चार सप्ताह में बताए केंद्र सरकार उत्पीडि़तों को कैसे दी जाएगी नागरिकता ?-हाईकोर्ट

देशभर में (CAA)नागरिकता संशोधन कानून का विरोध और समर्थन के बीच (Rahjasthan Highcourt)राजस्थान हाईकोर्ट की (pricipal seat at jodhpur)जोधपुर स्थित मुख्यपीठ ने सवाल उठाया है कि (amended act)संशोधित नागरिकता कानून के तहत अब तीन देश से आए प्रताडि़त धार्मिक अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने की (process) प्रक्रिया क्या होगी ? केन्द्र को जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है।

By: Mukesh Sharma

Published: 03 Jan 2020, 08:46 PM IST

जयपुर

देशभर में (CAA)नागरिकता संशोधन कानून का विरोध और समर्थन के बीच (Rahjasthan Highcourt)राजस्थान हाईकोर्ट की (pricipal seat at jodhpur)जोधपुर स्थित मुख्यपीठ ने सवाल उठाया है कि (amended act)संशोधित नागरिकता कानून के तहत अब तीन देश से आए प्रताडि़त धार्मिक अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने की (process) प्रक्रिया क्या होगी ? अदालत ने केन्द्र सरकार को जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। मामले में अगली सुनवाई तीन फरवरी को होगी।
जस्टिस विजय विश्नोई और जस्टिस मनोज कुमार गर्ग की बैंच शरणार्थियों की नागरिकता देने के मामले में स्व:प्रेरणा से दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान न्याय मित्र सज्जनसिंह राठौड़ ने कोर्ट को नागरिकता अधिनियम में हाल ही हुए संशोधन की जानकारी दी। उन्होनें बताया कि अधिनियम में संशोधन के जरिए अफगानिस्तान, बांग्लादेश या पाकिस्तान से हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी या ईसाई समुदाय से संबंधित कोई भी व्यक्ति जिसने 31 दिसंबर, 2014 को या उससे पहले भारत में प्रवेश किया था और जिन्हें पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम, 1920 के तहत या फोरेनर्स एक्ट-1946 के प्रावधानों या इसके अधीन कोई नियम या आदेश से छूट दी गई है को इस कानून के तहत अवैध प्रवासी नहीं माना जाएगा।
कोर्ट ने नए प्रावधान 6 (बी) को भी देखा। इसके अनुसार तय शर्तों के तहत अब नागरिकता देने का अधिकार केंद्र सरकार या एक प्राधिकारी में निहित होगा। इस पर कोर्ट ने केंद्र सरकार के वकील विपुल सिंघवी से संशोधन के बाद लागू प्रावधानों के तहत पड़ोसी देशों के उत्पीडि़त धार्मिक अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने के संबंध में किए जा रहे प्रयासों का ब्यौरा मांगा। सिंघवी ने जवाब देने के लिए समय मांग लिया तो कोर्ट ने अगली सुनवाई 3 फरवरी को तय करते हुए केंद्र सरकार को पूरा ब्यौरा देने को चार सप्ताह में बताए केंद्र सरकार उत्पीडि़तों को कैसे दी जाएगी नागरिकता ?-हाईकोर्टकहा है। केंद्र सरकार को बताना होगा कि संशोधित प्रावधानों के तहत नागरिकता दिए जाने के अधिकार किस प्राधिकारी में निहित होगें और इसकी प्रक्रिया क्या होगी ?

इससे पहले हुई सुनवाई में राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया था कि जिला कलक्टर को नागरिकता देने का अधिकार विकेंद्रीकृत करने के बाद जोधपुर जिले में अक्टूबर, 2019 तक 1,365 पाक विस्थापितों को भारतीय नागरिकता दी जा चुकी थी... जोधपुर जिला प्रशासन को भारतीय नागरिकता के लिए पाक विस्थापितों के कुल 3,090 आवेदन प्राप्त हुए.... इनमें से 434 आवेदनों को प्रथम दृष्टया ही खारिज कर दिया गया क्योंकि इन आवेदनों को नागरिकता अधिनियम के जरुरी प्रावधानों के तहत जमा नहीं करवाया गया था...बाकी 2,656 आवेदनों को इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) की जांच के लिए भेजा गया...इनमें से 2,३14 प्रकरणों की रिपोर्ट प्रशासन को मिली.... 441 पाकिस्तानी विस्थापितों के आवेदनों को आईबी ने नागरिकता दिए जाने योग्य नहीं माना और प्रशासन ने 300 आवेदन खारिज कर दिए... जबकि 155 आवेदन बच्चों को नागरिकता दिए जाने योग्य थे लेकिन इनके साथ माता या पिता के नागरिकता के दस्तावेज नहीं थे....ब्यूरो रिपोर्ट,पत्रिका।

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