राजस्थान: 'आरक्षण' चेतावनी के बीच अब नया बवाल, जानें किस बात पर हो रहा गुर्जर V/S सरकार

गुर्जर V/S सरकार में अब तूल पकड़ रहा नया विवाद, पुलिस एफआईआर पर बिफरे हुए हैं गुर्जर नेता, बगैर अनुमति के महापंचायत करने पर हुए हैं मुकदमे, कर्नल बैंसला समेत 33 गुर्जर नेताओं पर दर्ज हुई है एफआईआर, इधर गुर्जरों ने ऊठाई कांग्रेस नेताओं पर मुक़दमे की मांग
- कांग्रेस पार्टी के पूर्व के आयोजन का दिया हवाला, कलक्टर के ज़रिये राज्यपाल तक पहुंचाई गुर्जरों ने अपनी आवाज़

 

By: nakul

Updated: 20 Oct 2020, 12:09 PM IST

जयपुर।

सरकारी भर्तियों में पांच प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर गुर्जर आन्दोलन भले ही टल गया है लेकिन अब एक नए विवाद पर गुर्जर समाज और सरकार आमने-सामने हो गई है। मामला महापंचायत में शामिल हुए गुर्जर नेताओं के खिलाफ एफआईआर से जुडा है। गुर्जर नेताओं ने सरकार के इस रवैये पर ना सिर्फ कड़ा एतराज़ जताया है बल्कि कोरोनाकाल के दौरान हुए कांग्रेस के कार्यक्रमों का हवाला देते हुए नेताओं पर मुकदमे दर्ज करने की मांग की है। इस मांग को लेकर गुर्जरों ने बाकायदा जिला कलक्टर के मार्फ़त राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा है।

गुर्जर नेता व कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला के पुत्र विजय बैंसला ने सरकार को कोरोनाकाल में ही हुए कांग्रेस पार्टी के आयोजनों की याद दिलाई है। ट्विटर पर कांग्रेस कार्यक्रमों की तस्वीरें साझा करते हुए बैंसला ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा तक पर एफआईआर दर्ज करनी की पैरवी की है। उन्होंने कहा कि गुर्जरों के खिलाग एकतरफा कार्रवाई की गई है जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

‘जितना दबाओगे उतना उबाल आयेगा’
बैंसला ने कहा कि सरकार अपनी पावर का गलत इस्तेमाल कर रही है। "समान अपराध समान दंड" के नियम के तहत सरकार को कांग्रेस नेताओं पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि गुर्जर समाज के खिलाफ पुलिस एफआईआर 33 लोगों पर नहीं बल्कि प्रदेश भर के एमबीसी समाज पर हुई है क्योंकि यह महापंचायत समस्त राजस्थान के एमबीसी समाज की बुलाईं गई थी। इन तरीकों से समाज को जितना दबाने की कोशिश की जायेगी उसमें उतना ही उबाल आएगा।

न्याय और हक़ की आवाज़ दबा रही सरकार
गुर्जर नेता हिम्मत सिंह ने कहा है कि गुर्जर नेताओं के खिलाफ मामला दर्ज कर राज्य सरकार एमबीसी के न्याय और हक की आवाज को दबाना चाहती है। उन्होंने कहा कि वैश्विक महामारी कोरोना काल में सभी राजनीतिक दलों ने कई बार धरना-प्रदर्शन किये, लेकिन एक भी एफआईआर दर्ज नहीं हुई। समाज इसका सरकार को करारा जवाब देगी।

ऐसे शुरू हुआ नया विवाद
भरतपुर के बयाना तहसील के अड्डा गांव में शनिवार को गुर्जर महापंचायत बुलाई गई थी। इसमें समाज ने आन्दोलन को स्थगित करने का तो एलान कर दिया था पर अगले ही दिन रविवार को पुलिस ने महापंचायत के आयोजन को कोरोनाकाल में बिना अनुमति होने का हवाला देते हुए गुर्जर नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर डाली।

बयाना पुलिस थाना अधिकारी मदनलाल मीणा ने गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला सहित तीन दर्जन नेताओं के खिलाफ बिना अनुमति के महापंचायत करने व कोविड़-19 की तय गाइडलाइन की पालना नहीं होने को लेकर मामला दर्ज किया है।

nakul Desk
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