सियाचिन के दुर्गम क्षेत्रों में खाना पहुंचाएगा ड्रोन, 2022 में भरेगा पहली उड़ान, जानिए खासियत

सियाचिन की दुर्गम पहाड़ी हो या फिर अरूणाचल प्रदेश का घना जंगल। भारतीय सेना को उंचाई वाले स्थानों पर संसाधन पहुंचाने के लिए चीता हेलीकॉप्टर उड़ाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

By: kamlesh

Updated: 05 Feb 2021, 04:11 PM IST

आनंद मणि त्रिपाठी/यलहंका एयरबेस
सियाचिन की दुर्गम पहाड़ी हो या फिर अरूणाचल प्रदेश का घना जंगल। भारतीय सेना को उंचाई वाले स्थानों पर संसाधन पहुंचाने के लिए चीता हेलीकॉप्टर उड़ाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने एक ऐसा हेलीकॉप्टर ड्रोन तैयार कर रहा है, जो न केवल 30 किलोग्राम से अधिक संसाधन ले जाने में सक्षम है, बल्कि धरती से साढ़े पांच किलोमीटर उंचाई तक उड़ान भर सकता है। सियाचिन की ऊंचाई करीब 3.2 किलोमीटर पर ही स्थित है। यह विश्व का इतनी अधिक ऊंचाई पर 30 किलो भार के साथ उड़ाने वाल एकलौता ड्रोन है। एचएएल में प्रोजेक्ट प्रबंधक सुशांत सिंह बताते हैं कि करीबन सभी तैयारी पूरी हो चुकी है। जून 2022 तक यह ड्रोन उड़ान भरना शुरू कर देगा।

24 घंटे में तीन उड़ान
एचएएल इस ड्रोन को भारतीय सेना की मांग पर तैयार कर रहा है। भारतीय सेना ने सियाचिन जैसे स्थलों के लिए पहुंचाए जाने वाले संसाधनों के लिए एक बेहतर विकल्प की तलाश में था। ऐसे में यह ड्रोन बेहतर रूप से सामने आ रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि इसे दिन और रात में कभी भी किसी भी मौसम में संचालित किया जा सकता है। यह 24 घंटे में तीन बार उड़ान भर सकता है।

इस ड्रोन पर काम नहीं करेगा एंटी ड्रोन सिस्टम
सीमाई इलाकों में दुश्मन द्वारा जीपीएस ब्लॉक करके ड्रोन गिराने की कार्रवाई की जा सकती है। इसे ध्यान में रखते हुए एचएएल ने कई सिस्टम बनाए हैं जो जीपीएस ब्लॉक होने के बाद भी काम करता रहेगा और यह ड्रोन आसानी से अपना मिशन पूरा करेगा।

अभी देश में 1.5 से 5.8 गीगा बैंड पर ड्रोन उड़ाए जाते हैं। सबसे खास बात यह है कि यह पूरी तरह से आॅटामैटिक सिस्टम से लैस होगा। इसमें किसी भी जगह का अक्षांश और देशांतर डाल दिया जाएगा और यह उस जगह समान या फिर हथियार पहुंचा देगा। फिर भी कोइ समस्या होती है तो सैन्य स्टेशन में बैठा पायलट इसे खुद उड़ा सकता है।

आम पेट्रोल काम लेंगे
यह सामान्य पेट्रोल पर ही उड़ेगा। पिस्टन इंजन के लिए निविदा मांग ली गई है। इससे भारतीय सेना का खर्च और भी कम हो जाएगा। सियाचिन में चीता हेलीकॉप्टर भी करीब 30 किलो के आसपास का वजन ले उड़ान भरता है। जिसमें बहुत खर्च बढ़ जाता हैं।

स्टार्टअप ने तैयार किया 90 दिन लगातार उड़ाने वाला ड्रोन
अब कोई भी दुश्मन पीछे से आकर हमारे सरजंमी पर नहीं बैठ सकता है। फिर चाहे उस स्थान पर हो या फिर न हो। इस तरह की स्थिति से निपटने के लिए एचएएल ने एक ऐसा ड्रोन तैयार किया है जो कि एक बार उड़ान भरने के बाद 90 दिन तक लगातार हवा में रह सकता है। वह भी 65000 फीट की ऊंचाई पर। एचएएल के साथ मिलकर इसे न्यू स्पेश रिसर्च और टेक्नालाजी स्टार्टअप तैयार कर रहा है। अगले तीन से पांच सालों में इसे भारतीय वायुसेना के लिए उपलब्ध करा दिया जाएगा। सैन्य अधिकारियों की माने तो यह सर्विलांस ड्रोन कश्मीर की बार्डर समस्या के लिए बहुत बेहतर होगा।

कई खासियत से भरा है यह ड्रोन
200 किलोग्राम के साथ टेकऑफ
100 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से भरता है उड़ान
03 घंटे 03 घंटे तक लगातार उड़ान,100 किलोमीटर तक है इसकी रेंज
06 किलोमीटर तक ऊंचाई तक भर सकता है उड़ान
5.5 किलोमीटर तक ऊंचाई पर होवर कर सकता है
30 किलोग्राम तक उठा सकताा है वजन

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