परिवार के साथ समय बिताने से तनाव खत्म, दिल पर नहीं होता असर

- अस्पताल में दिल के मरीज हुए कम, परिवार के साथ रहना भी एक वजह

By: Avinash Bakolia

Updated: 23 May 2020, 01:57 PM IST

जयपुर. कोरोना के लॉकडाउन काल में परिवार के साथ समय बिताने, भागदौड़ भरी जिंदगी से तनाव मुक्त रहने के कारण लोगों के दिलों को राहत मिली है। दिल के मरीजों पर 'अटैकÓ कम हुए हैं।
कॉर्डियोलॉजिस्ट का कहना है कि वातावरण का स्ट्रेस कम हो गया है। शहर में प्रदूषण नहीं हो रहा है। इस वजह से हार्ट के मरीजों में ब्लड प्रेशर, डायबिटीज नहीं बढ़ रही है। इसलिए हार्ट अटैक की संभावना कम हो गई है।
सवाई मानसिंह अस्पताल के कॉर्डियोलॉजी विभाग के सीनियर प्रोफेसर डॉ. विजय पाठक ने बताया कि मरीजों का एक्टिविटी लेवल कम होने हार्ट पर दबाव नहीं पड़ रहा है। इसके अलावा परिवार के लोग कोरोना से डर कर मरीज को अस्पताल में नहीं ला रहे है। इस वजह से अस्पतालों में मरीजों के केस रिपोर्ट नहीं हो रहे हैं। रूटीन के मरीज लॉकडाउन खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं।

मरीजों की संख्या 500 से घटकर अब 150 रह गई
अस्पतालों से मिली जानकारी के अनुसार रोजाना 10-15 हार्ट अटैक के मरीज आते थे। अब इनकी संख्या घट गई। लॉकडाउन से पहले हार्ट के मरीजों का 500 से 1000 आउटडोर रहता था और भर्ती मरीजों की संख्या 150 से अधिक थी। अब अस्पताल में मरीज नहीं आने से आउटडोर घटकर 50 से 100 रह गया है। साथ ही भर्ती मरीज भी 15 से 20 ही रह गए हैं।

कम हो गई जांच
सवाई मानसिंह अस्पताल में कोरोना की वजह से इमरजेंसी जांचों के अलावा अन्य कोई जांच नहीं हो रही है। लॉकडाउन से पहले शहर में एंजियोग्राफी 100 से 150 होती थी। एसएमएस में यह आंकड़ा 50 से 60 था। इसके अलावा शहर में रोजाना करीब 20 एंजियोप्लास्टी होती थी और एसएमएस 12-15 होती थी। इतना ही नहीं एसएमएस में रोजाना 150 से अधिक इको होती थी। अब जिन हार्ट के मरीजों को भर्ती करना है उनकी एंजियोप्लास्टी से पहले कोविड टेस्ट किया जाता है। उसके बाद ही एंजियोप्लास्टी की प्रक्रिया शुरू होती है।

इनका कहना है-

यदि आपको हार्ट की समस्या है तो अस्पताल आएं। बांगड, धन्वंतरि भवन में कोविड मरीज नहीं है। हमारे वार्ड बांगड़ में हैं वहां भी कोरोना मरीज नहीं है। कोरोना से डरने की जरूरत है।
- डॉ. एस.एम. शर्मा, विभागाध्यक्ष, कॉर्डियोलॉजी

एंजियोप्लास्टी ऑपरेशन कम हो गए हैं। वो इसलिए कम हो गई है ज्यादातर मरीजों का इलाज थक्का घोलने वाली दवाइयों से किया जा रहा है। एंजियोप्लास्टी कोरोना जांच के बाद ही की जा रही है। इससे प्राइमरी एंजियोप्लास्टी की दर काफी हो गई है।
- डॉ. सुनील जैन, कॉर्डियोलॉजिस्ट, एसएमएस अस्पताल

Avinash Bakolia Reporting
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