सरकार हिटलर की तर्ज पर कर रही काम : अरुंधति रॉय

जयपुर में शुरू हुए समानांतर साहित्य महोत्सव ( PLF ) में बुकर प्राइज विजेता लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता अरुंधति रॉय ( Arundhati Roy ) ने कहा कि हमारी सरकार हिटलर सरकार की तर्ज पर काम कर रही है ( Government doing work on the lines of Hitler )। ( Jaipur News )

-जयपुर समानांतर साहित्य महोत्सव में लेखिका के बेबाक बोल

-कहा, हिटलर ने सबसे पहले नागरिकता तय करना अपने हाथ में लिया था

जयपुर। जयपुर में शुरू हुए समानांतर साहित्य महोत्सव ( PLF ) में बुकर प्राइज विजेता लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता अरुंधति रॉय ( Arundhati Roy ) ने कहा कि हमारी सरकार हिटलर सरकार की तर्ज पर काम कर रही है ( Government doing work on the lines of Hitler )। ( Jaipur News ) सरकार यहां भी यही कह रही है कि वो तय करेगी कि कौन नागरिक है कौन नहीं। उन्होंने कहा कि हिटलर ने जब नाजीवाद को जर्मनी में स्थापित किया, तब उसने भी सबसे पहले नागरिकता तय करना अपने हाथ में लिया था। उसकी सरकार ने लोकतंत्र की आड़ में कहा कि वे तय करेंगे कि कौन नागरिक है या कौन नहीं। यही अब भारत में हो रहा है।

-जनता को कर रहे क्रिमिनलाइज

रॉय ने कहा कि नया कानून इस देश में लाया गया है, जिसका आधार धार्मिक है। वो एंटी नेशनल है। सरकार तय नहीं करेगी कि आप नागरिक हो या नहीं। लोकतंत्र में सरकारें नहीं, जनता सवाल करती है। लेकिन अब जनता को योजनाबद्ध तरीके से क्रिमिनलाइज किया जा रहा है, जो लिंचिंग के रूप में हमारे सामने हैं। इस माहौल से देश में कोई भी फासीवाद के विरोध की लड़ाई लडऩे लायक नहीं बचेगा।

-1990 में दो ताले खुलने से पड़े फासीवाद के बीज

अरुंधति ने कहा कि इस देश में फासीवाद के बीज 1990 को तब पड़े जब दो ताले खोले गए। एक तो विवादित ढांचे का, दूसरा बाजारवाद की दुकानदारी का। इन दोनों ने मिलकर देश को धार्मिक और बाजार के फासीवाद में धकेला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से 2014 में उनकी सरकार बनने के बाद के माहौल पर ही नहीं, 2002 के गुजरात दंगों पर भी उनसे सवाल करना होगा।

-शाहीन बाग आंदोलन को हाईजैक करने की साजिश

शाहीन बाग के आंदोलन के लिए उनका कहना है कि कोई भी आंदोलन बेकार नहीं जाता। वहीं उन्होंने मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि उन्होंने कश्मीर को खामोश कर दिया है। 200 दिनों से लोग वहां कैदी की तरह रह हैं और आप इसे लोकतंत्र कहते हैं। वहीं शाहीन बाग पर उन्होंने कहा कि अब तक यह आंदोलन गैरराजनीतिक है। इसे उन लोगों से बचाना है, जो इसे हाइजैक करना चाहते हैं। जिसे वो खुद का आंदोलन बताना चाहते हैं। इससे पहले प्रतिरोध की आवाज को बुलंद करने और बाजारवाद के विरुद्ध शुरू किए गए पीएलएफ के तीसरे संस्करण की शुरुआत शुक्रवार सुबह 10 बजे जवाहर कला केंद्र में हुई।

sanjay kaushik Incharge
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