जबलपुर की ज्ञानेश्वरी दीदी ने कैंसर मरीजों के लिए बनाया घर जैसा अस्पताल

विराट हॉस्पिस में 7 वर्ष में 1300 कैंसर मरीजों की हुई नि:शुल्क सेवा

 

By: Deepshikha Vashista

Updated: 19 Mar 2020, 07:06 PM IST

जबलपुर. असहनीय दर्द देने वाले कैंसर जैसी गम्भीर बीमारी के अंतिम दौर में पहुंचने वाले मरीजों के लिए शहर का विराट हास्पिटल वरदान साबित हो रहा है। आधुनिक सुविधाओं से युक्त अस्पताल में घर जैसा माहौल है। यहां दर्द से कराहने की स्थिति में पहुंच चुके मरीज भी आपस में कैरम खेलते और भजन गाते हुए दिखते हैं। साध्वी ज्ञानेश्वरी दीदी ने सेवा के संकल्प के साथ शुरू किए इस नि:शुल्क अस्पताल से सेवा भावी लोगों के जुडऩे और इसके समृद्ध होने का क्रम निरंतर जारी है। सात वर्ष में यहां 13 सौ से अधिक मरीजों की सेवा की जा चुकी है।


ब्रह्मर्षि बावरा मिशन चंडीगढ़ से 17 वर्ष पहले नर्मदा तट पर साधना और सेवा करने आईं साध्वी ज्ञानेश्वरी दीदी ने कैंसर मरीजों की सेवा का संकल्प लिया कि जिनके जीवन में दिन नहीं बढ़ा सकते हैं, उनके दिनों में जीवन बढ़ाया जाए। इस संकल्प में बड़ी रकम की आवश्यकता थी लेकिन लोग जुड़ते गए और विराट हॉस्पिस का सपना साकार हो गया। विशेष है कि मरीज के परिवार से कोई शुल्क नहीं लिया जाता है।

दूसरों को थी डेथ रेट की चिंता

साध्वी ज्ञानेश्वरी दीदी कहतीं हैं कि आप अच्छे कार्य करें और उसमें स्वार्थ न हो तो ईश्वर उसे पूरा कराता है। शहर में चार माह तक कोई प्रापर्टी देने का तैयार नहीं हुआ। सेवा में सहयोग करने वाले योगदान करने को तैयार थे। निजी अस्पतालों को ऐसे मरीजों के कारण डेथ रेट बढऩे की चिंता थी। रामपुर स्थित बंदरिया तिराहे पर एक ड्यूप्लेक्स मिला, जिसमें 14 अप्रैल 2013 को 8 बेड से अस्पताल शुरू हुआ। दस दिन में पहला मरीज मिला, धीरे-धीरे यह 15 बेड का हुआ। फिर लम्हेटाघाट के पास तीन एकड़ भूमि खरीदी गई। 15 फरवरी 2017 को 28 बेड का अस्पताल शुरू हुआ। यहां गिर गौ शाला और जैविक तरीक से सब्जियां उगाई जाती है।

रेडियोथैरेपी यूनिट का निर्माण

विराट हॉस्पिस के मरीजों को रेडियोथैरपी के लिए एम्बुलेंस में मेडिकल कॉलेज भेजा जाता है। अस्पताल परिसर में ही रेडियोथैरेपी का निर्माण शुरू हुआ, भविष्य में मरीजों की वहीं थैरेपी की जा सकेगी। योजना है कि यहां डे केयर यूनिट होगा। सरकारी अस्पतालों में जिन मरीजों को एक-दो महीने बाद थैरेपी का नम्बर आता है, इस दौरान उनकी बीमारी भी बढ़ती है, ऐसे लोगों को भी थैरेपी, डे्रसिंग की सुविधा मिलेगी। सर्जरी भी जाएगी।

दिनचर्या में परिवर्तन से दर्द दूर

विराट हॉस्पिस में मरीज को दर्द दूर करने के लिए मार्फिन नामक दवा नहीं दी जाती है, क्योंकि इसके दुष्प्रभाव हैं। दिनचर्या में परिवर्तन से दर्द दूर करने की विधा होती है। साध्वी ज्ञानेश्वरी दीदी का कहना है कि जो अपने घर जाने लायक हैं उन्हें होली के त्योहार में भेज दिया। प्रयास है मरीज जब तक हैं, खुशहाल रहें।

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