आजादी के 100 साल का जश्न, हाइफा डे सेलिब्रेट के लिए जयपुर से गया सेना का दल

आजादी के 100 साल का जश्न, हाइफा डे सेलिब्रेट के लिए जयपुर से गया सेना का दल

Devendra Sharma | Publish: Sep, 04 2018 10:46:41 PM (IST) Jaipur, Rajasthan, India

61 कैवलरी का दल मेजर अर्पित राठी की अगुवाई में इजराइल रवाना, तुर्की से हाइफा की आजादी की लड़ाई में राजस्थान के सेनानियों का रहा है अहम किरदार

जयपुर. हाइफा की आजादी के सौ वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम में इजराइल सरकार के निमंत्रण पर जयपुर से 61 कैवलरी का एक दल मंगलवार को इजराइल के लिए रवाना हुआ। मेजर अर्पित राठी की अगुवाई में दल इजराइल में विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेगा। हाइफा डे के मौके पर इजराइल, दिल्ली और जयपुर में कई कार्यक्रम होंगे। क्योंकि इजराइल के शहर हाइफा की आजादी में भारत व खासतौर पर राजस्थान का विशेष योगदान रहा है।


डिफेंस प्रवक्ता राजस्थान सोम्बित घोष ने बताया कि प्रथम विश्व युद्ध के दौरान इजराइल के शहर हाइफा पर तुर्की ने कब्जा कर लिया था। उसमें 23 सितंबर 1918 को भारत से जोधपुर, मैसूर और हैदराबाद लांसर की घुड़सवार सेना ने हाइफा को आजाद करवाया था। तब से लेकर अब तक इजराइल भारतीय सेना के शौर्य के लिए हाइफा की आजादी का दिन सेलिब्रेट करता है। जयपुर से रवाना हुआ दल वहां पर मेमोरियल और अन्य स्थानों पर जाएगा। हाइफा के मेयर के साथ भी मुलाकात होगी। वहीं जयपुर में 21 व 22 सितंबर को कार्यक्रम आयोजित होगा।


आजादी में राजस्थान का रहा है अहम किरदार
हाइफा की लड़ाई में घुड़सवार सेना का नेतृत्व राजस्थान के मेजर ठाकुर दलपत सिंह ने किया था जो पाली के रहने वाले थे। उनका साथ उप सेनापति कैप्टन अमन सिंह ने निभाया जो दिगराना से हैं। मुख्य रूप से सेना की टुकड़ी राजस्थान से ही थी। जोधपुर लांसर के कर्नल हरि सिंह के इकलौते पुत्र थे दलपत सिंह जो 22 वर्ष की आयु में लड़ाई के दौरान शहीद हुए थे। उनको अंग्रेजी सरकार ने मिलिट्री क्रॉस से नवाजा था, जो कि सर्वोच्च पदक के रूप में जाना जाता है। हाइफा के माउंट कारमल में इन सभी शूरवीरों का स्मारक मौजूद है। जहां इजराइली अपना आभार प्रकट करते हैं। जुलाई 2017 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसी स्मारक पर श्रद्धांजलि दी थी।


61 कैवलरी रेजिमेंट से जुड़े हैं तार
हाइफा की इस लड़ाई के यादगार तार जयपुर में स्थित 61 कैवलरी रेजिमेंट से जुड़े हुए हैं। जोकि विश्व की एकमात्र कैवलरी रेजिमेंट है। 61 कैवलरी रेजिमेंट जोधपुर लांसर व मैसूर लांसर के एकीकरण का वतमतान रूप है। इसलिए 61 कैवलरी रेजिमेंट को इस बहादुरी की विरासत के संरक्षक के रूप में जाना जाता है। कैवलरी रेजिमेंट ने 1 पदमश्री, 10 अर्जुन अवार्ड और कई अन्य पुरस्कार राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय घुड़सवारी व पोलो प्रतियोगिताओं में प्राप्त किए हैं।

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