मंत्री शांति धारीवाल को हाईकोर्ट के नोटिस,सेवानिवृत्त अधिकारी की नियुक्ति का मामला

(Rajasthan Highcourt) हाईकोर्ट ने (LSG) स्वायत्त शासन व (UDH) नगरीय विकास (Minister) मंत्री (Shanti Dhariwal) शांति धारीवाल सहित स्वायत्त शासन के प्रमुख सचिव,निदेशक,जयपुर नगर निगम आयुक्त से (Retired officer) सेवानिवृत्त अधिकारी को (DLB) डीएलबी और (JMC) नगर निगम जयपुर में (Contract) कांट्रेक्ट पर (Legal consultant) लीगल कंसलटेंट (Appoint) नियुक्त करने पर (reply) जवाब मांगा है।

By: Mukesh Sharma

Published: 01 Jul 2020, 03:54 PM IST

जयपुर
(Rajasthan Highcourt) हाईकोर्ट ने (LSG) स्वायत्त शासन व (UDH) नगरीय विकास (Minister) मंत्री (Shanti Dhariwal) शांति धारीवाल सहित स्वायत्त शासन के प्रमुख सचिव,निदेशक,जयपुर नगर निगम आयुक्त से (Retired officer) सेवानिवृत्त अधिकारी को (DLB) डीएलबी और (JMC) नगर निगम जयपुर में (Contract) कांट्रेक्ट पर (Legal consultant) लीगल कंसलटेंट (Appoint) नियुक्त करने पर (reply) जवाब मांगा है। कोर्ट ने नियुक्त होने वाले अधिकारी महावीर प्रसाद स्वामी से भी जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश इंद्रजीत महांति और न्यायाधीश प्रकाश गुप्ता ने यह अंतरिम निर्देश एडवोकेट गणेश चतुर्वेदी की जनहित याचिका पर दिए।
एडवोकेट सुनील समदडिया ने कोर्ट को बताया कि महावीर प्रसाद स्वामी 31 जुलाई,2013 को स्वायत्त शासन विभाग से संयुक्त विधि परामर्शी के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। 5 अगस्त,2019 को उन्होंने निदेशक स्वायत्त शासन को 50 हजार रुपए प्रतिमाह के पारिश्रमिक पर कांट्रेक्ट पर लीगल कंसलटेंट के पद पर नियुक्ति के लिए आवेदन दिया। निदेशक से मंजूरी देकर फाइल मंत्री को भेज दी और मंत्री शांति धारीवाल ने उसी दिन मंजूरी भी दे दी। अगले ही दिन 6 अगस्त,2019 को नियुक्ति आदेश जारी हो गए और स्वामी ने 7 अगस्त को पहले निदेशालय में और उसी दिन जयपुर नगर निगम में कार्यभार भी ग्रहण कर लिया। इसके बाद मंत्री के आदेश पर स्वामी को जयपुर नगर निगम में निदेशक विधि के पद का भी अतिरिक्त कार्यभार दे दिया।
इसलिए गलत है.....
राजस्थान सिविल सर्विस पेंशन नियम—1926 के नियम 151 और 164ए के अनुसार स्थायी पद पर 65 साल से अधिक आयु वाले व्यक्ति की पुन:नियुक्ति या पुन: नियोजन नहीं हो सकता। स्वामी जुलाई 2018 में ही 66 साल के हो चुके हैं। प्रशासनिक सुधार विभाग के 31 मई,2019 के आदेश के अनुसार किसी भी विभाग में कंसलटेंट की नियुक्ति के लिए मुख्यमंत्री की अनुमति आवश्यक है। जबकि स्वामी के मामले में मुख्यमंत्री ये कोई मंजूरी नहीं ली गई और मंत्री ने अपने ही स्तर पर नियुक्ति की मंजूरी दे दी। कंसलटेंट नियुक्ति के लिए कोई आवेदन नहीं मांगे गए और ना ही कोई प्रक्रिया अपनाई गई। मंत्री ने बिना किसी अधिकारिता के स्वामी को जयपुर नगर निगम में निदेशक विधि पद का अतिरिक्त प्रभार देने के आदेश कर दिए। जिस प्रकार से कार्यवाही की गई उससे साफ है कि सरकार और मंत्री अपने चहेतों को उपकृत करने के लिए नियम कायदों की धज्जियां उडा रहे हैं इसलिए स्वामी की कांट्रेक्ट पर की गई नियुक्ति को निरस्त किया जाए।

Mukesh Sharma
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