छात्रावास अधीक्षकों से की जा रही वसूली पर रोक

(Rajasthan Highcourt) हाईकोर्ट ने वित्त विभाग की अधिसूचना के आधार पर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के (Hostel) छात्रावासों के (Suprindent) अधीक्षकों की (Assured career progression) एसीपी में संशोधन कर निकाली गई (Recovery) रिकवरी की वसूली पर अंतरिम (Stay) रोक लगा दी है।

By: Mukesh Sharma

Published: 18 Apr 2020, 07:40 PM IST

जयपुर
(Rajasthan Highcourt) हाईकोर्ट ने वित्त विभाग की अधिसूचना के आधार पर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के (Hostel) छात्रावासों के (Suprindent) अधीक्षकों की (Assured career progression) एसीपी में संशोधन कर निकाली गई (Recovery) रिकवरी की वसूली पर अंतरिम (Stay) रोक लगा दी है। कोर्ट ने प्रमुख वित्त सचिव और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के आयुक्त और अतिरिक्त निदेशक से जवाब भी मांगा है। न्यायाधीश सबीना और न्यायाधीश सतीश कुमार शर्मा की बैंच ने यह आदेश राजेश कुमार चौधरी व अन्य की याचिका पर दिए।
एडवोेकेट सी.पी.शर्मा ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता छात्रावास अधीक्षकों को पूर्व में 2400 रुपए की ग्रेड पे दी जा रही थी। वहीं वर्ष 2017 में नौ साल की सेवा पूरी करने के बाद उन्हें 2800 रुपए की ग्रेड पे दी गई। वित्त विभाग ने तीस अक्टूबर 2017 को एक अधिसूचना जारी कर नौ साल की सेवा पर 2400 सौ रुपए की एसीपी और 18 साल की सेवा के बाद 2800 रुपए की एसीपी का प्रावधान कर दिया। इस अधिसूचना के आधार पर विभाग ने चार फरवरी को याचिकाकर्ताओं की एसीपी में संशोधन कर पुन: 2400 रुपए कर दिया और इस अवधि में दी गई अधिक राशि की रिकवरी निकाल दी। इसे चुनौती देते हुए कहा है कि एसीपी का अर्थ मिल रही ग्रेड पे से अगली ग्रेड पे होती है। याचिकाकर्ताओं को वर्ष 2017 से पूर्व 2400 रुपए की ग्रेड पे मिल रही थी और उसे नौ साल की सेवा के बाद 28 सौ रुपए किया गया था। ऐसे में यदि तय अवधि पूरी करने के बाद भी अगली एसीपी या ग्रेड पे नहीं देना अवैध है और दी गई राशि की वसूली करना गैर कानूनी है।

Mukesh Sharma
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