देश में छोड़ रहा छाप बूंदी का अमरूद

बूंदी की माटी में पककर तैयार हो रहा अमरूद

बूंदी का अमरूद देश में छोड़ रहा छाप

किसानों का बढ़ा अमरूद की बागवानी की ओर रुझान
किसानों के लिए मुनाफे का सौदा बना अमरूद

देश के कई राज्यों में पहुंच रहा बूंदी का अमरूद

 

Rakhi Hajela

Updated: 29 Nov 2019, 05:17 PM IST

Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India


माटी में पककर तैयार हो रहा अमरूद का स्वाद अब हर जुबां पर छा गया है। साल दर साल वृद्धि से किसानों का इसकी बागवानी की ओर रुझान बढ़ रहा है। यहां का अमरूद अब हाड़ौती की ही नहीं बल्कि देश के कई प्रमुख शहरों में लोगों की पसंद बन गया है। जानकारों की माने तो यहां के अमरूद का आकार देखकर ही लोग इसकी ओर आकर्षित होने लगे। बूंदी शहर सहित तालेड़ा, इंद्रगढ़, नैनवां, कापरेन, देई, उमरच और चापरस क्षेत्र में अमरूद के कई बगीचे लग गए हैं। यहां के अमरूद अब देश की राजधानी दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, गुजरात और मध्य प्रदेश तक की मंडियों में पहुंचने शुरू हो गए हैं।

किसानों के लिए मुनाफे का सौदा

जानकारों की माने तो वर्ष 2019 में अमरूद के बगीचों का रकबा बढकऱ 625 हैक्टेयर हो चुका है। आपको बता दें कि दूर दराज तक फैली बूंदी जिले के अमरूदों की महक के प्रति किसानों का रुझान खूब बढ़ गया है। वर्ष 2013 से कार्यालय खुलने के बाद से ही विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों ने इसका प्रचार.प्रसार भी किया है। साथ ही, किसानों के समक्ष आ रही परेशानियों को भी दूर किया। इसी का परिणाम रहा कि किसानों के लिए यह मुनाफे का सौदा बन गया। अब कृषि विभाग इसके पौध भी किसानों को उपलब्ध करवा रहा है। अमरूदों की दो किस्म में लखनऊ.49 और इलाहाबादी सफेदा अधिक फेमस हैं। साइज अच्छी होने के साथ इसके फल का आकार गुणवत्तापूर्ण होता है। साथ ही इनके सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है जिससे बीमारियां कम लगती हैं। कृषि वैज्ञानिकों का भी कहना है कि अमरूद का फल शरीर में पाचन शक्ति बढ़ाता है क्योंकि यह विटामिन सी का स्त्रोत है।

किसान भी हुए हाईटेक
आपको बता दें कि अमरूद के बगीचे में भी कामकाज अब हाईटेक हो गया है। किसान अपनी फसल को तैयार कर सीधे किसी ठेकेदार को बेच देते हैं, जो फूल आने पर स्वयं ही इसे तोड़कर ले जाते हैं। अब पैकिंग का कार्य शुरू हो गया है। ठेकेदारों ने इसकी पैकिंग कई शहरों में भेजनी शुरू कर दी। पिछले 15 से 20 वर्षों से जिले का अमरूद देशभर में प्रचलित है। 2005 से पहले तक राजस्थान में बूंदी के अमरूद उद्यान पहले नंबर पर बना हुआ था, तब मौसम की बेरुखी के चलते इसके प्रचलन में कमी आ गई थी लेकिन अब एक बार फिर यहां के अमरूदों के प्रति किसान रुचि दिखाने लगे हैं। इस संबंध में सहायक कृषि अधिकारी सुरेश कुमार मीणा का कहना है कि नवम्बर से बगीचों में तुड़ाई का समय शुरू हो जाता है। 15 जनवरी बागवानी की जाती है। इस दौरान बीच.बीच में तुड़ाई का कार्य चलता है। जुलाई में फल लगते हैं, जिसकी तुड़ाई मार्च तक चलती है। वहीं बूंदी उद्यान विभाग के सहायक निदेशक आनंदी लाल मीणा का कहना है कि बूंदी की माटी का अमरूद देशभर की जुबा पर मिठास घोल रहा है। हर साल इसका रकबा बढ़ता जा रहा है। बगीचों में तुड़ाई के साथ पैकिंग का काम भी शुरू हो गया। यहां का अमरूद देश के कई प्रमुख शहरों के लोगों की पसंद बन गया। इस वर्ष 625 हैक्टेयर रकबा हो गया।

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