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Rajasthan में women Crime से जुड़ी ये खबर आपके रौंगटे खड़े कर देगी... आपके साथ भी ऐसा हुआ होगा......

पुलिस अफसरों का कहना है कि लगभग दर्ज मुकदमों के सामने करीब 42ः झूठे मुकदमे दर्ज करना साबित हुआ है ।

जयपुर

Published: December 29, 2021 01:49:42 pm

जयपुर],सवाई माधोपुर
.... 5 साल पहले भाभी ने भैया और हम पर मारपीट का आरोप लगाया और वे अपने घर चली गई। उसके दो दिन बाद महिला थाने फोन आया और सभी को बुलाया। पुलिसवालों ने गाली गलौच की। उसके कुछ दिन बाद भैया को पकडकर जेल भेज दिया गया। हम कहते रहे कि हमने कुछ नहीं किया लेकिन पुलिस नहीं मानी। आखिर कुछ महीनों बाद जब कोर्ट को कुछ सबूत नहीं मिला तो एफआर लग गई। लेकिन इन महीनों में पीढि़यों की सामाजिक प्रतिष्ठा खत्म हो गई। मैने काॅलेज छोड़कर प्राईवेट पढ़ाई शुरु कर दी। भैया सवाई माधोपुर छोड़कर जयपुर काम करने चले गए। लोग हमसे अब भी बात नहीं करते... जबकि हमने कुछ किया ही नहीं...।
सुमित गर्ग... सवाई माधोपुर
: Crime against women cases
... हम लड़के वाले थे फिर भी करीब 25 लाख शादी में खर्च किया। पत्नी के परिवार ने भी बराबरी का पैसा लगाया। पत्नी घर आई तो कहा मां से अलग हो जाओ। मैने मना किया... विरोध बढ़ता गया और दो साल बाद मुझ पर दहेज का केस दर्ज हो गया। पत्नी अपने पिता के चली गई। दो साल लगे यह साबित करने में कि पत्नी गलत थी... लेकिन अब शादी खत्म हो गई...। समाज के जो लोग शादी-सगाई में भोज करने आए थे वे बात तक नहीं करते....। समाज के कामों में न्यौते आने बंद हो गए। जबकि हम बेकसूर साबित हो गए...।
रामनारायण शर्मा... सवाई माधोपुर
ये तो सिर्फ दो मामले हैं....। जबकि इन जैसे 1800 से भी ज्यादा परिवार हैं जो गुजरे सात साल से इसी तरह के दंश झेल रहे हैं, जबकि उनका कोई कसूर नहीं था। बड़ी बात ये कि ये 1800 केस तो सिर्फ सवाइ माधोपुर जिले के हैं जबकि प्रदेश में इस तरह के हजारों केस हैं। दरअसल महिला हिंसा और दहेज को लेकर महिलाओं के पक्ष में जो कानून बनाए गए थे इन कानूनों का अब जमकर दुरुपयोग हो रहा है। इसका पुलिस को भी पता है लेकिन उनके हाथ कानून से बंधे हैं।
6 साल में 17 थानों में दर्ज हुए 4200 केस.... 1800 से ज्यादा झूठे, ज्यादा नहीं टिके
सवाई माधोपुर पुलिस के अनुसार साल 2015 सितंबर से 2021 के अंत तक शहर के 17 पुलिस थानों में महिला अत्याचार कानून के तहत 4260 मुकदमें दर्ज किए गए। इनमें 1806 केस झूठे पाए गए और उन पर एफआर लगा दी गई। महिला थाना से लेकर जिलों के सभी थानों में ये केस दर्ज हुए हैं।
जिले के पुलिस अफसरों का कहना है कि लगभग दर्ज मुकदमों के सामने करीब 42ः झूठे मुकदमे दर्ज करना साबित हुआ है ।
थाने से शुर, कोर्ट तक पहुंच और फिर सेटलमेंट
वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज मुद्गल का कहना है कि शायद ही कोई परिवार इस तरह के केसेज से बचा हो कि उनको खानदान या जानकार में इस तरह के केस आए हों। पुलिस थाने से ये घटनाक्रम शुरु होते हैं। फिर थाने में ही परिवार बचाने की जुगत लगाने वाले पुलिस अफसर दो से तीन बार दोनो पक्षों की काउंसलिग कराते हैं। पहली स्टेज पर ही पता लग जाता है कि कौन सच्चा है और कौन झूटा... लेकिन कानून की लकीर को तो पीटना ही होगा। फिर कोर्ट तक मामले पहुंचते हैं कई साल लग जाते हैं और अंत में दोनो परिवार ले देकर सैटलमेंट भी कर लेते हैं। बहुत से केसेज में सबूतों के अभाव में एफआर लग जाती है। दहेज प्रताडना केस में तीन साज की सजा और जुर्माने का प्रावधान जो है।
पुलिस ढीली, इसलिए हो रही जुर्रत
दरअसल महिला अत्याचार कानून का खुलकर दुरुपयोग कर कानून को हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाना आम बात हो चुकी है। जिसका कारण है कि मामले झूठे पाए जाने पर पुलिस द्वारा सात साल के दौरान किसी भी झूठे केस के बाद पुलिस ने केस दर्ज कराने वाले के खिलाफ कार्रवाई नहीं की है।

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