53 के बजाए 2-3 हजार लोगों के पास बजरी कारोबार !

53 के बजाए 2-3 हजार लोगों के पास बजरी कारोबार !

rajesh walia | Publish: Feb, 15 2018 12:36:55 PM (IST) Jaipur, Rajasthan, India

बजरी कारोबार प्रदेश में मात्र 53 लोगों के पास ही है। दो से तीन हजार पट्टे देने की बात सरकार ने बजट में कही है।

जयपुर।

राज्य बजट में बजरी के छोटे पट्टे देने का ऐलान कर चुकी राज्य सरकार की मंशा साफ रही तो यह कारोबार 2 से 3 हजार लोगों के हाथों में जा सकता है। जबकि आज बजरी कारोबार प्रदेश में मात्र 53 लोगों के पास ही है। इनमें भी अधिकांश खानें एक ही ग्रुप के पास बताई जा रही हैं। नदी के पेटे में दो हजार खानें सरकारी भूमि पर और 1 हजार खानें खातेदारी भूमि पर नदियों के सहारे दी जा सकती हैं। लेकिन इस खान आवंटन के लिए राज्य सरकार को साफ मंशा के साथ आवंटन प्रक्रिया अपनानी होगी।

 

प्रदेश में लम्बे समय से बजरी के छोटे पट्टे जारी करने की उठ रही मांग के बाद खान विभाग ने काफी पहले ही बजरी के छोटे पट्टे देने को लेकर मंथन शुरू कर दिया था। इसी के तहत 24 अधिक उन ठेकेदारों की नीलामी में दी उन खानों को निरस्त किया था, जो खनन नहीं कर रहे थे। प्रदेश में चल रही 53 खानों के अलावा राज्य सरकार के पास वर्तमान में नदियों में खाली पड़ी जमीन पर 500 से अधिक बजरी खनन के पट्टे दिए जा सकते हैं। इसके अलावा वर्तमान में चल रही 53 खानों की लीज अवधि वर्ष जनवरी-फरवरी 2019 में खत्म हो रही है। इन खनन क्षेत्रों में करीब 1500 खानों का आवंटन हो सकता है।

 

5 से 50 हैक्टेयर तक की होगी छोटी खानें...

विभागीय अधिकारियों के मुताबिक बजरी की छोटी खानें 5 से 50 हेक्टेयर तक की दी जा सकती हैं। फिलहाल विभाग के अधिकारी इसी सीमा को लेकर काम में जुटे हैं। विभाग में पिछले दो-तीन माह से बजरी को लेकर काम तेजी से चल रहा है। इसमें सुप्रीम कोर्ट की ओर से रोक लगने के बाद और तेजी आई है। खास बात यह है कि छोटी खानों को राज्य सरकार के स्तर पर ही पर्यावरण मंजूरी दी जा सकती है।

 

यह भी कर सकती सरकार

सूत्रों के मुताबिक अभी सरकार बजरी के खाली पड़े क्षेत्र में पट्टों की नीलामी को लेकर कवायद कर रही है। लेकिन इस बात पर भी मंथन हो रहा है कि खाली पड़े क्षेत्र के अलावा वर्तमान में चल रही खानों के क्षेत्र में भी नीलामी के जरिए खानों का आवंटन अभी कर दिया जाए। जो क्षेत्र खाली हैं, उनमें खान आवंटन के तत्काल बाद खनन और जो क्षेत्र अगले साल वर्तमान लीजों की अवधि पांच साल की खत्म होने बाद खाली होंगे, तब खनन चालू हो जाएगा। लेकिन खान आवंटन व पर्यावरण अनापत्ति प्रमाण पत्र की प्रक्रिया पहले ही पूरी कर ली जाए।

 

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