

राजीव गांधी सेवा केंद्रों कोई लाइब्रेरी से जोड़ा

-पंचायती राज चुनाव में न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता की शर्त को हटाया।

-प्रदेश में नई शिक्षा नीति बनाने की दिशा में काम


-बंद किए गए 20000 स्कूलों की समीक्षा कर नए सिरे से खोले गए

-राज्य की सभी पंचायत समितियों में बालिका छात्रावास बनाए गए

-मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा योजना में कैंसर, हृदय, सांस, गुर्दा रोग की दवाइयों को शामिल कर निःशुल्क दवाइयों की संख्या 607 से बढ़ाकर 709 की गई।

-राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के तहत 28 लाख बीपीएल के 1.17 करोड़ स्टेट बीपीएल के 29 लाख यानी कुल 1 करोड़ 74 लाख लाभार्थियों को एक मार्च 2019 से ₹1 प्रति किलोग्राम की दर से गेहूं वितरण

1114 किलोमीटर लंबाई से 330 गांवों को सड़कों से जोड़ा

राज्य की नई राजस्थान पर्यटन नीति बनीं, 100 करोड रुपए के पर्यटन विकास कोष का गठन

महिला सुरक्षा और महिला सशक्तिकरण की दिशा में राज्य में 24/ 7 महिला हेल्पलाइन

ये प्रमुख वादे अधूरे
विभागों की लंबित भर्तियों का मामला, 75 हजार भर्तियां हर साल करने का वादा, जवाबदेही कानून जैसे मामले अभी अटके पड़े हैं। इसके अलावा संविदाकर्मियों को स्थाई करना, लगभग दो लाख है है संविगा कर्मी हैं राजस्थान में।

firoz shaifi Desk
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