मदर्स डे 2020 : बच्चों से दूरी बनाए रखने को मजबूर ,कोरोना वॉरियर माताओं ने कहा इस वक्त बच्चों से ज्यादा देश को हमारी जरूरत

Happy Mothers Day 2020 : मां शब्द दुनियां का एक अनमोल तोहफा है। मां शब्द बोलते ही लगाता है जैसे सारे दुख दूर हो गए और अब कोई तकलीफ नहीं है। ( Mother's Day ) यह इसलिए है क्योंकि मां ही वह औरत है जो अपने बच्चों के लिए लाख दुख पाकर भी उनके सामने मुस्कुराती है। जी हां आज मदर्स डे है।

By: Kartik Sharma

Updated: 10 May 2020, 10:44 AM IST

Happy Mothers Day 2020 : मां शब्द दुनियां का एक अनमोल तोहफा है। मां शब्द बोलते ही लगाता है जैसे सारे दुख दूर हो गए और अब कोई तकलीफ नहीं है। ( Mother's Day ) यह इसलिए है क्योंकि मां ही वह औरत है जो अपने बच्चों के लिए लाख दुख पाकर भी उनके सामने मुस्कुराती है। जी हां आज मदर्स डे है। उस मां के नाम, जो अपने बच्चों के लिए किसी भगवान से कम नहीं है। ( covid-19 ) कोरोना की इस विपरीत परिस्थितियों में कई मांए ऐसी भी हैं जो कई महीनों से अपने बच्चों से दूर रहकर कर्मवीर के रूप में कोरोना से लड़ रहे मरीजों की जान बचा रही है। आइए दिखाते हैं एक खास रिपोर्ट।

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कोरोना की इस लड़ाई में सैकड़ों चिकित्साकर्मी माताएं जो अपने छोटे-छोटे बच्चों को छोड़ पिछले कई महीनों से इस कोरोना की जंग को जीतने में लगी हैं। इन्हें अपने बच्चों के साथ मदर्स डे मनाने के लिए शायद अगले साल तक इंतजार करना होगा। सवाई मानसिंह अस्पताल में नर्सेज के तौर पर अलग-अलग वार्ड में लगी कई कोरोना वारियर्स माताएं जो अपने छोटे-छोटे बच्चों को अपने आंचल से दूर रखकर कोरोना को हराने में लगी है। इन माताओं से जब हमने बात की तो उनका कहना था आज हमारे बच्चों से ज्यादा हमारी हमारे देख को जरूरत है। हम हमारे बच्चों से तो कुछ दिन बाद मिल लेंगे लेकिन इस संकट की घड़ी में हम हमारे देश को यूं नहीं छोड़ सकते।

अंजू यादव सवाई मानसिंह अस्पताल में नर्सिंग ऑफिसर के पद पर पिछले एक महीने से कोरोना मरीजों का इलाज करने में लगी हुई है। अंजू बताती है उनके पति भी चंडीगढ़ में नर्सिंग ऑफिसर के पद पर कोरोना मरीजों का इलाज कर रहें हैं। उनका कहना है हमारे एक साल की बेटी है, जिसे पिछले दो माह से हमसे दूर कर रखा है। ताकि हम कोरोना मरीजों का इलाज कर सकें। जिस वक्त एक बच्चे को अपनी मां की सबसे ज्यादा जरूरत होती है उस समय मैं उससे दूर हूं। हर मां का एक सपना होता वो अपने बच्चे को बड़ा होता देंखे। लेकिन मैं कोरोना वायरस के कारण नहीं देख पा रहीं हूं। उन्होंने देश के हर एक मां से अपील की अपने बच्चों इस तरह जिम्मेदार बनाएं ताकि वो बड़ा होकर एक जिम्मेदार नागरिक की तरह देश के कुछ काम आ सकें ।

मुनमुन शर्मा चांदपोल स्थित जनाना अस्पताल में काम करती हैं। वर्तमान में जब पूरा विश्व कोरोना महामारी से जूझ रहा है यह समाज में कंधे से कंधा मिलाते हुए अपनी सेवाएं राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के अस्पताल में कोरोना संक्रमित मरीजों की देखभाल करने में दे रही हैं। इनके दो छोटे बच्चे हैं, जिनके नाम छह वर्ष की पुत्री वंशिका और तीन वर्ष का पुत्र वंश उम्र 3 वर्ष है। अपने दोनों बच्चों को जयपुर से 60 किलोमीटर दूर इनके पैतृक गांव छोड कर आई हैं ताकि कोरोना ड्युटी में लगन से काम कर सके। इनका कहना है की देश के प्रत्येक नागरिक को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए तभी इस महामारी से विजय प्राप्त की जा सकती है। कोरोना के खिलाफ जंग में मैं अपनी भूमिका निभा रही हूं हर पल बच्चों व परिवार की फिक्र भी रहती है।

पूनम रानी पूनम पिछले तीन माह से एसएमएस अस्पताल में कोरोना मरीजों का इलाज कर रही है । उनके 14 माह को बच्चा है, जिसे अपने नानी के घर झुंझनूं छोड़ रखी है ताकि अपने साथ उसे कोई खतरा ना हों। पूनम ने बताया कभी कभी वीडियो कॉलिंग करके बच्चे को देख लेतू हूं। जब इतने दिनों बाद वो मुझे देखता है तो रोने लगता है फोन पर हीं गोद में आने को कहता है। पूनम ने इस मदर्स डे पर सभी लोगों से अपील की वो अपने-अपने घरों में रहे ताकि हम जल्द से जल्द इस वायरस को हरा सकें।

अल्का शर्मा ने रामगंज क्षेत्र में 42 दिन तक लगातार सैंपलिंग का काम किया। कोरोना जैसी महामारी के बीच अपने आपको सुरक्षित रखने की चुनौति को स्वीकार किया। बच्चों से दूरी बनाना एक बजबूरी बन गया। कई बार फोन पर बात करके तसल्ली भी की। वर्तमान में इनकी पोस्टिंग ढेर के बालाजी स्थित अस्पताल में है।


चूरू जिले की रहने वाली नर्स सुमन बाबल पिछले कई महीनों से कोरोना पीड़ित मरीजों का इलाज कर रही हैं। सुमन ने कहा कि जब देश मे इतनी बड़ी महामारी फैली हुई है तो मैं अपने फर्ज से पीछे कैसे हट सकती हूं। पति का देहांत हो गया ऐसे में सुमन अकेली मां होते हुए भी कोरोना के खिलाफ जंग में अपनी भूमिका निभा रही है। उनको हर पल अपने बच्चे (ईशु) की फिक्र रहती है। बच्चे को जयपुर स्थित आवास पर अकेला छोड़ रखा है। सुमन ने कहा कि इस वक्त मैं उसकी चिंता छोड़ केवल और केवल कोरोना से लड़ाई के बारे मे सोच रही है।

रजिया आईसोलेशन वार्ड में पिछले दो महीनों से अपने बच्चों को अपने से दूर रखकर इन मरीजों के इलाज में जूटी है। रजिया का कहना था वो भी पिछले दो महने से अपने घर नहीं गई। इस मदर्स डे पर उन्होने लोगों से अपील की अपने अपने घरों में रहे शेफ्टी से रहे ताकि मै अपने बच्चों को जल्द से जल्द मिल संकू।

मदर्स डे पर सलाम है ऐसी माताओं को जो इस विपरीत स्थिति में कोरोना पीड़ितों की जी जान से सेवा कर रही हैं। अपने बच्चों की फीक्र किए बिना, बच्चों से दूर रहकर कि गई यह सेवा किसी बलीदान से कम नहीं है।

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Kartik Sharma Desk
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