विवाह का अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण संशोधन विधेयक पर चौतरफा घिरी सरकार,  गहलोत बोले- 'बिल पर पुनर्विचार को तैयार'

-मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा, बिल में कोई खामी या आपत्ति है तो सरकार इस पर पुनर्विचार करने को तैयार,मुख्यमंत्री ने कहा, सभी के सुझाव लेकर बिल में संशोधन करेंगे,राज्यपाल से अपील बिल वापस भेज दें

By: firoz shaifi

Published: 11 Oct 2021, 10:18 PM IST

फिरोज सैफी/जयपुर।

राजस्थान विधानसभा में विवाह का अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण संशोधन विधेयक 2021 को पारित कराकर विपक्ष के साथ-साथ सामाजिक संगठनों के निशाने पर आई गहलोत सरकार अब इस बिल पर फिर से पुनर्विचार करने के पक्ष में है। सोमवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी इसके संकेत दिए हैं।

मुख्यमंत्री गहलोत का कहना है कि अगर बिल में कोई खामी, कमी या किसी को कोई नाराजगी है तो सरकार इस बिल पर पुनर्विचार करने को तैयार है। सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि राज्यपाल कलराज मिश्र से भी आग्रह है कि बिल को वापस भेज दे तो हम सभी के सुझाव लेकर इस बिल में फिर से संशोधन करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की पालना में लाया गया था बिल
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि हमारी सरकार सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की पालना करते हुए विवाह का अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण संशोधन विधेयक 2021 को लेकर आई थी, जिसे विधानसभा में पारित भी करवा दिया गया था लेकिन उसके बाद बिल को लेकर कई तरह की आपत्तियां सामाजिक संगठनों की ओर से आई हैं।

कहा जा रहा है कि सरकार इस बिल के जरिए बाल विवाह को बढ़ावा दे रही है, लेकिन ऐसा नहीं है, इस बिल को कानूनी रूप से जो सुप्रीम कोर्ट की राय थी उसी के निर्देशों पर लाया गया है, फिर भी अगर बिल को लेकर कोई आपत्तियां नाराजगी है तो सरकार इस पर पुनर्विचार को तैयार हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि गहलोत सरकार पहले भी बाल विवाह के खिलाफ सख्त थी और आज भी सख्त है।

भारी विरोध के बीच विधानसभा पास हुआ था बिल
हाल ही में विधानसभा सत्र के दौरान विपक्ष के भारी विरोध के बावजूद गहलोत सरकार ने ध्वनि मत से इस बिल को पारित करवाया था, जिसके बाद से ही सरकार सामाजिक संगठनों के निशाने पर आ गई थी। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने भी इस बिल को लेकर आपत्ति जताते हुए मुख्यमंत्री गहलोत को पत्र लिखकर बिल पर पुनर्विचार की मांग की थी।

राज्यपाल के यहां लटका हुआ है बिल
हालांकि विधानसभा से बिल पारित होने के बाद राजभवन भेजा गया था लेकिन राजभवन में भी बिल अभी तक लटका हुआ है, जिससे अभी तक उसे अमलीजामा नहीं पहनाय़ा गया है।

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