गूगल पर न्यूज वेबसाइट्स ब्लैकलिस्ट करने का आरोप

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट : 2000 के दशक से चल रहा है खेल, बड़े औद्योगिक घरानों की मद्द

 

By: anoop singh

Published: 19 Nov 2019, 02:05 AM IST

नई दिल्ली. अब गूगल पर न्यूज वेबसाइट्स को ब्लैकलिस्ट करने का आरोप लग रहा है। यह भी कहा जा रहा है कि इससे बड़े औद्योगिक घरानों की मदद की जा रही है।
अमरीका के वॉल स्ट्रीट जर्नल (डब्ल्यूसीजे) की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कुछ खोज परिणामों को प्रदर्शित होने से रोकने के लिए गूगल कुछ साइटों को गुप्त रूप से ब्लैकलिस्ट कर रहा है। डब्ल्यूसीजे की इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ऐसा 2000 के दशक से ही किया जा रहा है।
इधर, कुछ प्रकाशनों को भी ब्लैकलिस्ट कर गूगल ने कहा कि इसके लिए उनके पास भरपूर दस्तावेज हैं, जिससे ये पता चलता है कि ये राजनीतिक पूर्वाग्रह के संकट को बढ़ा रहे हैं। गूगल ने कुछ वेबसाइट्स को इस तरह ब्लैकलिस्ट किया है कि वे समाचार या फीचर्स में नहीं, बल्कि कार्बनिक खोजों के दौरान दिखाई दे सकते हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि गूगल ने अपने सर्च एल्गोरिथम में ऐसे परिवर्तन किए है, जो बड़े व्यासायिक घरानों का पक्ष लेते हैं और कम से कम एक मामले में ई-बे के लिए ऐसे बदलाव किए गए, जो गूगल का एक प्रमुख विज्ञापनदाता है।
गूगल ने आरोपों को नकारा
गूगल का कहना है कि किसी साइट को ब्लैकलिस्ट नहीं किया है। गूगल के पूर्व कर्मचारियों ने भी दावा किया है कि इस तरह के फैसलों में कोई राजनीतिक पूर्वाग्रह नहीं है। वाइस प्रेसिडेंट करण भाटिया ने भी दावा किया है कि इस तरह से किसी को ब्लैकलिस्ट नहीं करते।
मार्केटिंग कंपनियों को बढ़ावा
मामले के जानकारों का कहना है कि ब्लैकलिस्ट में कोई परिवर्तन दो लोगों द्वारा किया जाता है। एक वह जो परिवर्तन करे और दूसरा जो इसे अप्रूव करे। उनका कहना ये भी है कि गूगल कुछ मार्केटिंग कंपनियों को भी बढ़ावा दे रहा है।
खोज परिणामों में एल्गोरिथम परिवर्तन
इधर, डब्ल्यूसीजे की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि गूगल अपने खोज परिणामों में एल्गोरिथम परिवर्तन भी किए, जो बड़े व्यवसायियों को बढ़ावा देते हैं। गूगल के प्रवक्ता का कहना है कि किसी भी परिणाम को मैन्यूअली निर्धारित नहीं करती है।

anoop singh Desk
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